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तालाबों से कब्जे हटेंगे, टीम बनेगी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 19 Apr 2016 01:20 AM IST
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तालाब
- फोटो : अमर उजाला
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कानपुर। तालाबों-झीलों की दुर्दशा पर अमर उजाला के अभियान को संज्ञान में लेते हुए जिले के प्रभारी मंत्री बलवंत सिंह रामूवालिया ने तालाबों से अवैध कब्जे हटाने के लिए अभियान चलाने के निर्देश दिए। जिला योजना समिति की बैठक में उन्होंने कहा कि तालाबों-झीलों पर कब्जे की तमाम शिकायतें आ रही हैं इसलिए अब जिला स्तरीय अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों की टीम ऐसे मामलों की जांच करेगी और रिपोर्ट देगी। इस पर कार्रवाई की जाएगी। इसमें किसी तरह का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं रहेगा।
बैठक में जिला पंचायत सदस्य जितेंद्र प्रताप सिंह दीपू ठाकुर ने कहा कि तालाब खुदाई का काम योजनाबद्ध तरीके से नहीं हो रहा है। जहां खुदाई हो रही, वहां बारिश का पानी इकट्ठा नहीं हो सकता है। मनरेगा से तालाबों की खुदाई ऊंचाई पर कराई जाती है जिनमें बारिश का पानी बहकर आ ही नहीं पाता। यह घोटाला है। इसके अलावा तालाबों के भरने की भी झूठी रिपोर्ट दी जा रही है। इस पर भी अफसरों ने जांच की बात कही। अमर उजाला के एक अन्य मुद्दे राजा ययाति के किले पर कब्जे का मामला भी बैठक में उठा। भाजपा विधायक रघुनंदन भदौरिया ने कहा कि ऐतिहासिक इमारतों पर अवैध कब्जा चिंता का विषय है। इस पर जिलाधिकारी ने कहा कि केडीए से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। कहा जाएगा कि संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय करें ताकि अवैध कब्जों में कार्रवाई की जा सके।
निशाने पर जीएम जल संस्थान
जन प्रतिनिधियों के गुस्से का शिकार जीएम जल संस्थान को होना पड़ा। सपा विधायक सतीश निगम ने शिकायत दर्ज करानी शुरू की तो जीएम जल संस्थान को तलब किया गया। जीएम 15 मिनट तक खड़े होकर विधायक की बात सुनते रहे और जवाब देते रहे। बाद में मंत्री ने मामले मेें हस्तक्षेप किया। कहा कि अधिकारियों से सम्मानित तरीके से काम लिया जाना चाहिए। जिला पंचायत सदस्यों और पार्षदों ने भी पानी संकट पर हो हल्ला मचाया। भाजपा नेताओं ने हंगामा भी किया और मीटिंग के बहिष्कार की धमकी दी। जिलाधिकारी ने बताया कि प्रस्तावित बजट का मसौदा शासन को भेजा जा रहा है।
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400 करोड़ रुपये नहीं मिला
जिला योजना का 2014-15 में कुल बजट 519 करोड़ रुपये था लेकिन मिले सिर्फ 119 करोड़। 400 रुपये के बजट प्रस्ताव पर चर्चा तक नहीं हो सकी। इस पर सोमवार को जिला योजना समिति ने चिंता जताई और कहा कि प्रस्तावित बजट का आवंटन बढ़ाया जाएगा।
इस बार भी पर्याप्त बजट पर संशय
पेयजल योजनाओं के लिए 2015-16 में भी 100 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित था लेकिन शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 14 करोड़ रुपये का बजट मिल सका। अब 2016-17 के पेयजल का बजट प्रस्तावित किया गया है। यह बजट मिलेगा या नहीं, इस पर संशय है। यह मुद्दा जिला योजना समिति की मीटिंग भी उठा। कहा गया कि जो बजट जिला योजना से पास हो, वह शासन से मिले, इसकी व्यवस्था प्रभारी मंत्री और कारागार मंत्री को सुनिश्चित करना चाहिए।
