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इंसानों की बस्ती में घुसा ‘आदमखोर’, दस गांवों में दहशत
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sun, 25 Dec 2016 06:32 PM IST
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दस गांवों में दिन-रात लोग मरने के खौफ में जी रहे
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घरों में दुबके लोग, रात के अंधेरे में जगमगाती टॉर्च की रोशनी और बेहोशी का इंजेक्शन लेकर खुंखार जानवर के कदमों के निशान ढूंढतीं फॉरेस्ट टीम। ये दृश्य है यूपी के औरैय्या जिले का। यहां के दस गांवों में दिन-रात लोग मरने के खौफ में जी रहे हैं।
औरैया के ऐरवाकटरा में शनिवार रात क्षेत्र के गांव दासीपुर और नहरा बोझ के बीच लहा के खेत में काम कर रहे किसानों पर बाघ ने हमला बोल दिया। किसानों के चिल्लाने पर आसपास के खेतों में काम कर रहे लोग दौड़ पड़े। इससे बाघ रात के अंधेरे में गायब हो गया। बाघ की आमद पर आसपास के 10 गांवों में दहशत का माहौल बन गया। लोग लाठी बल्लम लेकर निकल आए। सूचना पर रविवार सुबह वन विभाग व कानपुर से चिड़ियाघर से भी टीम पहुंच गई। रविवार शाम तक बाघ दोबारा दिखाई नहीं दिया। उसके कदमों के निशान जरूर मिले हैं।
शनिवार की देर रात दासीपुर गांव के किसान जाहरनाथ पुत्र मुलायम नाथ लहा के खेत में काम कर रहे थे। अचानक बाघ ने छलांग लगाकर इन पर हमला बोल दिया। जाहरनाथ की चीख सुनकर आसपास के खेतों में काम के किसान लाठी लेकर दौड़ पड़े। इस पर बाघ खेताें में घुस गया। घटना स्थल से कुछ ही दूरी पर बाघ ने अजीब खान पुत्र गिरीश खान निवासी नहरा बोझ पर हमला बोल दिया। बाघ के हमले से दोनों किसान घायल हो गए।
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बाघ की आमद से भैदपुर, दासीपुर, समायन, हमीरपुर, भूटा, परसुआ, कठघोर आदि गांवों में हड़कंप मच गया। आसपास के दर्जनों गांवों के लोग लाठियां व बल्लम लेकर निकल आए। सूचना पर रविवार की सुबह वन विभाग की टीम पहुंची। कानपुर चिड़ियाघर के डा. एके सिंह भी गांव पहुंच गए। सूचना पर एसओ शिव कुमार सिंह भी पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। छह सदस्यों की टीम ने बाघ की तलाश में रविवार की देर शाम तक कॉम्बिंग की। गांव के राजन पांडेय, बालू सक्सेना समेत सैकड़ों ग्रामीण बाघ की तलाश करते रहे। रविवार की शाम तक बाघ का पता नहीं लग सका। उसके पांव के निशान जरूर इटावा जिले की तरफ जाते हुए मिले हैं। बाघ आने की खबर पर ग्रामीण लाठी डंडों से लैस होकर घूमते रहे। वहीं घर की महिलाएं और बच्चे पूरे दिन घर में ही दुबके रहे। कानपुर चिड़ियाघर की टीम बेहोशी का इंजेक्शन लेकर घूमती रही। इससे कि बाघ दिखने पर वह इंजेक्शन फेंक कर बेहोश कर सके। जाल भी मंगवा लिया गया था। चिड़ियाघर के कर्मियों का कहना है कि बाघ इटावा की तरफ ही भाग सकता है।
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औरैया के ऐरवाकटरा में शनिवार रात क्षेत्र के गांव दासीपुर और नहरा बोझ के बीच लहा के खेत में काम कर रहे किसानों पर बाघ ने हमला बोल दिया। किसानों के चिल्लाने पर आसपास के खेतों में काम कर रहे लोग दौड़ पड़े। इससे बाघ रात के अंधेरे में गायब हो गया। बाघ की आमद पर आसपास के 10 गांवों में दहशत का माहौल बन गया। लोग लाठी बल्लम लेकर निकल आए। सूचना पर रविवार सुबह वन विभाग व कानपुर से चिड़ियाघर से भी टीम पहुंच गई। रविवार शाम तक बाघ दोबारा दिखाई नहीं दिया। उसके कदमों के निशान जरूर मिले हैं।
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शनिवार की देर रात दासीपुर गांव के किसान जाहरनाथ पुत्र मुलायम नाथ लहा के खेत में काम कर रहे थे। अचानक बाघ ने छलांग लगाकर इन पर हमला बोल दिया। जाहरनाथ की चीख सुनकर आसपास के खेतों में काम के किसान लाठी लेकर दौड़ पड़े। इस पर बाघ खेताें में घुस गया। घटना स्थल से कुछ ही दूरी पर बाघ ने अजीब खान पुत्र गिरीश खान निवासी नहरा बोझ पर हमला बोल दिया। बाघ के हमले से दोनों किसान घायल हो गए।
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बाघ की आमद से भैदपुर, दासीपुर, समायन, हमीरपुर, भूटा, परसुआ, कठघोर आदि गांवों में हड़कंप मच गया। आसपास के दर्जनों गांवों के लोग लाठियां व बल्लम लेकर निकल आए। सूचना पर रविवार की सुबह वन विभाग की टीम पहुंची। कानपुर चिड़ियाघर के डा. एके सिंह भी गांव पहुंच गए। सूचना पर एसओ शिव कुमार सिंह भी पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। छह सदस्यों की टीम ने बाघ की तलाश में रविवार की देर शाम तक कॉम्बिंग की। गांव के राजन पांडेय, बालू सक्सेना समेत सैकड़ों ग्रामीण बाघ की तलाश करते रहे। रविवार की शाम तक बाघ का पता नहीं लग सका। उसके पांव के निशान जरूर इटावा जिले की तरफ जाते हुए मिले हैं। बाघ आने की खबर पर ग्रामीण लाठी डंडों से लैस होकर घूमते रहे। वहीं घर की महिलाएं और बच्चे पूरे दिन घर में ही दुबके रहे। कानपुर चिड़ियाघर की टीम बेहोशी का इंजेक्शन लेकर घूमती रही। इससे कि बाघ दिखने पर वह इंजेक्शन फेंक कर बेहोश कर सके। जाल भी मंगवा लिया गया था। चिड़ियाघर के कर्मियों का कहना है कि बाघ इटावा की तरफ ही भाग सकता है।