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कालाबाजारी: कानपुर में ब्लैक फंगस के 68 नकली इंजेक्शन के साथ दो हुए थे गिरफ्तार, खुलासे में सामने आई बड़ी बात
Sat, 29 May 2021 10:44 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 29 May 2021 10:44 AM IST
सार
कानपुर पुलिस अब ब्लैक फंगस के नकली इंजेक्शन की कालाबाजारी के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए प्रयागराज और वाराणसी पुलिस से संपर्क कर कार्रवाई करने की जद्दोजहद में लग गई है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
महामारी के दौर में जीवन रक्षक इंजेक्शन की कालाबाजारी का गढ़ प्रयागराज बन चुका है। ब्लैक फंगस के एमफोनेक्स इंजेक्शन (एम्फोटेरेसिन बी साल्ट) प्रयागराज के दो मेडिकल स्टोर से खरीदे गए थे। पिछले कई महीनों से ये पूरा खेल चल रहा है।
कुछ दिन पहले कानपुर के बाबूपुरवा में नकली रेमडेसिविर के साथ पकड़ा गया गिरोह भी इस गिरोह के संपर्क में था। जिसका सरगना हरियाणा निवासी सचिन था। सचिन पर रासुका भी लग चुका है। कानपुर पुलिस अब पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए प्रयागराज और वाराणसी पुलिस से संपर्क कर कार्रवाई करने की जद्दोजहद में लग गई है।
पुलिस ने गुरुवार रात ग्वालटोली चौराहे के पास से यशोदा नगर निवासी प्रकाश मिश्रा और रतनदीप अपार्टमेंट निराला नगर निवासी ज्ञानेश शर्मा को एंटी फंगल के 68 नकली इंजेक्शन के साथ गिरफ्तार किया था। एसीपी कर्नलगंज त्रिपुरारी पांडेय ने बताया कि ज्ञानेश शर्मा पेशे से एमआर है।
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इसलिए दवा बाजारों में उसका बड़ा नेटवर्क है। पूछताछ में पता चला कि आरोपियों ने प्रयागराज के औविलिगो और बाजपेई मेडिकल स्टार से ये नकली इंजेक्शन खरीदे थे। प्रयागराज पुलिस से इस जानकारी को साझा किया गया है।
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कुछ दिन पहले कानपुर के बाबूपुरवा में नकली रेमडेसिविर के साथ पकड़ा गया गिरोह भी इस गिरोह के संपर्क में था। जिसका सरगना हरियाणा निवासी सचिन था। सचिन पर रासुका भी लग चुका है। कानपुर पुलिस अब पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए प्रयागराज और वाराणसी पुलिस से संपर्क कर कार्रवाई करने की जद्दोजहद में लग गई है।
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पुलिस ने गुरुवार रात ग्वालटोली चौराहे के पास से यशोदा नगर निवासी प्रकाश मिश्रा और रतनदीप अपार्टमेंट निराला नगर निवासी ज्ञानेश शर्मा को एंटी फंगल के 68 नकली इंजेक्शन के साथ गिरफ्तार किया था। एसीपी कर्नलगंज त्रिपुरारी पांडेय ने बताया कि ज्ञानेश शर्मा पेशे से एमआर है।
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इसलिए दवा बाजारों में उसका बड़ा नेटवर्क है। पूछताछ में पता चला कि आरोपियों ने प्रयागराज के औविलिगो और बाजपेई मेडिकल स्टार से ये नकली इंजेक्शन खरीदे थे। प्रयागराज पुलिस से इस जानकारी को साझा किया गया है।
