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Kanpur News: एआईटीडी के थर्ड आई स्टार्टअप को राज्यपाल करेंगी सम्मानित
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बीटेक की छात्रा रोजी मैन्दौलिया।
- फोटो : स्वयं
कानपुर। डॉ. आंबेडकर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी फॉर दिव्यांगजन (एआईटीडी) की बीटेक की छात्रा रोजी मैन्दौलिया के स्टार्टअप थर्ड आई को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल सम्मानित करेंगी।
बीटेक की छात्रा।
उनको नौ सितंबर को होने वाले दीक्षांत समारोह में एकेटीयू स्टूडेंट स्टार्टअप अवार्ड के तहत वुमन कैटेगरी में सम्मानित किया जाएगा। रोजी का थर्ड आई स्टार्टअप गांवों की महिलाओं को हुनरमंद बनाकर उनके बनाए उत्पाद को सीधे कस्टमर को सौंपता है। उनका स्टार्टअप एआईटीडी से इंक्यूबेटेड है।
हैंड एम्ब्रॉयडर्ड परिधानों और हस्तनिर्मित एसेसरीज से शिल्पकला और सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक फैशन के साथ जोड़ने वाले रोजी के स्टार्टअप से कानपुर और दिल्ली के गांवों से लगभग 82 शिल्पकार जुड़े हुए हैं।
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रोजी बताती हैं कि कॉलेज के दूसरे वर्ष के दौरान उन्नत भारत अभियान के तहत गांवों को गोद लिया गया था। उस दौरान कई गांवों के भ्रमण पर गई तो देखा कि सिलाई में महिलाओं को एक दिन का 50 रुपया मिलता है।
इसे देखकर ही थर्ड आई स्टार्टअप का विचार आया। इसके बाद देश की पुरानी कलाकारी पर शोध किया। स्वयं सीखा और फिर इसको महिलाओं को सिखाया। मौजूदा समय में वह कानपुर और दिल्ली में महिलाओं को ट्रेनिंग दे रहीं हैं।
जो महिलाएं पहले 50 रुपये कमाती थी वह अब दिन के 500 रुपये तक कमाती हैं। यदि कोई कारीगर चार से पांच घंटे प्रतिदिन कार्य करता है तो वह आसानी से महीने में 15,000 तक आमदनी कर सकता है।
थर्ड आई का उद्देश्य है ग्रामीण कारीगरों, विशेषकर महिलाओं को उचित पारिश्रमिक दिलाने के साथ उनके हुनर को पहचान दिलाना है। वह कहती हैं कि घर में बिना बताए इस स्टार्टअप की शुरुआत की थी। ट्यूशन कर शुरुआत के खर्च निकाले। अब परिवार को उन पर गर्व है।
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बीटेक की छात्रा।
उनको नौ सितंबर को होने वाले दीक्षांत समारोह में एकेटीयू स्टूडेंट स्टार्टअप अवार्ड के तहत वुमन कैटेगरी में सम्मानित किया जाएगा। रोजी का थर्ड आई स्टार्टअप गांवों की महिलाओं को हुनरमंद बनाकर उनके बनाए उत्पाद को सीधे कस्टमर को सौंपता है। उनका स्टार्टअप एआईटीडी से इंक्यूबेटेड है।
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हैंड एम्ब्रॉयडर्ड परिधानों और हस्तनिर्मित एसेसरीज से शिल्पकला और सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक फैशन के साथ जोड़ने वाले रोजी के स्टार्टअप से कानपुर और दिल्ली के गांवों से लगभग 82 शिल्पकार जुड़े हुए हैं।
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रोजी बताती हैं कि कॉलेज के दूसरे वर्ष के दौरान उन्नत भारत अभियान के तहत गांवों को गोद लिया गया था। उस दौरान कई गांवों के भ्रमण पर गई तो देखा कि सिलाई में महिलाओं को एक दिन का 50 रुपया मिलता है।
इसे देखकर ही थर्ड आई स्टार्टअप का विचार आया। इसके बाद देश की पुरानी कलाकारी पर शोध किया। स्वयं सीखा और फिर इसको महिलाओं को सिखाया। मौजूदा समय में वह कानपुर और दिल्ली में महिलाओं को ट्रेनिंग दे रहीं हैं।
जो महिलाएं पहले 50 रुपये कमाती थी वह अब दिन के 500 रुपये तक कमाती हैं। यदि कोई कारीगर चार से पांच घंटे प्रतिदिन कार्य करता है तो वह आसानी से महीने में 15,000 तक आमदनी कर सकता है।
थर्ड आई का उद्देश्य है ग्रामीण कारीगरों, विशेषकर महिलाओं को उचित पारिश्रमिक दिलाने के साथ उनके हुनर को पहचान दिलाना है। वह कहती हैं कि घर में बिना बताए इस स्टार्टअप की शुरुआत की थी। ट्यूशन कर शुरुआत के खर्च निकाले। अब परिवार को उन पर गर्व है।