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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Fatehpur Double Murder 18 years  210 hearings and 13 witnesses 14 perpetrators sentenced in Pattishah case

‘खूनी रंजिश’: 18 साल, 210 तारीखें और 13 गवाह, पट्टीशाह हत्याकांड में 14 दरिंदों को सजा, क्राइम थ्रिलर है कहानी

Sat, 20 Jun 2026 05:57 AM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फतेहपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फतेहपुर Published by: Himanshu Awasthi Updated Sat, 20 Jun 2026 05:57 AM IST
सार

Fatehpur Double Murder Case: 18 साल पुराने पट्टीशाह हत्याकांड में 14 दोषियों को उम्रकैद की सजा मिली है। 13 गवाहों की निष्पक्ष गवाही और 210 सुनवाइयों के बाद अदालत ने मज्जू मियां के मामले में न्याय बहाल किया है।

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Fatehpur Double Murder 18 years  210 hearings and 13 witnesses 14 perpetrators sentenced in Pattishah case
fatehpur double murder - फोटो : amar ujala

विस्तार

फतेहपुर जिले के पट्टीशाह गांव में हुए खूनी संघर्ष ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया था। खून के बदले खून की यह दुश्मनी 2008 में शुरू हुई और 2009 में शरीफ सेठ के भाई नफीस की हत्या तक पहुंच गई। नफीस हत्याकांड में इसी वर्ष फरवरी में मज्जू मियां पक्ष के दो लोगों समेत 12 अभियुक्तों को दोषी ठहराया गया था।

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खास बात यह रही कि उस मुकदमे में दोषी करार दिए गए दो चश्मदीद गवाहों की गवाही के आधार पर अब अदालत ने शरीफ सेठ समेत 14 लोगों को दोषी करार दिया है। हथगाम थाना क्षेत्र के पट्टीशाह गांव निवासी शरीफ सेठ 24 नवंबर 2009 की शाम अपने भाई नफीस के साथ शाहपुर से बुलेट से घर लौट रहे थे।

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दोनों भाइयों पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी
उनके साथ खरकी का पुरवा निवासी अशोक और सुरेश सिंह उर्फ मुन्नू दूसरी बाइक पर थे। रास्ते में हमलावरों ने दोनों भाइयों पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी, जिसमें नफीस की मौत हो गई। वर्ष 2008 में बकरीद के आठवीं के मातमी जुलूस के दौरान मज्जू मियां पर हुए हमले के मामले में उनके भांजे मोबीन और गांव निवासी असगर को चश्मदीद गवाह बनाया गया था।

मुकदमे में 210 से अधिक तारीखें पड़ीं
दोनों ने अदालत में बयान दिया। वर्तमान में दोनों ही नफीस हत्याकांड में दोषी करार दिए जाने के बाद जेल में बंद हैं।मुकदमे में इनके अलावा 11 अन्य गवाहों ने भी बयान दर्ज कराए और कोई भी गवाह अपने बयान से नहीं मुकरा। कुल 13 गवाहों की गवाही और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने 14 अभियुक्तों को दोषी करार दिया। करीब 18 वर्षों तक चले इस मुकदमे में 210 से अधिक तारीखें पड़ीं।

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अपने ही मुकदमे में गवाही नहीं दे सके मज्जू मियां
वर्ष 2008 में गोली लगने के बाद मज्जू मियां पैरालाइज हो गए थे। स्वास्थ्य कारणों से वे अपने ही मुकदमे में गवाही नहीं दे सके। उनके ऊपर हुए जानलेवा हमले के मामले में अदालत ने 14 दोषियों को सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी। घटना के बाद उन्होंने गांव छोड़ दिया था और इलाज के दौरान वर्ष 2012 में उनका निधन हो गया।

घटना को ही प्रमुख साक्ष्य मान कोर्ट ने सुनाया फैसला
एडीजीसी अनिल दुबे के मुताबिक इस पूरे मामले में अदालत ने घटनाक्रम और उपलब्ध साक्ष्यों को ही निर्णय का आधार माना। दोनों पक्षों के बीच एक वर्ष के भीतर हुई हत्याओं में एक पक्ष से एक और दूसरे पक्ष से दो लोगों की जान गई थी। पुलिस की ओर से दाखिल आरोप पत्र में घटनाओं का क्रम और परिस्थितियां स्पष्ट रूप से दर्ज थीं, जिससे मामले के महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ चुके थे।

