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Kanpur News: उपायुक्त उद्योग के यहां मिले आय से अधिक संपत्ति के सुबूत, फर्म संचालक ने फर्जीवाड़े के लिए बनाई छह कंपनियां

Sun, 19 Jun 2022 10:09 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sun, 19 Jun 2022 10:09 AM IST
सार

आयकर अधिकारियों ने परिवार के नाम खरीदी गईं संपत्तियों के दस्तावेज भी कब्जे में लिए हैं। गोल्डन बास्केट फर्म के संचालक के यहां से मिले लिंक के आधार पर कार्रवाई की गई है। साथ ही, कई और अफसर भी जांच की जद में आ गए हैं। 

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Evidence of disproportionate assets found at Deputy Commissioner Industries in Kanpur, firm operator formed six companies for fraud
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मशीनरी उपकरण की सप्लाई करने वाली फर्म गोल्डन बास्केट से मिले साक्ष्यों के आधार पर आयकर जांच की दायरे में आए उपायुक्त उद्योग राजेश सिंह यादव के आवास से तमाम संपत्तियों के दस्तावेज मिले हैं। ये संपत्तियों उनके परिवार के लोगों के नाम हैं। जांच के लिए ये दस्तावेज बेनामी विंग भेजे जाएंगे। इसके अलावा आय से अधिक संपत्ति के भी सुबूत मिले हैं। 

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इसके अलावा गोल्डन बास्केट फर्म के संचालक अंचित मगलानी के लखनऊ और कानपुर के कई अफसरों से लिंक मिले हैं। ऐसे में ये अफसर भी जांच के दायरे में आ गए हैं। एक जिला एक उत्पाद और विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना में बांटी जानी वाली टूल किट में करोड़ों के हेरफेर की आशंका है। आयकर अधिकारी शनिवार तड़के जांच कर लौट गए। 
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आयकर विभाग की अलग-अलग टीमों ने गुरुवार को गोल्डन बास्केट फर्म के संचालक अंचित मगलानी, प्रतिभा यादव के आर्यनगर स्थित कार्यालय, गोदाम और दो अन्य प्रतिष्ठानों पर छापा मारा था। अंचित के मोती विहार स्थित आवास से मिले 1.35 करोड़ रुपये सील किए गए थे। 

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इसके साथ ही लाटूश रोड पर क्लिपको ट्रेडर्स के संचालक सुरेश गुप्ता और राजेंद्र गुप्ता के गुलाब चंद हाता स्थित प्रतिष्ठान पर भी कार्रवाई की थी। ये हैंड और पावर टूल के ट्रेडर्स हैं। अंचित के यहां से मिले लिंक के बाद दूसरी टीम ने उपायुक्त उद्योग राजेश सिंह यादव के नवाबगंज स्थित आवास पर छापा मारा था। पूछताछ के दौरान वे कई सवालों के जवाब भी नहीं दे पाए। 

परिवार के लोगों के नाम बनाईं छह फर्म
गोल्डन बास्केट फर्म का संचालक अंचित मगलानी एक नहीं छह फर्मों की मदद से टूल किट की फर्जी सप्लाई दिखाता था। ये सभी फर्म परिवार के ही लोगों के नाम हैं। दरअसल, मार्च-2022 में आयकर अफसरों ने लखनऊ स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरप्रेन्योरशिप डिपार्टमेंट के तीन अफसरों देवेंद्र पाल सिंह, राजीव शर्मा और अनिल कुमार तिवारी के यहां छापा मारा था। इनके यहां से टूल किट योजना से जुड़े तमाम दस्तावेज मिले थे। जांच में पता चला था कि एक जिला एक उत्पाद और विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत टूल किट की सप्लाई एक ही परिवार की छह फर्म से हो रही थी। 

इसके आधार पर अंचित मगलानी के यहां जांच की गई तो पूरा फर्जीवाड़ा खुलकर सामने आ गया। अंचित ने व्हाइट लोटस वेंचर नाम की कंपनी भी बनाई है। इसमें कोई व्यावसायिक आय नहीं है। वेतन के तहत गैर-स्वीकार्य कटौती का एक हिस्सा और व्यावसायिक आय के रूप में ब्याज आयकर रिटर्नों में दिखाई जाती थी। 2018-19 के रिटर्न में जहां सैलरी मद में करीब 10 लाख की जानकारी दी गई है। वहीं 2020-21 के आयकर रिटर्न में 50 लाख का टर्नओवर दिखाया गया है।
इन फर्मों से दिखाई जा रही थी सप्लाई
आरव इंडस्ट्रीज (नेहा मगलानी), रुद्र इंटरप्राइजेज (शालिनी मगलानी), व्हाइट लोटस वेंचर (अंचित मंगलानी) एवीएम इंडस्ट्रीज (विजय कुमार मगलानी), गोल्डन बास्केट, एमजीएम एंड संस (प्रदीप कुमार मंगलानी)।

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