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Kanpur: धर्मार्थ की जमीन पर तान दी स्वार्थ की इमारत, करोड़ों की सरकारी जमीन पर सालों से है कब्जा, जानें मामला

Sat, 13 Apr 2024 10:06 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sat, 13 Apr 2024 10:06 AM IST
सार

Kanpur News: वर्ष 1946 में कानपुर डेवलपमेंट बोर्ड ने बिरहाना रोड में धर्मार्थ एंटी ट्यूबरकुलोसिस क्लीनिक के लिए जमीन दी थी। इसका चिकित्सालय बनवाने के बजाय व्यावसायिक इस्तेमाल हो रहा है और लाखों रुपये किराया वसूला जा रहा है।

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Government land worth crores has been occupied for years in the name of charitable hospital, KDA sent notice
इसी बिल्डिंग का परमार्थ क्लीनिक के नाम पर हो रहा है व्यवसायिक उपयोग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर के पॉश इलाके बिरहाना रोड में धर्मार्थ एंटी ट्यूबरकुलोसिस चिकित्सालय के लिए आजादी के पहले एक लाख रुपये सालाना शुल्क पर दी गई करोड़ों की सरकारी जमीन (1613 वर्गगज) पर एक संस्था कब्जा जमाए बैठी है। चिकित्सालय के निर्माण के बजाय सालों से उसका व्यावसायिक इस्तेमाल कर लाखों रुपये किराया वसूला जा रहा है। मामले का खुलासा होने पर मंडलायुक्त ने केडीए से रिपोर्ट मांगी।

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इस पर केडीए ने पट्टाधारक, विधिक उत्तराधिकारी व अध्यासियों (रहने वालों) को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है। डीएम सर्किल रेट के अनुसार वर्तमान में इस जमीन की कीमत 17.74 करोड़ रुपये है। वहीं, अगर बाजारू भाव देखा जाए तो इसकी कीमत करीब 40.74 करोड़ रुपये है। देश में आजादी के पहले ट्यूबरकुलोसिस (टीबी या तपेदिक) महामारी के रूप में फैली हुई थी।

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टीबी रोगियों के इलाज के लिए एक धर्मार्थ चिकित्सालय की स्थापना की जरूरत महसूस हुई। इस पर तत्कालीन कानपुर डेवलपमेंट बोर्ड ने 28 नवंबर 1946 को कानपुर एंटी ट्यूबरकुलोसिस एसोसिएशन के सचिव एसपी मेहरा को एक जमीन की लीज डीड की गई, जो नौ दिसंबर 1946 को पंजीकृत हुई।

धर्मार्थ एंटी ट्यूबरकुलोसिस क्लीनिक की करनी थी स्थापना
इसके तहत बिरहाना रोड स्थित प्लाट नंबर 28 ए पर निर्मित रजा मंजिल नामक परिसर 24/173 और खाली प्लाट नंबर 28 को 999 वर्ष के लिए पट्टे पर दिया गया। एसोसिएशन को धर्मार्थ एंटी ट्यूबरकुलोसिस क्लीनिक की स्थापना करनी थी। शर्त यह भी थी कि इस संपत्ति को किसी अन्य उपयोग में नहीं लाया जाएगा। संपत्ति मिलने के बाद एसोसिएशन ने धर्मार्थ चिकित्सालय की स्थापना करने के बजाय दूसरे इस्तेमाल में लिया।

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अवैध रूप से बिल्डिंग का निर्माण कर किराये पर दिया
वर्तमान में यह मकान नंबर 24/56 (क्षेत्रफल 496 वर्गगज) और 24/57 (क्षेत्रफल 1117 वर्गगज) है। इसमें अवैध रूप से बिल्डिंग का निर्माण कर वकीलों, चार्टर्ड एकाउंटेंट, प्राइवेट प्रैक्टिशनर्स, टेलर्स, इलेक्ट्रीशियन आदि को किराये पर दे दिया गया। इसके अलावा टीबी के मरीजों के लिए पार्क की स्थापना के लिए दी गई जमीन पर भी बिल्डिंग का निर्माण कर एक सेंट्रल चेस्ट क्लीनिक की स्थापना की गई।

जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज कराई थी शिकायत
साथ ही, बैंक व कोचिंग क्लासेज किराये पर चलवाए जा रहे हैं। पिछले दिनों पारिवारिक विवाद के बाद विष्णुपुरी निवासी राजेश मेहरोत्रा ने जनसुनवाई पोर्टल पर इसकी शिकायत दर्ज कराई थी। बताया कि एसोसिएशन में एसपी मेहरा, उनकी पत्नी सुहिला मेहरा, बेटा सुरेश मेहरा, बहू प्रमिला, बेटी चाया मणि व माया टंडन, पौैत्र सुमत मेहरा व उनकी पत्नी शिरीन और पौत्री समीता मेहरा हैं।

संपत्ति पर आवासीय व व्यावसायिक निर्माण है
शिकायत पर मंडलायुक्त ने केडीए से जांच रिपोर्ट मांगी थी। केडीए के विक्रय जोन-वन के विशेष कार्याधिकारी रवि प्रताप सिंह ने अपर आयुक्त को भेजी रिपोर्ट में माना है कि संपत्ति पर आवासीय व व्यावसायिक निर्माण है, जो सालों पहले से बना है और चल रहा है। लीज की शर्तों का उल्लंघन होने के कारण नियमानुसार कार्रवाई के लिए पट्टाधारक, विधिक उत्तराधिकारी व अध्यासियों को नोटिस भेजा है।

धर्मार्थ टीबी चिकित्सालय की जमीन का व्यावसायिक उपयोग करने के संबंध में आईजीआरएस और कुछ लोगों ने केडीए आकर शिकायत की थी। प्रवर्तन विभाग को मौके पर भेजा गया, तो वहां बैंक, एटीएम, सिक्योरिटी कार्यालय आदि चलते मिले हैं। नोटिस दिया गया है। संतोषजनक जवाब नहीं दिया तो निरस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।  -रवि प्रताप सिंह, विशेष कार्याधिकारी, जोन-वन

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