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सरकारी फैक्ट्रियां तैयार करेंगी छोटे उद्यमी

Mon, 27 Jun 2016 12:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर Updated Mon, 27 Jun 2016 12:58 AM IST
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Government factories process the small entrepreneur
कागज के कारखाने में आग लग गई
कानपुर। शहरों में औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने अब सरकारी फैक्ट्रियों के इस्तेमाल की योजना बनाई है। ये फैक्ट्रियां छोटे उद्यमियों को उद्योग के लिए तैयार करेंगी। साथ ही उत्पादन में इस्तेमाल होेने वाले कंपोनेंट की खरीद भी इन्हीं छोटे उद्यमियों से की जाएगी। इसके लिए सरकारी फैक्ट्रियों अथवा कंपनियों के लिए वेंडर डेवलपमेंट प्रोग्राम अनिवार्य किया गया है।
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लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उद्योग विभाग के अधिकारी ने बताया कि वेंडर डेवलपमेंट प्रोग्राम के जरिये ये फैक्ट्रियां उद्यमियों को बेहतर प्रोडक्ट बनाने की ट्रेनिंग देंगी। साथ ही यह भी बताएंगी कि उन्हें क्या जरूरत है और किस फैक्ट्री में किस तरह के उपकरणों की आवश्यकता पड़ती है। इस प्रोग्राम के जरिये पीएसयूज जरूरत के मुताबिक छोटे उद्यमियों से माल खरीद सकेंगी। इससे लघु एवं सूक्ष्म उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और बड़ी कंपनियों की विदेश पर निर्भरता कम होगी। 
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टेक्नोलॉजी सेंटर के लिए आथर्टन प्रस्तावित 
कानपुर (ब्यूरो)। शहर में बनने वाले बहु प्रतीक्षित टेक्नोलॉजी सेंटर के लिए जरीब चौकी स्थित आथर्टन मिल सबसे उपयुक्त है। हालांकि यहां म्योर मिल की अपेक्षा जमीन कम है लेकिन आथर्टन की जमीन फ्रीहोल्ड होेने की वजह से इसका भू उपयोग आसानी से बदला जा सकेगा। नेशनल टेक्सटाइल कारपोरेशन ने टेक्नोलॉजी सेंटर के लिए इसी जमीन को प्रस्तावित किया है। आखिरी फैसला दो जुलाई को दिल्ली में होने वाली बोर्ड की मीटिंग में होगा। नेशनल टेक्सटाइल कारपोरेशन के अधिकारियों का कहना है कि जिस जमीन पर टूल रूम बनेगा, उसका किराया लघु सूक्ष्म एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) विभाग को देना होगा। यह किराया  सर्किल रेट के हिसाब से 10, 20 या 50 साल की लीज के आधार पर वसूला जाएगा। जमीन के किराये और शहर के उस क्षेत्र में टेक्नोलॉजी सेंटर की  उपयोगिता के आधार पर आथर्टन को इसके लिए उपयुक्त माना गया है। लघु सूक्ष्म एवं मध्यम उद्योग विभाग को भी यह जमीन पसंद आ रही है। इसलिए इस जमीन को फाइनल करने का प्रस्ताव भेज दिया गया है। आखिरी फैसला मंत्रालय और एनटीसी के बड़े अधिकारियों को लेना है। 
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टूल रूम नहीं टेक्नोलॉजी सेंटर कहिए 
लघु सूक्ष्म एवं मध्यम उद्योग विभाग ने टूल रूम को टेक्नोलॉजी सेंटर नाम दिया है। विभागीय अधिकारी बताते हैं कि यहां टेक्नोलॉजी आधारित ट्रेनिंग दी जाएगी।  टूल रूम में आमतौर पर मैकेनिकल ट्रेनिंग दी जाती है। इसलिए किसी टेक्नोलॉजी   सेंटर में एक से अधिक टूल रूम हो सकते हैं। इस वजह से इसे टूल रूम कहना उपयुक्त नहीं होगा। 
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