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पूर्व आईआईटीयन ने जवानों पर की अपमानजनक टिप्पणी, फेसबुक पोस्ट के विरोध में उतरे शिक्षक-छात्र
Mon, 29 Jul 2019 06:52 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Mon, 29 Jul 2019 06:52 PM IST
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आईआईटी कानपुर
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जेएनयू के बाद अब आईआईटी कानपुर में भी सेना के जवानों और कारगिल के शहीदों पर अपमानजनक टिप्पणी का मामला सामने आया है। यह कमेंट इंस्टीट्यूट के एल्युमनाई एसोसिएशन के फेसबुक ग्रुप पर सूर्या मंथा नाम के फेसबुक अकाउंट से किया गया है। सूर्या मंथा ने आईआईटी के पूर्व छात्र कौशिक रोमपिकुंतला की ओर से किए गए एक विवादित पोस्ट के समर्थन में टिप्पणी की है।
टिप्पणी वायरल होने पर इंस्टीट्यूट के शिक्षकों, छात्रों के साथ अब बड़ी संख्या में लोग इसके विरोध में उतर आए हैं। एक एल्युमनाई ने जवानों और शहीदों के प्रति ऐसी सोच रखने वालों को पाकिस्तान जाने की सलाह तक दे डाली है। वहीं मामला तूल पकड़ने के बाद इंस्टीट्यूट प्रशासन ने भी चुप्पी साध ली है। इस बाबत आईआईटी निदेशक प्रो. अभय करंदीकर से बात करने की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
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टिप्पणी वायरल होने पर इंस्टीट्यूट के शिक्षकों, छात्रों के साथ अब बड़ी संख्या में लोग इसके विरोध में उतर आए हैं। एक एल्युमनाई ने जवानों और शहीदों के प्रति ऐसी सोच रखने वालों को पाकिस्तान जाने की सलाह तक दे डाली है। वहीं मामला तूल पकड़ने के बाद इंस्टीट्यूट प्रशासन ने भी चुप्पी साध ली है। इस बाबत आईआईटी निदेशक प्रो. अभय करंदीकर से बात करने की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
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आईआईटी कानपुर
- फोटो : अमर उजाला
कारगिल हाइट्स को लेकर शुरू हुआ था विवाद
दरअसल 26 जुलाई को कारगिल शहीद दिवस पर संस्थान प्रशासन ने परिसर के मुख्य चौराहे को कारगिल शहीदों की याद में उन्हें समर्पित कर दिया। इस चौराहे को कारगिल हाइट्स नाम देकर बीच पर सेना के जवान की वीरता प्रदर्शित करती मूर्ति लगवाई गई है। इसी को लेकर दो प्रोफेसर और कुछ पूर्व छात्रों ने विवाद शुरू कर दिया है।
दोनों प्रोफेसरों ने सभी फैकल्टी को ईमेल करते हुए संस्थान प्रशासन के इस कदम को गलत बताया है। इस ईमेल को कुछ लोगों ने शहीदों का अपमान बताया है। कहा कि जवानों ने अपनी जान कुर्बान करके सभी को यह जिंदगी दी है इसलिए आईआईटी ही क्या पूरे देश में ऐसे जवानों के लिए संग्रहालय बनने चाहिए। इसके बाद 2014 बैच के कौशिक रोमपिकुंतला नाम के एक पूर्व छात्र ने फेसबुक पर काफी लंबा पोस्ट किया है। कारगिल शहीदों की याद में बनाए गए चौराहे को लेकर कहा कि इसकी आईआईटी में कोई जरूरत नहीं है। इस पोस्ट पर बड़ी संख्या में आईआईटी के प्रोफेसर, पूर्व छात्रों ने अपने विचार रखे हैं।
दरअसल 26 जुलाई को कारगिल शहीद दिवस पर संस्थान प्रशासन ने परिसर के मुख्य चौराहे को कारगिल शहीदों की याद में उन्हें समर्पित कर दिया। इस चौराहे को कारगिल हाइट्स नाम देकर बीच पर सेना के जवान की वीरता प्रदर्शित करती मूर्ति लगवाई गई है। इसी को लेकर दो प्रोफेसर और कुछ पूर्व छात्रों ने विवाद शुरू कर दिया है।
दोनों प्रोफेसरों ने सभी फैकल्टी को ईमेल करते हुए संस्थान प्रशासन के इस कदम को गलत बताया है। इस ईमेल को कुछ लोगों ने शहीदों का अपमान बताया है। कहा कि जवानों ने अपनी जान कुर्बान करके सभी को यह जिंदगी दी है इसलिए आईआईटी ही क्या पूरे देश में ऐसे जवानों के लिए संग्रहालय बनने चाहिए। इसके बाद 2014 बैच के कौशिक रोमपिकुंतला नाम के एक पूर्व छात्र ने फेसबुक पर काफी लंबा पोस्ट किया है। कारगिल शहीदों की याद में बनाए गए चौराहे को लेकर कहा कि इसकी आईआईटी में कोई जरूरत नहीं है। इस पोस्ट पर बड़ी संख्या में आईआईटी के प्रोफेसर, पूर्व छात्रों ने अपने विचार रखे हैं।
आईआईटी कानपुर
छात्रों का जवाब, ऐसे लोग पाकिस्तान चले जाएं
कारगिल हाइट्स पर सवाल खड़े करने वालों को कई छात्रों ने कड़ा जवाब दिया है। एक छात्र ने ऐसे लोगों को पाकिस्तान जाने की सलाह दी है। एक पूर्व छात्र ने लिखा है कि अगर देश के जवान नहीं होते तो आप लोग आराम से बैठकर इस तरह की चर्चाएं नहीं कर सकते।
एक पूर्व छात्र ने लिखा है कि अगर इंडियन आर्मी नहीं होती तो 1965,1971,1999 के बाद भारत देश भी नहीं होता। यही एकमात्र सच्चाई है। अगर इस पर किसी को कोई संदेह हो तो अपने निकटतम मेंटल क्लीनिक में अपना इलाज करवाए।
कारगिल हाइट्स पर सवाल खड़े करने वालों को कई छात्रों ने कड़ा जवाब दिया है। एक छात्र ने ऐसे लोगों को पाकिस्तान जाने की सलाह दी है। एक पूर्व छात्र ने लिखा है कि अगर देश के जवान नहीं होते तो आप लोग आराम से बैठकर इस तरह की चर्चाएं नहीं कर सकते।
एक पूर्व छात्र ने लिखा है कि अगर इंडियन आर्मी नहीं होती तो 1965,1971,1999 के बाद भारत देश भी नहीं होता। यही एकमात्र सच्चाई है। अगर इस पर किसी को कोई संदेह हो तो अपने निकटतम मेंटल क्लीनिक में अपना इलाज करवाए।
आईआईटी कानपुर
पैर गंवा चुके एनसीसी ऑफिसर ने दी थी कारगिल हाइट्स बनाने की सलाह
कारगिल हाइट्स बनाने की सलाह आईआईटी के एनसीसी ऑफिसर कर्नल अशोक मोर ने दी थी। कर्नल मोर भारतीय सेना में थे। भारतीय सीमा के पास कुपवाड़ा के किरण सेक्टर में पाकिस्तानी आर्मी की ओर से किए गए हमले में उनका बायां पैर उड़ गया था। कर्नल मोर उसके बाद से शहीदों के परिजनों के लिए काम कर रहे हैं।
उन्होंने ही आईआईटी प्रशासन को 26 जुलाई को कारगिल शहीद दिवस पर शहीदों की याद में हाइट्स समर्पित करने की सलाह दी थी।
कारगिल हाइट्स बनाने की सलाह आईआईटी के एनसीसी ऑफिसर कर्नल अशोक मोर ने दी थी। कर्नल मोर भारतीय सेना में थे। भारतीय सीमा के पास कुपवाड़ा के किरण सेक्टर में पाकिस्तानी आर्मी की ओर से किए गए हमले में उनका बायां पैर उड़ गया था। कर्नल मोर उसके बाद से शहीदों के परिजनों के लिए काम कर रहे हैं।
उन्होंने ही आईआईटी प्रशासन को 26 जुलाई को कारगिल शहीद दिवस पर शहीदों की याद में हाइट्स समर्पित करने की सलाह दी थी।