बजट 100 करोड़ मिले सिर्फ 14
कानपुर। 2015-16 में पेयजल के लिए 100 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित था लेकिन शासन से मिले सिर्फ करीब 14 करोड़ रुपये थे। इस पर जन प्रतिनिधियोें ने चिंता जताई और कहा कि बजट का मिलना सुनिश्चित कराया जाना चाहिए।
राजीव गांधी विद्युतीकरण में हीलाहवाली का मुद्दा उठा
राजीव गांधी विद्युतीकरण में हीलाहवाली का मामला भी उठा। कहा गया कि एजेंसी मनमानी पर उतारू है। करीब 1800 गांवों में विद्युतीकरण का काम होना था लेकिन 300 गांव भी नहीं हो सके। अब यह काम विभाग से कराने की सिफारिश की गई है।
आपदा राहत का बजट नहीं
सूखे में पेयजल संकट से निपटने का बजट अभी तक नहीं मिला। जिले से 11.76 करोड़ रुपये की धनराशि मांगी गई थी लेकिन पैसा नहीं मिला। सोमवार को जिलाधिकारी ने मामला प्रभारी मंत्री को बताया और कहा कि आपदा राहत का बजट मिल जाए तो काम तेजी से आगे बढ़ाया जा सकेगा।
सबमर्सिबल पंप लगवाने की वकालत
हैंडपंप लगाने में अनियमितता का आरोप लगाकर सीसामऊ विधानसभा क्षेत्र से विधायक इरफान सोलंकी ने सबमर्सिबल पंप लगवाने की वकालत की। जिलाधिकारी से कहा कि क्षेत्र में चार हैंडपंप लगवाने के बजाए एक सबमर्सिबल पंप लगवा दिया जाए तो बेहतर रहेगा। इस संबंध में शासन से दिशा-निर्देश मांगने की बात कही गई।
मीटिंग में नहीं दिखे दो विधायक
महराजपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक सतीश महाना और बिल्हौर विधानसभा क्षेत्र से विधायक/मंत्री अरुणा कोरी मीटिंग में नहीं दिखे। उनकी जगह जन प्रतिनिधि आए लेकिन वह पानी-बिजली समस्या का मामला नहीं उठा सके।
सपाई लेट पहुंचे
समिति की मीटिंग में विधायक सतीश निगम और मुनींद्र शुक्ला सहित तमाम नेता लेट पहुंचे। घाटमपुर से विधायक इंद्रजीत कोरी मीटिंग के अंतिम दौर में पहुंच सके। सब कुछ हो गया, पानी संकट पर हाय तौबा की।
मई में समीक्षा
केेंद्रीय योजनाओं और उसके कामकाज की समीक्षा मई में होगी। यह समीक्षा क्षेत्रीय सांसद करते हैं। इसका नाम विजिलेंस कमेटी होता है।
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बैठक में जिला पंचायत सदस्य जितेंद्र प्रताप सिंह दीपू ठाकुर ने कहा कि तालाब खुदाई का काम योजनाबद्ध तरीके से नहीं हो रहा है। जहां खुदाई हो रही, वहां बारिश का पानी इकट्ठा नहीं हो सकता है। मनरेगा से तालाबों की खुदाई ऊंचाई पर कराई जाती है जिनमें बारिश का पानी बहकर आ ही नहीं पाता। यह घोटाला है। इसके अलावा तालाबों के भरने की भी झूठी रिपोर्ट दी जा रही है। इस पर भी अफसरों ने जांच की बात कही। अमर उजाला के एक अन्य मुद्दे राजा ययाति के किले पर कब्जे का मामला भी बैठक में उठा। भाजपा विधायक रघुनंदन भदौरिया ने कहा कि ऐतिहासिक इमारतों पर अवैध कब्जा चिंता का विषय है। इस पर जिलाधिकारी ने कहा कि केडीए से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। कहा जाएगा कि संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय करें ताकि अवैध कब्जों में कार्रवाई की जा सके।
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निशाने पर जीएम जल संस्थान
