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Farrukhabad: गंगा के कटान से दिलीप की मड़ैया में चार और मकान समाए, 13 घरों पर मंडराया खतरा

Fri, 07 Aug 2026 09:24 PM IST
प्रसून शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला,कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,कानपुर Published by: प्रसून शुक्ला Updated Fri, 07 Aug 2026 09:24 PM IST
सार

Farrukhabad News: बांधों से लगातार छोड़े जा रहे पानी के कारण गंगा का जलस्तर बढ़ने से कटान ने विकराल रूप ले लिया है। सदर तहसील के दिलीप की मड़ैया गांव में शुक्रवार को चार और मकान गंगा की तेज धारा में समा गए। इसके साथ ही पिछले दो दिनों में नदी में समाने वाले मकानों की संख्या बढ़कर 12 हो गई है। वहीं 13 अन्य मकान पूरी तरह कटान के मुहाने पर पहुंच गए हैं।

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दिलीप की मड़ैया में मकान तोड़ते ग्रामीण - फोटो : amar ujala

विस्तार

जनपद में गंगा नदी के जलस्तर में उफान के साथ ही भीषण कटान शुरू हो गया है। सदर तहसील क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 'दिलीप की मड़ैया' गांव में गंगा नदी रौद्र रूप दिखा रही है। पिछले दो दिनों के भीतर गांव के आठ मकान गंगा की तेज धारा में समा चुके थे, वहीं शुक्रवार को चार अन्य मकान भी ढहकर नदी में लीन हो गए। कटान की रफ्तार देखकर ग्रामीणों में भारी दहशत का माहौल है।

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34 में से 13 मकान पूरी तरह कटान के मुहाने पर

बाढ़ की आशंका को देखते हुए इस साल की शुरुआत में राजस्व विभाग ने गांव के 34 संवेदनशील मकानों की सूची तैयार की थी। शुक्रवार को गांव पहुंचे क्षेत्र के लेखपाल ने कटान का जायजा लिया। नई रिपोर्ट के मुताबिक, गांव के 13 ग्रामीणों के मकान अब पूरी तरह से कटान के मुहाने पर आ चुके हैं, जिनमें से कई मकानों का आधा हिस्सा कटकर नदी में गिर भी चुका है।

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खुद अपने हाथों से आशियाना तोड़ने को मजबूर ग्रामीण

गंगा की कटान का खौफ इस कदर है कि ग्रामीण एक-दूसरे की मदद करके खुद अपने मकानों को तोड़ने में लगे हैं। लोग मकानों की ईंटों को निकालकर गांव के दक्षिण दिशा में इकट्ठा कर रहे हैं ताकि कुछ निर्माण सामग्री बचाई जा सके। हालांकि, ग्रामीणों को डर सता रहा है कि यदि गंगा का कटान इसी गति से जारी रहा तो बचाकर रखी गई ईंटों को भी नदी अपने आगोश में ले लेगी।

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