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आजादी का मतलब आगे बढ़ना, पुरानी लकीर पीटना नहीं

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Fri, 14 Aug 2020 09:54 PM IST
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Freedom means moving forward, not beating old lines  
कानपुर। आजादी का मतलब पुरानी यादों को संजो कर ठहर जाना नहीं है। आजाद होने का मलतब है निरंतर आगे बढ़ना और अपने को कल से बेहतर के लिए तैयार करना। इसके लिए सोच को थोड़ा और आजाद करना होगा। अनुशासन को अपनाना होगा। हम आजाद हैं लेकिन अनुशासित नहीं। यह ऐसी बात है जिसे उम्र के लिहाज से हर पीढ़ी के लोगों के मन खटकती है। लोगों के लिए आजादी के क्या मायने हैं यह जानने के लिए हमने हर आयु वर्ग के लोगों से बात की। आप भी जानिए किसके लिए आजादी के क्या मायने हैं? ----- मेरे लिए तो आजादी के यही मायने हैं कि हम जिस भी क्षेत्र में रहें वहां अच्छी शिक्षा हासिल कर सकें। अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें। पढ़लिख कर तैयार हो तो रोजगार के साधन मिलें और अपना जीवन अच्छे से व्यतीत कर सकें। यदि हम अभी भी अशिक्षा, बीमारी, भुखमरी, बेरोजगारी से जूझ रहे हैं तो इसका मतलब यह है कि कहीं ना कहीं आजाद नहीं हैं। अंग्रेजों से आजादी दिलाई हमारी स्वतंत्रता सेनानियों ने, मगर अब इन विसंगतियों से आजादी दिलाने का काम सरकार का है। सौम्या त्रिपाठी, बीएसी, कानपुर यूनिवर्सिटी मेरे लिए आजादी का मतलब ढर्रे पर चली आ रही व्यवस्था पर खुश होना भर नहीं है। युवा उद्यमी होने के नाते मेरे लिए आजाद होने का मतलब है जटिल नियमों और व्यवस्थाओं से आजादी। आज के समय में कोई भी ऐसा नियम या कानून जो देश को तकनीक और आर्थिक रूप से आगे बढ़ने में रोके, ऐसी व्यवस्था से आजादी मिलनी चाहिए। मैं युवा उद्यमी हूं। स्टार्टअप शुरू किया है। मगर जटिल नियमों में जकड़ा हूं। इससे उद्यम प्रभावित होगा और विकास रुकेगा। इससे आजादी मिलनी चाहिए। शुभांकर बंका, युवा उद्यमी --- हम अंग्रेजों के गुलाम नहीं हैं, ये अच्छी बात है। मगर हम अपने ही अव्यवस्थाओं के गुलाम होकर रह गए हैं। मैं अपने शहर को इस औद्योगिक क्षेत्र को बीते 69 वर्षों से देख रहा हूं। यह शहर के क्षेत्र दुर्दशाओं का गुलाम होकर रह गया है। मेरे लिए तो आजादी के यही मायने हैं कि देश के नेता, अफसर ईमानदारी से काम करते हैं और अपने अपने क्षेत्रों के विकास के बारे में बेहतर सोच रखते। मगर ऐसा नहीं हो पा रहा है। जब जनता का पैसा जनता के लिए खर्च होने लगेगा तब मानेंगे कि हम आजाद हैं। महेश कुमार रस्तोगी, बुजुर्ग उद्यमी, प्रबंध निदेशक स्वदेशी फुटवियर
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