जन प्रतिनिधियों के गुस्से का शिकार जीएम जल संस्थान को होना पड़ा। सपा विधायक सतीश निगम ने शिकायत दर्ज करानी शुरू की तो जीएम जल संस्थान को तलब किया गया। जीएम 15 मिनट तक खड़े होकर विधायक की बात सुनते रहे और जवाब देते रहे। बाद में मंत्री ने मामले मेें हस्तक्षेप किया। कहा कि अधिकारियों से सम्मानित तरीके से काम लिया जाना चाहिए। जिला पंचायत सदस्यों और पार्षदों ने भी पानी संकट पर हो हल्ला मचाया। भाजपा नेताओं ने हंगामा भी किया और मीटिंग के बहिष्कार की धमकी दी। जिलाधिकारी ने बताया कि प्रस्तावित बजट का मसौदा शासन को भेजा जा रहा है।
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400 करोड़ रुपये नहीं मिला
जिला योजना का 2014-15 में कुल बजट 519 करोड़ रुपये था लेकिन मिले सिर्फ 119 करोड़। 400 रुपये के बजट प्रस्ताव पर चर्चा तक नहीं हो सकी। इस पर सोमवार को जिला योजना समिति ने चिंता जताई और कहा कि प्रस्तावित बजट का आवंटन बढ़ाया जाएगा।
इस बार भी पर्याप्त बजट पर संशय
पेयजल योजनाओं के लिए 2015-16 में भी 100 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित था लेकिन शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 14 करोड़ रुपये का बजट मिल सका। अब 2016-17 के पेयजल का बजट प्रस्तावित किया गया है। यह बजट मिलेगा या नहीं, इस पर संशय है। यह मुद्दा जिला योजना समिति की मीटिंग भी उठा। कहा गया कि जो बजट जिला योजना से पास हो, वह शासन से मिले, इसकी व्यवस्था प्रभारी मंत्री और कारागार मंत्री को सुनिश्चित करना चाहिए।
बजट 100 करोड़ मिले सिर्फ 14
कानपुर। 2015-16 में पेयजल के लिए 100 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित था लेकिन शासन से मिले सिर्फ करीब 14 करोड़ रुपये थे। इस पर जन प्रतिनिधियोें ने चिंता जताई और कहा कि बजट का मिलना सुनिश्चित कराया जाना चाहिए।
राजीव गांधी विद्युतीकरण में हीलाहवाली का मुद्दा उठा
राजीव गांधी विद्युतीकरण में हीलाहवाली का मामला भी उठा। कहा गया कि एजेंसी मनमानी पर उतारू है। करीब 1800 गांवों में विद्युतीकरण का काम होना था लेकिन 300 गांव भी नहीं हो सके। अब यह काम विभाग से कराने की सिफारिश की गई है।
आपदा राहत का बजट नहीं
सूखे में पेयजल संकट से निपटने का बजट अभी तक नहीं मिला। जिले से 11.76 करोड़ रुपये की धनराशि मांगी गई थी लेकिन पैसा नहीं मिला। सोमवार को जिलाधिकारी ने मामला प्रभारी मंत्री को बताया और कहा कि आपदा राहत का बजट मिल जाए तो काम तेजी से आगे बढ़ाया जा सकेगा।
सबमर्सिबल पंप लगवाने की वकालत
हैंडपंप लगाने में अनियमितता का आरोप लगाकर सीसामऊ विधानसभा क्षेत्र से विधायक इरफान सोलंकी ने सबमर्सिबल पंप लगवाने की वकालत की। जिलाधिकारी से कहा कि क्षेत्र में चार हैंडपंप लगवाने के बजाए एक सबमर्सिबल पंप लगवा दिया जाए तो बेहतर रहेगा। इस संबंध में शासन से दिशा-निर्देश मांगने की बात कही गई।
मीटिंग में नहीं दिखे दो विधायक
महराजपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक सतीश महाना और बिल्हौर विधानसभा क्षेत्र से विधायक/मंत्री अरुणा कोरी मीटिंग में नहीं दिखे। उनकी जगह जन प्रतिनिधि आए लेकिन वह पानी-बिजली समस्या का मामला नहीं उठा सके।
सपाई लेट पहुंचे
समिति की मीटिंग में विधायक सतीश निगम और मुनींद्र शुक्ला सहित तमाम नेता लेट पहुंचे। घाटमपुर से विधायक इंद्रजीत कोरी मीटिंग के अंतिम दौर में पहुंच सके। सब कुछ हो गया, पानी संकट पर हाय तौबा की।
मई में समीक्षा
केेंद्रीय योजनाओं और उसके कामकाज की समीक्षा मई में होगी। यह समीक्षा क्षेत्रीय सांसद करते हैं। इसका नाम विजिलेंस कमेटी होता है।