UP: लाल सागर में लुटने का डर, विदेशी खरीदारों ने सौ करोड़ के आर्डर रोके, विशेषज्ञ बोले- निर्यात पर पड़ेगा असर
Kanpur News: शहर से कोई भी कंसाइनमेंट पहले यूरोप 22 दिन में पहुंच जाता था। इसके लिए लाल सागर समुद्र मार्ग का इस्तेमाल होता था। अब विदेशी खरीदार दूसरे रास्ते से माल पहुंचाने को कह रहे हैं। इसमें 35 दिन लगेंगे। इस रास्ते से मालभाड़ा 30-35 प्रतिशत ज्यादा होगा।
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कानपुर में रूस-यूक्रेन के बाद इस्राइल-हमास युद्ध और अब यमन के उग्रवादियों की ओर से लाल सागर समुद्र मार्ग में जहाजों पर हमले ने शहर के कारोबारियों की परेशानी बढ़ा दी है। लाल सागर में माल लुटने के डर से विदेशी खरीदारों ने करीब 100 करोड़ के आर्डर रोक दिए हैं। शिपिंग कंपनियों ने भी बीमा कवर देने से मना कर दिया है। वहीं, यूरोप में माल ले जाने का मार्ग बदलने के बाद भाड़ा भी 30-35 प्रतिशत बढ़ गया है। इससे उत्पादों की लागत बढ़ गई है।
शहर से अमेरिका के बाद यूरोप में भी बड़े पैमाने पर चमड़ा, इससे बने उत्पाद, इंजीनियरिंग, प्लास्टिक, रेडमीट, किचन मसाला निर्यात किया जाता है। यूरोपीय यूनियन में 27 देश शामिल हैं। इन अलग-अलग देशों में लाल सागर जल मार्ग से माल पहुंचाया जाता है। दरअसल, बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य, जो लाल सागर और स्वेज नहर के माध्यम से भूमध्य सागर को अरब सागर से जोड़ता है। वैश्विक कंटेनर यातायात के 30 प्रतिशत के लिए महत्वपूर्ण है।
कंपनियों ने शिपमेंट को कवर करने से इन्कार कर
इस मार्ग से पश्चिम एशिया, अफ्रीका और यूरोप के देशों में शिप कंसाइनमेंट आता और जाता है। कुछ समय पहले यमन स्थित हैती उग्रवादियों ने एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइल के साथ कई जहाजों पर हमला किया था। इसके बाद अधिकतर बीमा कंपनियों ने लाल सागर को पार करने वाले शिपमेंट को कवर करने से इन्कार कर दिया है। कुछ बीमा कंपनियों ने 5,200 डॉलर का युद्ध जोखिम अधिभार भी लगाना शुरू कर दिया है।
रास्ता लंबा होने की वजह से भाड़ा और समय भी ज्यादा लगेगा
इतना ही नहीं माल ढुलाई शुल्क बढ़ा दिया। शहर से हर माह तीन सौ करोड़ से ज्यादा का निर्यात होता है, लेकिन अब यहां से निर्यात होने वाले आर्डरों को खरीदार होल्ड पर रखवा रहे हैं, ताकि उनका माल सुरक्षित रहे। इसके अलावा दक्षिण अफ्रीका और मोरक्को के रास्ते से माल भेजने को कह रहे हैं, लेकिन भाड़ा पुराना ही दे रहे हैं। हालांकि यह रास्ता लंबा होने की वजह से भाड़ा और समय भी ज्यादा लगेगा।
पहले वाले मार्ग से लगते हैं 22 दिन, नए मार्ग से 35 दिन
शहर से कोई भी कंसाइनमेंट पहले यूरोप 22 दिन में पहुंच जाता था। इसके लिए लाल सागर समुद्र मार्ग का इस्तेमाल होता था। अब विदेशी खरीदार दूसरे रास्ते से माल पहुंचाने को कह रहे हैं। इसमें 35 दिन लगेंगे। इस रास्ते से मालभाड़ा 30-35 प्रतिशत ज्यादा होगा। पहले जो सामान 700 रुपये में पहुंच रहा था, अब इसके दाम 3700 रुपये तक हो गए हैं। विदेशी खरीदार मालभाड़ा पुराना ही देने को कह रहे हैं। उनका तर्क है कि आर्डर पहले ही बुक हुए थे।
निर्यातकों के सामने बड़ी परेशानी आ गई है। बीमा कंपनियां या तो मार्ग पर शिपमेंट को कवर करने को तैयार नहीं हैं या माल ढुलाई शुल्क पर 5,200 डॉलर का अतिरिक्त युद्ध जोखिम अधिभार लगा रही हैं। शहर से यूरोप को फुटवियर, गारमेंटस, शेफ्टी शूज, इंजीनियरिंग, प्लास्टिक, किचन मसाला आदि का बड़े स्तर पर निर्यात होता है। सौ करोड़ के आर्डर रुक गए हैं। केंद्र सरकार को इस समस्या से अवगत कराया गया है। समस्या बढ़ेगी तो निर्यात प्रभावित होगा। -आलोक श्रीवास्तव, संयोजक, फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (फियो)
शहर से यूरोप माल भेजने में निर्यातकों को परेशानी हो रही है। शिपिंग कंपनियों ने मालभाड़ा 30 से 35 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है। विदेशी बायरों ने खुद ही आर्डर होल्ड पर कर दिए हैं। इससे माल पोर्ट पर है या जहाज पर लदा है लेकिन भेजा नहीं जा रहा है। जो दूसरा मार्ग बताया जा रहा है, उसमें 35 दिन से ज्यादा का समय लगेगा। पहले 22 दिन में माल यूरोप पहुंच जाता था। शहर का निर्यात पहले से ही घटा है। नई समस्या से निर्यात बढ़ने में तेजी की संभावना कम हो रही है। - जफर-फिरोज, आयात-निर्यात एक्सपर्ट
पढि़ए कुछ अहम जानकारियां
- लाल सागर मार्ग एशिया से यूरोप जाने वाले जहाजों के लिए सबसे छोटा जल मार्ग है।
- अब दक्षिण अफ्रीका, मोरक्को होकर जहाज को यूरोप लाने को कहा जा रहा है
- यूरोप को सालाना 3500 से 4000 हजार करोड़ का होता है निर्यात। अमेरिका के बाद यूरोप दूसरा बड़ा बाजार।
- शिपमेंट में 20 से 40 फीट के कंटेनर उपयोग में लाए जाते हैं। इसमें पहले भाड़ा 700 रुपये नॉटिकल माइल भार के अनुसार आता था जो अब बढ़कर 3500 से 3700 हो गया है।
शहर से कुल निर्यात घटा
शहर से अप्रैल से सितंबर 2023 तक कुल 4512 करोड़ का निर्यात किया जा चुका है। पिछले साल इस अवधि में 5500 करोड़ का निर्यात किया गया था। पिछले साल की तुलना में निर्यात घटा है। हालांकि जनवरी में बदलाव आने की बात कही जा रही है।