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Kanpur News: गर्मी बढ़ने से फसलों पर मंडराया खतरा, समय रहते करें बचाव

Tue, 10 Feb 2026 12:12 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर Updated Tue, 10 Feb 2026 12:12 AM IST
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Due to increasing heat, crops are in danger, take timely precautions
गुगरापुर। फरवरी माह में दिन का तापमान लगातार बढ़ रहा है। तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण खेतों की नमी तेजी से कम हो रही है। इसका असर रबी फसलों पर दिखाई देने लगा है। गेहूं और तिलहन की फसलों में उत्पादन घटने की चिंता से किसान परेशान हैं।
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जिले में लगभग 59 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूं और 17 हजार हेक्टेयर में तिलहन की फसल है। विशेषज्ञों के अनुसार बढ़ती गर्मी से गेहूं की पत्तियां मुरझाने लगी हैं और दाना कमजोर हो रहा है। तिलहन में माहू जैसे रस चूसने वाले कीट तेजी से सक्रिय हो गए हैं। ये फूल को नुकसान पहुंचाकर फलियां बनने में बाधा डालते हैं। इसके अलावा चना, मटर, मसूर और खरीफ की फसलों में गर्मी का असर पड़ सकता है।
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कृषि विशेषज्ञों के अनुसार किसान फसलों की नियमित निगरानी करें और मौसम के अनुसार बचाव करें। गेहूं में पत्तियां मुरझाने लगें, दाना भरना कमजोर हो या पीली गेरुई रोग के लक्षण दिखें तो समय पर सिंचाई करें और आवश्यकतानुसार प्रोपीकोनाजोल या थायोफिनेट मिथाइल का छिड़काव करें। इसके साथ ही संतुलित उर्वरक का प्रयोग करें और दोपहर के समय छिड़काव से बचें।
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वहीं, सरसों और अन्य तिलहन में फूल झड़ने, माहू कीट के प्रकोप और फलियां कमजोर दिखाई देने पर नीम आधारित कीटनाशक (एजाडिरेक्टिन) का छिड़काव करें। इसके लिए नीम ऑयल पर 50 प्रतिशत अनुदान का लाभ भी उठाया जा सकता है। साथ ही पौधों में उचित अंतर रखें और समय पर सिंचाई अवश्य करें।
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चना में जैविक फफूंदनाशक का करें प्रयोग
चना की फसलों में फूल झड़ने, फलियां कमजोर होने या दाने छोटे बनने की स्थिति में दोपहर की तेज गर्मी से बचकर सिंचाई करें। जरूरत पड़ने पर जैविक कीटनाशक का छिड़काव करें और पौधों की निगरानी लगातार करें। इसी प्रकार मटर और मसूर में ग्रोथ रुकने या फूल और फलियों के झड़ने पर हल्की और नियमित सिंचाई करें। पौधों के बीच पर्याप्त दूरी रखें और जैविक फफूंदनाशक का प्रयोग करें।
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धान में पर्याप्त जलस्तर बनाए रखें
खरीफ में उग रही धान की फसल में जलस्तर कम होने से पत्तियां झुलसने लगती हैं। ऐसे लक्षण दिखें तो पर्याप्त जलस्तर बनाए रखें और समय पर सिंचाई करें। पौधों की निगरानी नियमित रूप से करें। वहीं जौ और ओट्स में तेज गर्मी के कारण वृद्धि रुकने और दाने कमजोर होने की संभावना होती है। ऐसे में हल्की सिंचाई करें, संतुलित उर्वरक का प्रयोग करें और फसल की नियमित निगरानी करें।
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ध्यान रखने योग्य सुझाव

फसलों की निगरानी रोज करें, खराबी के लक्षण दिखें तो शीघ्र उपचार करें। कीटनाशक और फंगिसाइड का प्रयोग हमेशा सीमित मात्रा में और समय पर ही करें।

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वर्जन
जिले का तापमान लगातार बढ़ रहा है और सोमवार को दिन का तापमान लगभग 24‑25 डिग्री सेल्सियस तक रहा। तेज धूप के कारण मिट्टी की नमी तेजी से कम हो रही है। यदि तापमान इसी तरह बना रहा, तो फसलों का नुकसान बढ़ सकता है। किसानों को सिंचाई का समय मौसम के अनुसार समायोजित करना चाहिए और फसल की नियमित निगरानी करनी चाहिए। - डॉ.अमरेंद्र कुमार, मौसम वैज्ञानिक


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वर्जन
किसानों को फसल की नियमित निगरानी करनी चाहिए और समय रहते बचाव उपाय अपनाने चाहिए। इससे फसल सुरक्षित रहेगी और उत्पादन में नुकसान से बचा जा सकेगा। विशेष रूप से बढ़ती गर्मी और कीटों के प्रकोप को ध्यान में रखते हुए सिंचाई, रोग-रोधी छिड़काव और नीम आधारित उपायों का पालन करना जरूरी है। - संतलाल गुप्ता, जिला कृषि अधिकारी
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