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कानपुर: सस्ते में इंटरनेशनल कॉल कराने वाले फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज का भंडाफोड़, दो आरोपी गिरफ्तार
Tue, 20 Oct 2020 11:58 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 20 Oct 2020 11:58 PM IST
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फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज का भंडाफोड़
- फोटो : अमर उजाला
सस्ती दरों पर इंटरनेशनल कॉल कराने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार कर पुलिस ने फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज का खुलासा किया है। इन्होंने ऐसा सिस्टम बना रखा था कि इनसे जुड़े लोग जब विदेश कॉल करते थे तो कॉल पहले इनके एक्सचेंज पहुंचती थी, इसके बाद ये लोग एप व इंटरनेट की मदद से आईएसडी कॉल को लोकल कॉल में बदलकर संबंधित को ट्रांसफर कर देते थे।
इस खेल में 15 रुपये वाली कॉल इन्हें मात्र 15 पैसे प्रति मिनट पड़ती थी। येे लोग राजस्व को प्रति काल 100 गुना चूना लगाने के साथ ही ग्राहकों से भी पांच से छह रुपये कॉल के वसूलते थे। डीआईजी डॉ. प्रीतिंदर सिंह ने बताया कि चंदारी सुजातगंज के मोहम्मद जावेद और मोहम्मद शहनवाज को इंटेलिजेंस के इनपुट पर सोमवार रात उठाया गया।
इनकी निशानदेही पर गैंगेज मॉल टाटमिल चौराहा, गंगापार व चकेरी से फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज का पूरा सामान बरामद किया। तीनों जगहों से टेलीफोन एक्सचेंज चलाया जा रहा था। यहां से पांच सिम बॉक्स, 151 सिम कार्ड, पांच राउटर, नौ मॉडम, एक सीपीयू, एक मॉनीटर, एक यूएसबी हब, दो वायरलेस डिवाइस, दो मोबाइल और दो बैटरी बरामद हुईं। आरोपी सिम बॉक्स, राउटर और फर्जी सिम से वीओआईपी (वॉइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल) कॉल करवाते थे।
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इस खेल में 15 रुपये वाली कॉल इन्हें मात्र 15 पैसे प्रति मिनट पड़ती थी। येे लोग राजस्व को प्रति काल 100 गुना चूना लगाने के साथ ही ग्राहकों से भी पांच से छह रुपये कॉल के वसूलते थे। डीआईजी डॉ. प्रीतिंदर सिंह ने बताया कि चंदारी सुजातगंज के मोहम्मद जावेद और मोहम्मद शहनवाज को इंटेलिजेंस के इनपुट पर सोमवार रात उठाया गया।
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इनकी निशानदेही पर गैंगेज मॉल टाटमिल चौराहा, गंगापार व चकेरी से फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज का पूरा सामान बरामद किया। तीनों जगहों से टेलीफोन एक्सचेंज चलाया जा रहा था। यहां से पांच सिम बॉक्स, 151 सिम कार्ड, पांच राउटर, नौ मॉडम, एक सीपीयू, एक मॉनीटर, एक यूएसबी हब, दो वायरलेस डिवाइस, दो मोबाइल और दो बैटरी बरामद हुईं। आरोपी सिम बॉक्स, राउटर और फर्जी सिम से वीओआईपी (वॉइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल) कॉल करवाते थे।
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आईएसडी कॉल को बनाते थे लोकल
सीओ कैंट सत्यजीत गुप्ता ने बताया कि ये गिरोह देश से लेकर विदेश तक फैला हुआ है। देश में इस गिरोह ने सुल्तानपुर, पटना और हैदराबाद में एक-एक मुख्य एक्सचेंज बना रखे हैं। कॉल जब विदेश की जाती है या वहां से आती है तो सबसे पहले इन्हीं एक्सचेंज में पहुंचती हैं। यहां से संबंधित शहर के स्थानीय एक्सचेंज को ट्रांसफर की जाती है। इस तरह कॉल इंटरनेशनल से लोकल हो जाती है। इसमें आईपी एड्रेस दूसरे का इस्तेमाल किया जाता है।
ऐसे भी कराते हैं कॉल
सर्विलांस प्रभारी इंस्पेक्टर सतीश ने बताया कि ये लोग टीपी स्मार्ट एप डाउनलोड करते हैं। इसकी आईडी विदेश में बैठे एजेंट को दी जाती है। इसके जरिये कॉल करने पर 15 से 20 पैसा प्रति मिनट चार्ज पड़ता है। आरोपियों ने इसके लिए कॉल टर्मिनेटर मशीन लगाई हुई थी। एक मशीन में साठ सिम लगते हैं। विदेश से एप पर आने वाली कॉल पहले इस टर्मिनेटर मशीन पर पहुंचती है। फिर ये कॉल अलग-अलग नंबरों को डायवर्ट कर दी जाती हैं। इसके लिए इंटरनेट का इस्तेमाल किया जाता है। आरोपियों ने यह पूरी तरकीब यू-ट्यूब से सीखी है।
पहले भी जा चुका है जेल, सरगना नहीं आए हाथ
डीआईजी ने बताया कि 2018 में भी फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज का भंडाफोड़ किया गया था। इस बार पकड़ा गया शहनवाज तब भी गिरफ्तार हुआ था। मुख्य आरोपी फरार हैं। इनमें हैदराबाद का हिमांशु उर्फ राजेश, सुलतानपुर का तेजभान सिंह और पटना का संजीत है।
सीओ कैंट सत्यजीत गुप्ता ने बताया कि ये गिरोह देश से लेकर विदेश तक फैला हुआ है। देश में इस गिरोह ने सुल्तानपुर, पटना और हैदराबाद में एक-एक मुख्य एक्सचेंज बना रखे हैं। कॉल जब विदेश की जाती है या वहां से आती है तो सबसे पहले इन्हीं एक्सचेंज में पहुंचती हैं। यहां से संबंधित शहर के स्थानीय एक्सचेंज को ट्रांसफर की जाती है। इस तरह कॉल इंटरनेशनल से लोकल हो जाती है। इसमें आईपी एड्रेस दूसरे का इस्तेमाल किया जाता है।
ऐसे भी कराते हैं कॉल
सर्विलांस प्रभारी इंस्पेक्टर सतीश ने बताया कि ये लोग टीपी स्मार्ट एप डाउनलोड करते हैं। इसकी आईडी विदेश में बैठे एजेंट को दी जाती है। इसके जरिये कॉल करने पर 15 से 20 पैसा प्रति मिनट चार्ज पड़ता है। आरोपियों ने इसके लिए कॉल टर्मिनेटर मशीन लगाई हुई थी। एक मशीन में साठ सिम लगते हैं। विदेश से एप पर आने वाली कॉल पहले इस टर्मिनेटर मशीन पर पहुंचती है। फिर ये कॉल अलग-अलग नंबरों को डायवर्ट कर दी जाती हैं। इसके लिए इंटरनेट का इस्तेमाल किया जाता है। आरोपियों ने यह पूरी तरकीब यू-ट्यूब से सीखी है।
पहले भी जा चुका है जेल, सरगना नहीं आए हाथ
डीआईजी ने बताया कि 2018 में भी फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज का भंडाफोड़ किया गया था। इस बार पकड़ा गया शहनवाज तब भी गिरफ्तार हुआ था। मुख्य आरोपी फरार हैं। इनमें हैदराबाद का हिमांशु उर्फ राजेश, सुलतानपुर का तेजभान सिंह और पटना का संजीत है।