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गूंज रही बब्बर शेर-शेरनी की दहाड़
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sun, 11 Dec 2016 08:32 PM IST
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रायपुर नंदनवन चिड़ियाघर से आया जोड़ा
- फोटो : रविन्दर सिंह भाटिया
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कानपुर के चिड़ियाघर में बब्बर शेर और शेरनी की दहाड़ गूंजने लगी है। दो साल से ज्यादा के लंबे इंतजार के बाद चिड़ियाघर में रविवार को बब्बर शेरों का जोड़ा आया है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के नंदनवन प्राणि उद्यान से शेर-शेरनी को जोड़ा दोपहर तीन बजे चिड़ियाघर पहुंचा। शेर अजय की उम्र आठ वर्ष और शेरनी नंदिनी की आयु छह वर्ष है।
इन शेर-शेरनी को अगस्त में कानपुर जू से भेजे गए बाघों के जोड़े के बदले लाया गया है। कानपुर चिड़ियाघर में जन्मे बाघ-बाघिन बादशाह और चित्रा अब रायपुर जू में हैं। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आरके सिंह की नौ सदस्यीय टीम इस जोड़े का लेकर आई है। उन्होंने बताया कि दोनों स्वस्थ हैं। जू निदेशक दीपक कुमार ने बताया कि अभी शेर-शेरनी को बाड़े में बने नाइट कोरेंटाइन वार्ड में डॉक्टरों और जू कीपरों की देख-रेख में रखा गया है। अभी 30 दिनों तक इन्हें इसी वार्ड में रखा जाएगा और इसके बाद अफ्रीकन बाड़े में छोड़ दिया जाएगा।
छह किलो मटन, दो अंडे और दो लीटर दूध दिया
शेर शेरनी को छह-छह किलो बकरे का गोश्त (मटन) खिलाया गया। इसके अलावा दोनों ने दो-दो मुर्गी के अंडे और दो-दो लीटर दूध पिया। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आरके सिंह ने बताया कि यात्रा में थकान के बाद भी दोनों ने चाव से भोजन किया। आम तौर पर दोनों की खुराक 12-12 किलो मटन, दो-दो अंडे और दो-दो लीटर दूध की है।
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शेर-शेरनी को सर्दी से बचाएंगे ब्लोवर
अजय और नंदिनी को सर्दी से बचाने के लिए इनके नाइट कोरेंटाइन वार्डों में दो-दो ब्लोवर लगाए गए हैं। अभी 30 दिनों तक इन्हें यहीं रखा जाएगा। कानपुर के वातावरण में ढलने पर इन्हें बाड़ों में खोल दिया जाएगा। एक महीने बाद बाड़े में खोलने के बाद दिन में धूप लेंगे। रात का खाना खाने के बाद इन्हें फिर नाइट वार्ड में शिफ्ट कर दिया जाएगा।
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इन शेर-शेरनी को अगस्त में कानपुर जू से भेजे गए बाघों के जोड़े के बदले लाया गया है। कानपुर चिड़ियाघर में जन्मे बाघ-बाघिन बादशाह और चित्रा अब रायपुर जू में हैं। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आरके सिंह की नौ सदस्यीय टीम इस जोड़े का लेकर आई है। उन्होंने बताया कि दोनों स्वस्थ हैं। जू निदेशक दीपक कुमार ने बताया कि अभी शेर-शेरनी को बाड़े में बने नाइट कोरेंटाइन वार्ड में डॉक्टरों और जू कीपरों की देख-रेख में रखा गया है। अभी 30 दिनों तक इन्हें इसी वार्ड में रखा जाएगा और इसके बाद अफ्रीकन बाड़े में छोड़ दिया जाएगा।
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छह किलो मटन, दो अंडे और दो लीटर दूध दिया
शेर शेरनी को छह-छह किलो बकरे का गोश्त (मटन) खिलाया गया। इसके अलावा दोनों ने दो-दो मुर्गी के अंडे और दो-दो लीटर दूध पिया। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आरके सिंह ने बताया कि यात्रा में थकान के बाद भी दोनों ने चाव से भोजन किया। आम तौर पर दोनों की खुराक 12-12 किलो मटन, दो-दो अंडे और दो-दो लीटर दूध की है।
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शेर-शेरनी को सर्दी से बचाएंगे ब्लोवर
अजय और नंदिनी को सर्दी से बचाने के लिए इनके नाइट कोरेंटाइन वार्डों में दो-दो ब्लोवर लगाए गए हैं। अभी 30 दिनों तक इन्हें यहीं रखा जाएगा। कानपुर के वातावरण में ढलने पर इन्हें बाड़ों में खोल दिया जाएगा। एक महीने बाद बाड़े में खोलने के बाद दिन में धूप लेंगे। रात का खाना खाने के बाद इन्हें फिर नाइट वार्ड में शिफ्ट कर दिया जाएगा।