यूपीः एनआरसी-सीएए की वजह से बंटवारे के समय पाक से आए बुजुर्ग भी लगा रहे जन्म प्रमाणपत्र के लिए चक्कर
प्रमाणपत्र बनवाने के लिए पहुंच रहे लोग इस कानून के बारे में ज्यादा जानकारी होने से तो इनकार कर रहे, लेकिन उन्हें लगता है कि जन्म प्रमाणपत्र बनवा लेने से वे इस कानून के तहत भारतीय नागरिकता के दायरे में आ जाएंगे। शुक्रवार को जन्म प्रमाणपत्र के लिए पहुंचे लोगों में बटवारे के समय पाकिस्तान से आए बुजुर्ग भी शामिल रहे। ऐसे लोग भी आ रहे हैं, जिनके पास प्रमाणपत्र के लिए जरूरी दस्तावेज नहीं हैं।
6-7 दशक से देश में रह रहे इन लोगों के पास जन्म प्रमाणपत्र भी नहीं हैं। एनआरसी और सीसीए आने से ऐसे लोगों की चिंता बढ़ गई है। नगर निगम ने भी जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए बुजुर्गों का पुलिस सत्यापन भी शुरू करा दिया है। इसके लिए आवेदन होते ही निर्धारित प्रारूप में उसकी एक प्रति एसएसपी के माध्यम से संबंधित थाने में भेजी जा रही है।
पुलिस सत्यापन के लिए भेजे जा रहे प्रारूप के कॉलम
आवेदक का नाम व उपनाम, स्थायी व अस्थायी पता, पिता/माता/पत्नी की राष्ट्रीयता, मूल निवास, यदि पाकिस्तान के निवासी हों तो वहां का पूरा पता एवं पाकिस्तान छोड़कर आने की तारीख, हाईस्कूल की अंक तालिका, शैक्षिक योग्यता व उन स्थानों का उल्लेख जहां 15 वर्ष के बाद शिक्षा पाई हो, कार्यालय व फर्म का पूरा पता जहां अभ्यर्थी काम करता है।
उम्र के लिए सीएमओ का प्रमाण
जिन आवेदकों के पास उम्र सत्यापित करने के लिए हाईस्कूल का अंकपत्र नहीं है, उन्हें उम्र के सत्यापन के लिए सीएमओ कार्यालय भेजा जा रहा है।
एनआरसी, सीएए बनने के बाद से रोज 20-25 बुजुर्ग जन्म प्रमाणपत्र के लिए आवेदक करने आ रहे हैं। 50 वर्ष, 70 वर्ष, 80 वर्ष तक के बुजुर्ग भी जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए आ रहे हैं। कई के बच्चे जानकारी करने आ रहे हैं। जिनके पास निवास संबंधी प्रमाणपत्र नहीं है, वेे मोहल्ले के लोगों से निवास का सत्यापन करा सकते हैं। उम्र सीएमओ से प्रमाणित करा रहे हैं। पुलिस सत्यापन कराने के बाद नगर निगम भी जांच करा रहा है। जो आवेदन के साथ कागजी कार्यवाही पूरी करेंगे, उनके प्रमाणपत्र बनाए जाएंगे।
डॉ. प्रमिला निरंजन शुक्ला, मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी