{"_id":"6ae39f250870ca021d0ed29e","slug":"five-policemen-in-the-dock-over-recovery-of-rs-35-lakh-stolen-kanpur-news-c-220-1-sknp1003-151342-2026-10-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kanpur News: 35 लाख की चोरी में बरामदगी पर सवाल, कठघरे में पांच पुलिसकर्मी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kanpur News: 35 लाख की चोरी में बरामदगी पर सवाल, कठघरे में पांच पुलिसकर्मी
Fri, 30 Oct 2026 01:01 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Fri, 30 Oct 2026 01:01 AM IST
विज्ञापन
कानपुर देहात। अकबरपुर में माती रोड स्थित बैटरी कारोबारी के घर हुई चोरी के मामले में पुलिस की बरामदगी और कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठे हैं। वादी की याचिका पर अपर सत्र न्यायाधीश/त्वरित न्यायालय प्रथम हिमांशु कुमार सिंह की अदालत ने रिवीजन को स्वीकार कर महाराजपुर व अकबरपुर के तत्कालीन थानाध्यक्षों समेत पांच पुलिस कर्मियों पर विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की है।
अकबरपुर के माती रोड निवासी कारोबारी शिवराम सिंह के घर 15 फरवरी 2025 की रात एक से दो बजे के बीच चोरी हुई थी। चोर घर से 10 लाख 85 की नकदी समेत करीब 35 लाख की चोरी की थी। इस मामले में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की थी। वादी के मुताबिक इस घटना के 12 घंटे बाद कानपुर नगर के महाराजपुर थाना क्षेत्र में सड़क हादसे में बाइक सवार नरेंद्र उर्फ लाल बत्ती घायल हो गया था, जबकि उसके साथी अकलीन की मौत हो गई थी। मौके पर पहुंची महाराजपुर पुलिस ने तलाशी में घायल व मृतक के पास से सोने चांदी के आभूषण व नोटों की गड्डियां बरामद की। पुलिस ने 1,74,600 रुपये नकद समेत करीब नौ लाख जेवरात बरामद दिखाए, इस माल का 26 घंटे बाद जीडी में दाखिला किया।
इधर, वादी को घटना की जानकारी हुई और हादसे का वीडियो हाथ लगा। इस पर चोरी के समय सीसीटीवी फुटेज और हादसे के वीडियो से मिलान कराया गया। वादी का कहना है कि तस्वीरों में संदिग्ध नरेंद्र के गले में दो मोटी सोने की चेनें दिखाई दे रही थीं। दावा किया था कि ये चेनें उनकी पत्नी की चोरी हुई चेनों से मेल खाती हैं, लेकिन पुलिस की बरामदगी सूची में इनका उल्लेख नहीं किया गया। वादी ने आरोप लगाया कि नरेंद्र उर्फ लालबत्ती 19 मुकदमों में वांछित और 25 हजार रुपये का इनामी बदमाश था। इतनी बड़ी बरामदगी के बावजूद उसे गिरफ्तार नहीं किया गया। बल्कि उसे होमगार्ड के साथ एंबुलेंस से हैलट ले जाया गया। जहां से वह फरार हो गया। इधर पुलिस ने 12 दिन बाद 27 फरवरी 2025 को उसे सेन पश्चिम पारा थाने में दूसरे मामले में गिरफ्तार दिखाया। इन आरोपों को लेकर वादी ने पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
विज्ञापन
अदालत ने सुनवाई करते हुए मामले में अकबरपुर थाना के तत्कालीन उपनिरीक्षक एवं विवेचक सूर्यप्रताप सिंह, तत्कालीन थाना प्रभारी सतीश कुमार सिंह, महाराजपुर थाना के तत्कालीन उपनिरीक्षक दिग्विजय सिंह, उपनिरीक्षक जितेंद्र कुमार और तत्कालीन थाना प्रभारी संजय कुमार पांडेय की गंभीर लापरवाही मानी। अदालत ने टिप्पणी की इस प्रकरण में तत्कालीन पुलिस कर्मियों के साथ सीओ स्तर के अधिकारियों की संलिप्तता से इन्कार नहीं किया जा सकता।
