शत्रु संपत्ति मामला: मूल्यांकन के बाद तय होगा संपत्तियों का भविष्य, 20 से शुरू होगी सुनवाई
शहर की शत्रु संपत्तियों का मूल्यांकन एसडीएम, निबंधन और पीडब्ल्यूडी की संयुक्त टीम कर रही है। वहीं,तीन संपत्तियों के 32 कब्जाधारकों को पक्ष रखने के लिए आखिरी मौका दिया जा रह है। जिला प्रशासन सुनवाई के बाद संपत्तियों के शत्रु संपत्ति होने पर अंतिम फैसला करेगा।
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कानपुर शहर की नौ शत्रु संपत्तियों का मूल्यांकन जिला प्रशासन करा रहा है। जिलाधिकारी ने मूल्यांकन के लिए एसडीएम सदर, पीडब्ल्यूडी और निबंधन कार्यालय के अधिकारियों की संयुक्त कमेटी बनाई है, जिसे मौजूदा संपत्तियों का मूल्य बताना है। पीडब्ल्यूडी को हर संपत्ति की लंबाई-चौड़ाई के अलावा उस पर हुए निर्माण का समय व पूरा ब्योरा जुटाना है। इन जानकारियों के आधार पर निबंधन कार्यालय संपत्ति का वर्तमान सर्किल रेट के हिसाब से मूल्यांकन करेगा।
इस प्रक्रिया के बाद एक करोड़ रुपये से कम कीमत वाली संपत्तियों की जानकारी मौजूदा कब्जाधारकाें को देकर खरीदने का मौका दिया जाएगा। अगर वह नहीं खरीद पाएंगे तो संपत्ति को खाली कराया जाएगा और नीलामी के तहत बिक्री की जाएगी। वहीं, एक करोड़ से ज्यादा कीमत वाली संपत्तियों की सूची शत्रु संपत्ति के अभिरक्षक कार्यालय को भेज दी जाएगी। इसके बाद अभिरक्षक कार्यालय उन संपत्तियों को लीज पर देने या नीलामी करने का फैसला लेगा। जिले की नौ में सात शत्रु संपत्तियां शहर के पॉश इलाकों में हैं, जबकि दो घाटमपुर में हैं।
ये हैं शत्रु संपत्तियां
शत्रु संपत्तियों में पाकिस्तानी नागरिक एस हुमायूं नजर की 90/76 पायनियर टेनरीज जाजमऊ, 89/75 जाजमऊ, 92/140 हीरामन का पुरवा और 602 गोकुल अपार्टमेंट, सिविल लाइंस के अलावा तजम्मल हुसैन के ग्वालटोली स्थित मकान नंबर 11/154 ए, 11/157 और 11/58 शामिल हैं। वहीं, दो संपत्तियां घाटमपुर के भदरस में हैं, जो नवाब पुत्र पीरा की हैं।
20 से शुरू होगी सुनवाई, पहले दिन पांच लोग रखेंगे पक्ष
बेकनगंज के राम जानकी मंदिर, चमनगंज और कंघी मोहाल में स्थित तीन संभावित शत्रु संपत्तियों पर काबिज 32 परिवारों की जिला प्रशासन के सामने 20 जून से सुनवाई शुरू होगी। जिला प्रशासन ने सुनवाई को लेकर तैयारियां कर ली हैं। एडीएम सिटी ने कलक्ट्रेट में शत्रु संपत्ति देख रहे एसीएम-7 के साथ इस संबंध में बैठक भी की। तय हुआ कि 20 से 25 जून के बीच होने वाली सुनवाई के दौरान पहले चार दिन 5-5 जबकि अंतिम दो दिनों में 6-6 लोगों को बुलाया जाएगा।
डीएम की अध्यक्षता में होने वाली सुनवाई के दौरान शत्रु संपत्ति के अभिरक्षक कार्यालय के प्रतिनिधि भी रहेंगे। कब्जाधारकों को यह बताने का मौका दिया जाएगा कि क्यों यह संपत्ति शत्रु संपत्ति नहीं है। कब्जाधारक समर्थन में दस्तावेज भी पेश कर सकते हैं। एडीएम सिटी अतुल कुमार ने बताया कि सुनवाई के बाद पेश किए गए दस्तावेजों का रजिस्ट्री कार्यालय से मिलान कराया जाएगा। इसके बाद शत्रु संपत्ति घोषित करने को लेकर अंतिम फैसला डीएम करेंगे।