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Exclusive: टेस्टिंग ट्रैक पर 90% पापा की परियां पास, 35% मां के लाडले फेल

Mon, 18 Mar 2024 11:09 AM IST
शिखा पांडेय शशांक शेखर भारद्वाज, अमर उजाला, कानपुर
शशांक शेखर भारद्वाज, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Mon, 18 Mar 2024 11:09 AM IST
सार

कानपुर में परिवहन विभाग में पिछले साल के मुकाबले लाइसेंस बनाने वालों की संख्या घट गई है। 

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Exclusive: 90 percent girls pass on testing track, 35 percent boys fail
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सोशल साइट वीडियो में अक्सर युवतियों को तेज रफ्तार में स्कूटी चलाते और कहीं न कहीं टकराते देखा होगा। उस वीडियो में ''पापा की परी'' वाला हैशटैग लिखा रहता है, जबकि कानपुर में स्थिति बिल्कुल अलग है। ये सड़कों पर भले ही ट्रैफिक नियमों का पालन न करती हों, लेकिन आरटीओ के टेस्टिंग ट्रैक पर बेहद सधे तरीके से स्कूटी चलाती हैं। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण परिवहन विभाग की रिपोर्ट में सामने आया है।
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यहां रोजाना 90 फीसदी युवतियां टेस्टिंग ट्रैक पर पास हो रही हैं, वहीं 35 प्रतिशत ''मां के लाडले'' सेंसर से बचकर निकल नहीं पा रहे हैं। युवक नियंत्रण ट्रैक के चक्रव्यूह में गच्चा खाकर फेल हो जाते हैं। संभागीय परिवहन अधिकारी कार्यालय (आरटीओ) का पनकी में अत्याधुनिक टेस्टिंग ट्रैक है। यहां रोजाना 160-180 युवक और युवतियां परमानेंट लाइसेंस के लिए वाहन चलाकर टेस्ट देते हैं। ट्रैक पर कई तरह के सेंसर लगे हुए हैं, जिन पर टकराने या छूने पर टेस्ट में फेल कर दिया जाता है।
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इस प्रक्रिया में आने के लिए फिर से 300 रुपये की फीस जमा कर टेस्ट देना पड़ता है। ट्रैक पर ट्रायल देने के लिए युवतियां स्कूटी लेकर आती हैं, जबकि युवक हाई पिकअप वाली बाइक के साथ आते हैं। परिवहन अधिकारियों के मुताबिक युवतियां शुरूआत में डरती हुई स्कूटी चलाती हैं, लेकिन पूरा सफर आसानी से तय कर लेती हैं। वहीं, युवक एकदम से बाइक लेकर ट्रैक पर उतरते हैं और सेंसर के समूह में अनियंत्रित हो जाते हैं। दोपहिया के साथ चार पहिया वाहनों का लाइसेंस लेने वालों में युवकों की संख्या 60 प्रतिशत के आसपास है। कार लाइसेंस के लिए सफल सिर्फ एक तिहाई ही होते हैं। कुल युवतियों में से केवल 10 फीसदी ही चार पहिया वाहनों के लाइसेंस का आवेदन कर रही हैं।
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लड़कियां ध्यान से सुनती हैं नियम
ट्रायल देने से पहले आवेदकों को ट्रैक की जानकारी दी जाती है। उन्हें रास्ते में पड़ने वाले अवरोध और घुमाव के बारे में बताया जाता है। परिवहन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक युवतियां निर्देशों को ध्यान से सुनती हैं, जबकि युवक हड़बड़ी में रहते हैं। ज्यादातर तो मोबाइल फोन चलाते नजर आते हैं। कई महिलाएं अपने पति के साथ आती हैं। उनके ट्रैक पर उतरते ही पति उनको समझाने लगते हैं, जिससे वे गलतियां कर देती हैं।

लाइसेंस की संख्या घटी
पहले के मुकाबले लाइसेंस की संख्या घट गई है। इसकी वजह संभागीय परिवहन विभाग की ओर से मॉनीटरिंग तेज करना है। पिछले आंकड़ों पर गौर किया जाए तो लाइसेंस की संख्या में कमी आई है। इस साल एक जनवरी से 15 मार्च तक 19621 युवकों और 1526 युवतियों के लाइसेंस बने हैं।

वर्ष             युवक             युवतियां             कुल

2022            102591             7072      109663
2023             89940             7074        97014

लाइसेंस के ट्रायल की स्थिति
लर्निंग लाइसेंस - 230 से 250 (हर दिन)
परमानेंट लाइसेंस - 180 से 200 (हर दिन)
युवक पास - 65 प्रतिशत

युवतियां सफल - 90 प्रतिशत (कुल संख्या का)
चार पहिया पास - एक तिहाई (कुल संख्या का)

लाइसेंस की प्रक्रिया पूरी तरह से नियमों के आधार पर हो रही है। पिछले वर्ष के मुकाबले मॉनीटरिंग तेज कर दी गई है। युवकों के मुकाबले युवतियां बेहतर कर रही हैं। चार पहिया वाहनों के लाइसेंस में कम अभ्यर्थी सफल हो रहे हैं। परिवहन अधिकारी उनको सभी तरह की जानकारियां और निर्देश दे रहे हैं।- राजेश सिंह, आरटीओ प्रशासन

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