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दिव्या हत्याकांड: बोली मां- फैसले से नहीं हूं संतुष्ट, जिगर का टुकड़ा छीनने वालों को दिलाऊंगी फांसी

Thu, 06 Dec 2018 02:50 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Updated Thu, 06 Dec 2018 02:50 PM IST
सार

- पीयूष को फांसी और अन्य आरोपियों को भी अधिक से अधिक दंड की मांग
- पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता भी असंतुष्ट, अपील करेंगे
 

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divya murder case in kanpur city
कानपुर का चर्चित दिव्या हत्याकांड

विस्तार

कानपुर का चर्चित दिव्या हत्याकांड में दिव्या की मां सोनू ने कहा कि बेटी को स्कूल पढ़ने के लिए भेजा था लेकिन घर पर उसका शव आया। स्कूल में उसके साथ हुई घटना ने मेरे सारे अरमानों को तहस-नहस कर दिया। मेरी बेटी के साथ जो जघन्य अपराध घटित हुआ उसके लिए दोषियों को सिर्फ फांसी की सजा मिलनी चाहिए थी।
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बेटी की मौत के लिए सभी आरोपी जिम्मेदार हैं। कोर्ट के फैसले से निराशा हुई है। पीयूष को फांसी और अन्य आरोपियों को भी अधिक से अधिक दंड दिलाने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाऊंगी। न्याय के लिए आखिरी सांस तक लड़ूंगी।
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दिव्या की मां (वादिनी) के अधिवक्ता अजय सिंह भदौरिया ने कहा कि शिक्षा का मंदिर कहे जाने वाले स्कूल में छात्रा के साथ अमानवीय घटना का घटित होना पूरे समाज के लिए चिंतन का विषय बन गया था।
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divya murder case in kanpur city
कानपुर का चर्चित दिव्या हत्याकांड
दिव्या की मां सोनू भदौरिया के दर्द को महसूस करते हुए आठ साल तक बिना किसी शुल्क के मैंने पूरा मुकदमा लड़ा। पीयूष को फांसी की सजा की मांग की थी लेकिन उसे उम्रकैद मिली। मुकेश वर्मा को भी कई आरोपों से मुक्त किया जाना और चंद्रपाल को दोषमुक्त किया जाना संतोषजनक नहीं है। आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की जाएगी।

दिव्या मामले के मुकदमे में कई उतार-चढ़ाव आए। विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ से भेजी गई डीएनए रिपोर्ट ने सबकुछ साफ कर दिया। पूरा मुकदमा चिकित्सकों की रिपोर्ट और कोर्ट में उनकी गवाही तथा आरोपियों की कॉल डिटेल रिपोर्ट पर केंद्रित हो गया था। दोनों रिपोर्ट पीयूष को दोषी साबित करने में सहायक बनीं। अभियोजन ने कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष पूरी मजबूती के साथ रखा। कोर्ट का फैसला पूरी तरह से सम्मान योग्य है।
नागेश कुमार दीक्षित, ज्येष्ठ लोक अभियोजक, सीबीसीआईडी

divya murder case in kanpur city
कानपुर का चर्चित दिव्या हत्याकांड
कोर्ट के फैसले का पूरा सम्मान करता हूं लेकिन 42 वर्ष की वकालत में पहली बार देखा कि साक्ष्यों के विपरीत किसी मुकदमे का निर्णय आया हो। दोषी आजाद घूम रहे हैं और निर्दोष को सलाखों के पीछे जाना पड़ रहा है। मुकदमे में न तो वादिनी की जीत हुई और न ही विपक्षी की, मुकदमे में मीडिया की जीत हुई। पीयूष निर्दोष है और उसे हर कीमत पर न्याय मिलेगा। जल्द ही फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाएंगे। आठ वर्ष से मुकदमा लंबित था। हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश के बाद फैसला संभव हो सका।
गुलाम रब्बानी बचाव पक्ष के अधिवक्ता

कोर्ट ने जो भी फैसला सुनाया मैं उसका सम्मान करता हूं। मेरा मानना है कि ईश्वर की इच्छा से ही सब कुछ होता है। आठ साल से कोर्ट के चक्कर काट-काटकर थक गया था। हाईकोर्ट में जल्द मुकदमे के निस्तारण के लिए गुहार लगाई। हाईकोर्ट के आदेश के बाद ही कोर्ट ने फैसला सुनाया। मुकदमे में हम लोगों को गलत फंसाया गया था। संपत्ति पर कब्जे का विरोध करना मुझे महंगा पड़ा। राजनीतिक प्रभाव के चलते तथ्यों के साथ छेड़छाड़ करके मुकदमे को गलत दिशा में मोड़ दिया गया।
चंद्रपाल वर्मा, रावतपुर ज्ञानस्थली स्कूल के प्रबंधक
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