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इंडो-यूएस प्रोजेक्ट से हर घर में पानी से बनेगी बिजली, पढ़िए आईआईटी का ये दावा
Wed, 26 Jun 2019 05:30 PM IST
शिखा पांडेय
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, कानपुर
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 26 Jun 2019 05:30 PM IST
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आईआईटी कानपुर
अब बिजली के उत्पादन के लिए बड़े हाइड्रोपॉवर सिस्टम की जरूरत नहीं पड़ेगी। आप अपने घर पर ही बचे हुए पानी से अपनी जरूरत की बिजली का उत्पादन कर सकेंगे। यह सब कुछ आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिक और मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के सीनियर प्रोफेसर डॉ. बिशाख भट्टाचार्या द्वारा तैयार तकनीक के जरिए संभव होगा।
इंडो-यूएस प्रोजेक्ट के तहत बनी इस तकनीक को वर्टेक्स इंडयूस्ड वाइब्रेशन नाम दिया गया है। इस तकनीक के सहारे आधा किलोमीटर प्रति घंटे की पानी की गति में भी आसानी से बिजली का उत्पादन किया जा सकता है।
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इंडो-यूएस प्रोजेक्ट के तहत बनी इस तकनीक को वर्टेक्स इंडयूस्ड वाइब्रेशन नाम दिया गया है। इस तकनीक के सहारे आधा किलोमीटर प्रति घंटे की पानी की गति में भी आसानी से बिजली का उत्पादन किया जा सकता है।
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अभी तक जो हाइड्रोपॉवर सिस्टम में बिजली का उत्पादन होता है उसमें पानी की गति 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रखी जाती है। इसके लिए बड़े डैम का भी निर्माण कराया जाता है जिसमें करोड़ों रुपये खर्च होते हैं।
नदियों-तालाबों में आसानी से लग सकेगा प्लांट
प्रो. बिशाख बताते हैं कि इस तकनीक का प्रयोग करते हुए हर छोटे गांव, कस्बों और शहरों की नदियों, तालाब में आसानी से बिजली उत्पादन का प्लांट लग सकेगा। इसमें अन्य हाइड्रोपॉवर सिस्टम की अपेक्षा बेहद कम खर्च भी आएगा और गांव-गांव में होेने वाला बिजली संकट भी दूर हो सकेगा।
नदियों-तालाबों में आसानी से लग सकेगा प्लांट
प्रो. बिशाख बताते हैं कि इस तकनीक का प्रयोग करते हुए हर छोटे गांव, कस्बों और शहरों की नदियों, तालाब में आसानी से बिजली उत्पादन का प्लांट लग सकेगा। इसमें अन्य हाइड्रोपॉवर सिस्टम की अपेक्षा बेहद कम खर्च भी आएगा और गांव-गांव में होेने वाला बिजली संकट भी दूर हो सकेगा।
बना रहे थे पानी की जांच की डिवाइस, तैयार हो गई बिजली
प्रो. बिशाख ने बताया कि वह और उनकी टीम नदियों की गुणवत्ता और उसकी हलचल पर 365 दिन नजर रखने के लिए एक डिवाइस तैयार कर रहे थे। डिवाइस तैयार भी हो गई लेकिन फिर उसे हमेशा पानी में रखने के लिए एनर्जी (बिजली) की जरूरत पड़ी। यह काम बैट्री से भी हो सकता था लेकिन पानी में लंबी अवधि के लिए बैट्री रखने से खराब होने की अधिक संभावना होती है। ऐसे में हमने पानी की कम गति में बिजली तैयार करने की सोची।
मछली के एक्वेरियम में किया सफल प्रयोग
वैज्ञानिकों ने मछली के एक्वेरियम में रखे पानी से बिजली का उत्पादन करने के लिए परीक्षण किया। इसमें सफलता मिली है। प्रो. बिशाख बताते हैं कि इस तकनीक को तैयार करने के लिए उनकी टीम ने स्मार्ट मैटेरियल स्ट्रक्चर एंड सिस्टम लैब में काम किया। इसमें वर्टेक्स इंड्यूस्ड वाइब्रेशन डिवाइस के जरिये पानी में पहले तरंगों को लाया गया। इससे मैकेनिकल एनर्जी तैयार की जाती है और फिर उसे क्रिस्टल के सहारे इलेक्ट्रिकल एनर्जी में तब्दील कर दिया जाता है।
प्रो. बिशाख ने बताया कि वह और उनकी टीम नदियों की गुणवत्ता और उसकी हलचल पर 365 दिन नजर रखने के लिए एक डिवाइस तैयार कर रहे थे। डिवाइस तैयार भी हो गई लेकिन फिर उसे हमेशा पानी में रखने के लिए एनर्जी (बिजली) की जरूरत पड़ी। यह काम बैट्री से भी हो सकता था लेकिन पानी में लंबी अवधि के लिए बैट्री रखने से खराब होने की अधिक संभावना होती है। ऐसे में हमने पानी की कम गति में बिजली तैयार करने की सोची।
मछली के एक्वेरियम में किया सफल प्रयोग
वैज्ञानिकों ने मछली के एक्वेरियम में रखे पानी से बिजली का उत्पादन करने के लिए परीक्षण किया। इसमें सफलता मिली है। प्रो. बिशाख बताते हैं कि इस तकनीक को तैयार करने के लिए उनकी टीम ने स्मार्ट मैटेरियल स्ट्रक्चर एंड सिस्टम लैब में काम किया। इसमें वर्टेक्स इंड्यूस्ड वाइब्रेशन डिवाइस के जरिये पानी में पहले तरंगों को लाया गया। इससे मैकेनिकल एनर्जी तैयार की जाती है और फिर उसे क्रिस्टल के सहारे इलेक्ट्रिकल एनर्जी में तब्दील कर दिया जाता है।