मामले को अमानत में खयानत जैसा माना। अदालत ने जिले की एसपी, कानपुर पुलिस कमिश्नर, डीजीपी, प्रमुख सचिव नियमानुसार विभागीय कार्रवाई करने की संस्तुति की है। अदालत ने सीजेएम के आदेश को निरस्त कर छह नवंबर 2026 को वादी को सुनवाई का पूरा अवसर देने और पुलिसकर्मियों पर प्राथमिकी दर्ज कराने संबंधी प्रार्थना पत्र का एक महीने के भीतर नए सिरे से निस्तारण करने का आदेश दिया है।
विज्ञापन
अकबरपुर के माती रोड निवासी कारोबारी शिवराम सिंह के घर 15 फरवरी 2025 की रात एक से दो बजे के बीच चोरी हुई थी। चोर घर से 10 लाख 85 की नकदी समेत करीब 35 लाख की चोरी की थी। इस मामले में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की थी। वादी के मुताबिक इस घटना के 12 घंटे बाद कानपुर नगर के महाराजपुर थाना क्षेत्र में सड़क हादसे में बाइक सवार नरेंद्र उर्फ लाल बत्ती घायल हो गया था, जबकि उसके साथी अकलीन की मौत हो गई थी। मौके पर पहुंची महाराजपुर पुलिस ने तलाशी में घायल व मृतक के पास से सोने चांदी के आभूषण व नोटों की गड्डियां बरामद की। पुलिस ने 1,74,600 रुपये नकद समेत करीब नौ लाख जेवरात बरामद दिखाए, इस माल का 26 घंटे बाद जीडी में दाखिला किया।
विज्ञापन
इधर, वादी को घटना की जानकारी हुई और हादसे का वीडियो हाथ लगा। इस पर चोरी के समय सीसीटीवी फुटेज और हादसे के वीडियो से मिलान कराया गया। वादी का कहना है कि तस्वीरों में संदिग्ध नरेंद्र के गले में दो मोटी सोने की चेनें दिखाई दे रही थीं। दावा किया था कि ये चेनें उनकी पत्नी की चोरी हुई चेनों से मेल खाती हैं, लेकिन पुलिस की बरामदगी सूची में इनका उल्लेख नहीं किया गया। वादी ने आरोप लगाया कि नरेंद्र उर्फ लालबत्ती 19 मुकदमों में वांछित और 25 हजार रुपये का इनामी बदमाश था। इतनी बड़ी बरामदगी के बावजूद उसे गिरफ्तार नहीं किया गया। बल्कि उसे होमगार्ड के साथ एंबुलेंस से हैलट ले जाया गया। जहां से वह फरार हो गया। इधर पुलिस ने 12 दिन बाद 27 फरवरी 2025 को उसे सेन पश्चिम पारा थाने में दूसरे मामले में गिरफ्तार दिखाया। इन आरोपों को लेकर वादी ने पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
विज्ञापन
अदालत ने सुनवाई करते हुए मामले में अकबरपुर थाना के तत्कालीन उपनिरीक्षक एवं विवेचक सूर्यप्रताप सिंह, तत्कालीन थाना प्रभारी सतीश कुमार सिंह, महाराजपुर थाना के तत्कालीन उपनिरीक्षक दिग्विजय सिंह, उपनिरीक्षक जितेंद्र कुमार और तत्कालीन थाना प्रभारी संजय कुमार पांडेय की गंभीर लापरवाही मानी। अदालत ने टिप्पणी की इस प्रकरण में तत्कालीन पुलिस कर्मियों के साथ सीओ स्तर के अधिकारियों की संलिप्तता से इन्कार नहीं किया जा सकता।
मामले को अमानत में खयानत जैसा माना। अदालत ने जिले की एसपी, कानपुर पुलिस कमिश्नर, डीजीपी, प्रमुख सचिव नियमानुसार विभागीय कार्रवाई करने की संस्तुति की है। अदालत ने सीजेएम के आदेश को निरस्त कर छह नवंबर 2026 को वादी को सुनवाई का पूरा अवसर देने और पुलिसकर्मियों पर प्राथमिकी दर्ज कराने संबंधी प्रार्थना पत्र का एक महीने के भीतर नए सिरे से निस्तारण करने का आदेश दिया है।