एसीपी ने बताया कि ये भी पता करना पड़ेगा कि आखिर ये नकली इंजेक्शन कहां बन रहे हैं। जो इन मेडिकल स्टोर पर सप्लाई किए जा रहे हैं। एसीपी के मुताबिक बाबपुरवा में नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन बेचने वाला गिरोह पकड़ा गया था। जिसका सरगना हरियाणा निवासी सचिन था।
जिस पर पिछले सप्ताह रासुका लगाया गया है। ये गिरोह भी ज्ञानेश शर्मा के गिरोह के संपर्क में था। सभी एक साथ नकली इंजेक्शनों की खेप अलग-अलग शहरों में खपाते थे। प्रयागराज के साथ वाराणसी से भी कनेक्शन मिला है। एक-एक बिंदु को खंगाला जा रहा है।
कानपुर के अस्पतालों में भी सप्लाई किए इंजेक्शन
पुलिस की जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। आरोपियों ने सैकड़ों इंजेक्शन की खेप कानपुर में खपाई है। सीधे तीमारदारों के अलावा कई अस्पतालों को भी बड़ी संख्या में इंजेक्शन बेचे हैं। पूछताछ में आरोपियों ने अस्पतालों के नाम भी बताए हैं। अब सवाल है कि इन इंजेक्शन के इस्तेमाल से मरीज पर क्या असर पड़ा होगा।
जिस पर पिछले सप्ताह रासुका लगाया गया है। ये गिरोह भी ज्ञानेश शर्मा के गिरोह के संपर्क में था। सभी एक साथ नकली इंजेक्शनों की खेप अलग-अलग शहरों में खपाते थे। प्रयागराज के साथ वाराणसी से भी कनेक्शन मिला है। एक-एक बिंदु को खंगाला जा रहा है।
कानपुर के अस्पतालों में भी सप्लाई किए इंजेक्शन
पुलिस की जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। आरोपियों ने सैकड़ों इंजेक्शन की खेप कानपुर में खपाई है। सीधे तीमारदारों के अलावा कई अस्पतालों को भी बड़ी संख्या में इंजेक्शन बेचे हैं। पूछताछ में आरोपियों ने अस्पतालों के नाम भी बताए हैं। अब सवाल है कि इन इंजेक्शन के इस्तेमाल से मरीज पर क्या असर पड़ा होगा।
नकली इंजेक्शन से आशंका है कि कइयों की जान भी गई होगी। पुलिस ये भी तफ्तीश कर रही है कि क्या अस्पताल प्रशासन को पता था कि नकली इंजेक्शन आरोपी सप्लाई कर रहे हैं फिर भी खरीदे। अगर ऐसा किया है इन पर भी कार्रवाई होगी। आरोपियों ने सीधे डॉक्टरों को भी कुछ इंजेक्शन दिये हैं।
इंजेक्शन में ग्लूकोज होने की आशंका
एसीपी ने बताया कि आरोपियों ने वाराणसी के एक डॉक्टर को इंजेक्शन दिए थे। मामला पकड़ा गया था तो सैंपल की जांच कराई गई थी। पता चला था कि इंजेक्शन में ग्लूकोज है। यहां जो इंजेक्शन पकड़े गए हैं, आशंका कि इसमें भी ग्लूकोज होगा। फिलहाल ड्रग विभाग ने 40 इंजेक्शन नमूने के तौर पर लिए हैं। जिनको जांच के लिए लैब भेजा है। कुछ ही दिन में जांच रिपोर्ट आ जाएगी, जिससे पता चलेगा कि इंजेक्शन में क्या था।
इंजेक्शन में ग्लूकोज होने की आशंका
एसीपी ने बताया कि आरोपियों ने वाराणसी के एक डॉक्टर को इंजेक्शन दिए थे। मामला पकड़ा गया था तो सैंपल की जांच कराई गई थी। पता चला था कि इंजेक्शन में ग्लूकोज है। यहां जो इंजेक्शन पकड़े गए हैं, आशंका कि इसमें भी ग्लूकोज होगा। फिलहाल ड्रग विभाग ने 40 इंजेक्शन नमूने के तौर पर लिए हैं। जिनको जांच के लिए लैब भेजा है। कुछ ही दिन में जांच रिपोर्ट आ जाएगी, जिससे पता चलेगा कि इंजेक्शन में क्या था।