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पति की आर्थिक स्थिति देख कोर्ट ने बदल दिया फैसला, पति को 10 लाख नहीं, सिर्फ 20 हजार देने होंगे, जानें पूरा मामला
Sun, 14 Feb 2021 02:46 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 14 Feb 2021 02:46 AM IST
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घरेलू हिंसा के आरोपी पति को 10 लाख नहीं बल्कि 20 हजार रुपये जुर्माना अदा करना होगा। पत्नी की अपील खारिज करते हुए सेशन कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले पर मुहर लगा दी है। कोर्ट के इस फैसले से गरीब और लाचार पति को बड़ी राहत मिली है।
श्यामनगर निवासी मीनाक्षी दुबे का विवाह 15 फरवरी 2009 को गंगापुर कालोनी निवासी आदेश दुबे से हुआ था। मई 2012 में मीनाक्षी ने पति के खिलाफ घरेलू हिंसा का मुकदमा दर्ज करा दिया। आरोप लगाया कि दहेज में 50 हजार रुपये न लाने पर मार्च 2012 में होली के मौके पर उसे घर से निकाल दिया।
मुकदमे में फैसला सुनाते हुए फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश मिलिंद कुमार सिंह ने मीनाक्षी के भविष्य के लिए एकमुश्त क्षतिपूर्ति के रूप में 10 लाख रुपये या प्रतिमाह आठ हजार रुपये भुगतान करने का आदेश दे दिया। फैसले के खिलाफ पति ने रिवीजन याचिका दाखिल की।
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इस पर अपर जिला जज पुनीत कुमार गुप्ता ने निचली अदालत के आदेश को खारिज कर दोबारा सुनवाई के आदेश दिए। एसीएमएम प्रथम मनोज कुमार द्वितीय ने मीनाक्षी को एकमुश्त क्षतिपूर्ति के रूप में केवल 20 हजार रुपये और स्त्रीधन लौटाने के आदेश 25 सितंबर 2019 को दिए।
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श्यामनगर निवासी मीनाक्षी दुबे का विवाह 15 फरवरी 2009 को गंगापुर कालोनी निवासी आदेश दुबे से हुआ था। मई 2012 में मीनाक्षी ने पति के खिलाफ घरेलू हिंसा का मुकदमा दर्ज करा दिया। आरोप लगाया कि दहेज में 50 हजार रुपये न लाने पर मार्च 2012 में होली के मौके पर उसे घर से निकाल दिया।
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मुकदमे में फैसला सुनाते हुए फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश मिलिंद कुमार सिंह ने मीनाक्षी के भविष्य के लिए एकमुश्त क्षतिपूर्ति के रूप में 10 लाख रुपये या प्रतिमाह आठ हजार रुपये भुगतान करने का आदेश दे दिया। फैसले के खिलाफ पति ने रिवीजन याचिका दाखिल की।
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इस पर अपर जिला जज पुनीत कुमार गुप्ता ने निचली अदालत के आदेश को खारिज कर दोबारा सुनवाई के आदेश दिए। एसीएमएम प्रथम मनोज कुमार द्वितीय ने मीनाक्षी को एकमुश्त क्षतिपूर्ति के रूप में केवल 20 हजार रुपये और स्त्रीधन लौटाने के आदेश 25 सितंबर 2019 को दिए।
आदेश के अधिवक्ता संजय कुमार सिंह ने बताया कि मीनाक्षी ने भी इस आदेश के खिलाफ अपील की लेकिन सुनवाई के बाद अपर जिला जज आशीष कुमार चौरसिया ने इसे खारिज कर एसीएमएम प्रथम के आदेश को ही सही करार दे दिया।
हाईकोर्ट ने भी कम कर दी थी गुजारा राशि
अधिवक्ता संजय कुमार सिंह ने बताया कि पारिवारिक न्यायालय ने मीनाक्षी को भरणपोषण के लिए छह हजार रुपये प्रतिमाह भुगतान करने के आदेश दिए थे। पति की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उच्च न्यायालय ने इसे चार हजार कर दिया था। जिसे आदेश दुबे 12 नवंबर 2018 से लगातार अदा कर रहा है।
न्याय पर रखा भरोसा तो मिल गया इंसाफ
मेडिकल स्टोर में सेल्समैन का काम करके मात्र तीन हजार रुपये महीने कमाने वाला आदेश दुबे पत्नी द्वारा दर्ज कराए गए भरणपोषण भत्ता, घरेलू हिंसा और दहेज उत्पीड़न के मुकदमों को पिछले लगभग नौ साल से लड़ रहा है। उसने कहा कि कोर्ट का दस लाख रुपये क्षतिपूर्ति देने का आदेश सुनने के बाद खुदकुशी करने के अलावा कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था लेकिन न्याय पर भरोसा नहीं छोड़ा। आखिर उसे इंसाफ मिल गया।
हाईकोर्ट ने भी कम कर दी थी गुजारा राशि
अधिवक्ता संजय कुमार सिंह ने बताया कि पारिवारिक न्यायालय ने मीनाक्षी को भरणपोषण के लिए छह हजार रुपये प्रतिमाह भुगतान करने के आदेश दिए थे। पति की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उच्च न्यायालय ने इसे चार हजार कर दिया था। जिसे आदेश दुबे 12 नवंबर 2018 से लगातार अदा कर रहा है।
न्याय पर रखा भरोसा तो मिल गया इंसाफ
मेडिकल स्टोर में सेल्समैन का काम करके मात्र तीन हजार रुपये महीने कमाने वाला आदेश दुबे पत्नी द्वारा दर्ज कराए गए भरणपोषण भत्ता, घरेलू हिंसा और दहेज उत्पीड़न के मुकदमों को पिछले लगभग नौ साल से लड़ रहा है। उसने कहा कि कोर्ट का दस लाख रुपये क्षतिपूर्ति देने का आदेश सुनने के बाद खुदकुशी करने के अलावा कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था लेकिन न्याय पर भरोसा नहीं छोड़ा। आखिर उसे इंसाफ मिल गया।