अखरी कांड से पहले मुन्नू सिंह को मिली उम्रकैद
अखरी कांड में आरोपी सुरेश उर्फ मुन्नू सिंह के खिलाफ मुकदमे का ट्रायल पहले से चल रहा है। मुन्नू सिंह के विरुद्ध पूर्व में भी कई मुकदमे दर्ज बताए जाते हैं। पट्टीशाह हत्याकांड में उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है। ऐसे में अखरी के तिहरे हत्याकांड से जुड़े मुकदमे में उनकी कानूनी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

नजदीक से मारी गई थीं गोलियां
पट्टीशाह हत्याकांड में मज्जू मियां, उनके बेटे रेयाज अतहर और अंगरक्षक शमशाद को नजदीक से गोलियां मारी गई थीं। पोस्टमार्टम के दौरान शरीर में गोलियां नहीं मिलीं क्योंकि वे आरपार हो गई थीं। हालांकि चिकित्सकों ने मौत का कारण गोली लगना ही बताया था। घटना में घायल लोगों के बयान भी दर्ज किए गए थे और उनका उपचार गनशॉट इंजरी के आधार पर किया गया था।

ये है पूरा मामला
हथगाम थाना क्षेत्र के पट्टीशाह में वर्चस्व की जंग में सात दिसंबर 2008 को दोहरे हत्याकांड में शुक्रवार को तीन भाइयों समेत 14 लोगों को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई। सत्र न्यायाधीश सुधीर कुमार ने इन सभी पर 38-38 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया।

14 दोषियों को उम्रकैद की सजा
कोर्ट ने गांव के तीन भाई शरीफ सेठ, रईस, शफीक, पट्टीशाह के अमीरगंज निवासी मोईन उर्फ मुर्रा, रईश, सगीर, सुल्तानपुर घोष थाने के नरौली निवासी निहालउद्दीन उर्फ नेहाल, इसराइल, खरकी का पुरवा निवासी अशोक, पट्टीशाह के तीन भाई साबिर अली, सादिक अली, वाजिद अली, संजय शुक्ला और हथगाम अखरी गांव के सुरेश उर्फ मुन्नू सिंह (अखरी गांव के किसान नेता समेत तीन की हत्या का मुख्य आरोपी) को उम्रकैद की सजा सुनाई है।

अभियुक्तों ने मारपीट और ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी
डीजीसी के मुताबिक पट्टीशाह गांव के तत्कालीन प्रधान व बसपा नेता मजहर हैदर नकवी उर्फ मज्जू मियां अपने बेटे रियाज हैदर नकवी और अंगरक्षक शमशाद के साथ बकरीद के मातमी जुलूस में शामिल होने गए थे। जुलूस दूसरे पक्ष के साबिर के दरवाजे पर पहुंचा। यहां घात लगाए अभियुक्तों ने मारपीट और ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। गोली लगने से रियाज हैदर नकवी की मौके पर मौत हो गई थी। शमशाद और मज्जू मियां घायल हो गए थे। इलाज के दौरान शमशाद की भी मौत हो गई थी।

दोनों पक्षों के 41 में 33 दोषी, शेष की हो चुकी मौत
मामले में दोनों पक्षों की ओर से वर्ष 2008 और 2009 में हत्याओं के मुकदमे दर्ज हुए थे। 2009 के मुकदमे में एक पक्ष से जुड़े 25 अभियुक्तों में पूर्व प्रधान मजहर हैदर नकवी उर्फ मज्जू मियां, शरीफ, अमीन, कमल सिंह, नसीम और सगीर की मौत हो चुकी है। फरवरी में सजा के बाद जेल में निरुद्ध शाहिद रजा, सिकंदर, सलमान, रुकनुद्दीन, असगर अली, मोबीन, मसरूर, फरहान अहमद उर्फ वासू और अब्दुल जेल में हैं।

तीन वर्ष की कैद की सजा सुनाई थी
जेल में निरुद्ध व जमानत पर चल रहे खतीफ, जावेद, मुनव्वर अली, मंसूर अली, गुड्डू सिंह, इन्दाज, मो. कासिम, मोतीउद्दीन, शिव सिंह और मो. अली को भी कोर्ट ने 18 जून को बलवा, मारपीट समेत विभिन्न धाराओं में दोषी करार देकर तीन वर्ष की कैद की सजा सुनाई थी। दूसरे पक्ष के 16 आरोपियों में शरीफ सेठ, रईस, शफीक, मोईन, नेहाल, रईश, सगीर, इसराइल, अशोक, साबिर, सादिक, वाजिद, संजय, हथगाम अखरी गांव के मुन्नू सिंह तथा दिवंगत सलाम और बच्छन शामिल थे। इनमें से 14 को कोर्ट ने बलवा और मारपीट के मामले में तीन वर्ष की सजा सुनाई है।

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