फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Farrukhabad News ›   Farrukhabad: Desperate farmer plows under two bighas of potato crop due to economic downturn

Farrukhabad: मंदी की मार से हताश किसान ने दो बीघा आलू की फसल जुतवाई

Mon, 29 Dec 2025 10:12 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद Published by: शिखा पांडेय Updated Mon, 29 Dec 2025 10:12 PM IST
विज्ञापन
Farrukhabad: Desperate farmer plows under two bighas of potato crop due to economic downturn
नंदसा में ट्रैक्टर से जोती जा रही आलू की फसल - फोटो : अमर उजाला
मंदी की मार से हताश खिमसेपुर के मोहल्ला नंदसा निवासी किसान अमरजीत ने सोमवार दोपहर दो बीघा आलू की फसल ट्रैक्टर से जुतवा दी। किसान ने यह फैसला लागत के बाद खोदाई की मजदूरी व भाड़े का खर्च भी न निकलने पर लिया। वह अब इस खेत में गेहूं की बोआई करेंगे। कहा, अगर भाव नहीं बढ़े तो शेष 10 बीघा आलू बची फसल भी जुतवा देंगे।
विज्ञापन


नगर पंचायत खिमसेपुर के वार्ड नं 5 उदित नारायण नगर (नंदसा) निवासी अमर जीत सिंह के पास 15 बीघा खेती है। उन्होंने इस बार 12 खेत में आलू की फसल बोई है। इसमें दो बीघा खेत की फसल दो माह से अधिक समय से तौयार हो गई थी पर भाव ठीक न मिलने से वह खोदाई नहीं करा रहे थे। पिछले दो दिन से मंडी में भाव गिरने से वह और चिंतित हो गए। इसके साथ ही गेहूं की बुआई भी लेट हो रही थी। इसके चलते सोमवार दोपहर उन्होंने अपनी दो बीघा आलू की फसल को ट्रैक्टर से जुतवा दिया।
विज्ञापन


उनका कहना है कि मंडी में आलू के पैकेट (50 किलो) का मूल्य मात्र 100 रुपये से लेकर 125 रुपये तक है, जबकि आलू की बुआई में लागत बहुत अधिक लगी है। उन्होंने लवकार आलू बोया था। डीएपी व यूरिया खाद भी सही मात्रा में डाली। दो बीघा खेत में 60 हजार रुपये का आलू निकलने की उम्मीद थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


अब स्थिति यह है भाव गिरने से आलू की खोदाई में मजदूरी का खर्च और फिर मंडी तक आलू ले जाने का भाड़ा निकलना भी मुश्किल है। इसी वजह से उन्होंने फसल जुतवाना ही मुनासिब समझा। उधर, नंदा के किसान मुकेश कश्यप, महावीर का कहना है यदि आलू के भाव में इजाफा न हुआ तो वह भी अपनी आलू की फसल जोत देंगे। किसानों ने आलू का निर्यात बढ़ाने और न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू करने की मांग की। अमरजीत ने कहा कि भाव न बढ़ा तो 10 बीघा आलू की जो फसल बची है, वह भी जुतवा देंगे।

एक बीघा आलू की फसल में 10,950 रुपये की लागत
एक बीघा आलू की फसल में करीब 10,950 रुपये लागत आती है। इसमें एक बीघा खेत के लिए 4,000 रुपये का बीज, एक बोरी डीएपी 1,650 रुपये, एक बोरी यूरिया 300 रुपये, जुताई 2,000 रुपये, खोदाई व लोडिंग 2,000 रुपये, पलेवा सहित तीन सिंचाई 1,000 रुपये खर्च होते हैं। इससे एक बीघा में औसतन 10,950 रुपये लागत आती है। किसानों का कहना है कि मंडी में 350 रुपये से लेकर 500 रुपये प्रति क्विंटल आलू बिक रहा है। इससे छोटे-बड़े व कटे-फटे सहित आलू का भाव औसतन 400 रुपये प्रति क्विंटल मिल पाता है। जबकि एक बीघा खेत में औसतन 10 क्विंटल यानी 8000 रुपये का आलू उत्पादन है। इस हिसाब से करीब 3000 रुपये बीघा किसान को आलू में घाटा हो रहा है। मेहनत अलग से जा रही है।

किसान ने आलू की फसल क्यों जुतवाई इसकी जानकारी की जाएगी। हो सकता है आलू की फसल खराब हो या रोग लगने से उत्पादन कम हो गया हो। इन सभी कारणों की जांच कराई जाएगी। मंडी में अच्छा आलू 500 से 600 रुपये तक प्रति क्विंटल बिक रहा है। - राघवेंद्र सिंह, जिला उद्यान अधिकारी

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed