{"_id":"5d035c628ebc3e1f6a49ac88","slug":"difficult-for-meritorious-of-up-board-to-get-admission-in-du","type":"story","status":"publish","title_hn":"यूपी बोर्ड के मेधावियों के लिए कठिन है डीयू की डगर, जानिए आखिर ऐसा क्यों","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूपी बोर्ड के मेधावियों के लिए कठिन है डीयू की डगर, जानिए आखिर ऐसा क्यों
Fri, 14 Jun 2019 02:05 PM IST
प्रशांत कुमार
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Fri, 14 Jun 2019 02:05 PM IST
विज्ञापन
दिल्ली यूनिवर्सिटी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यूपी बोर्ड के मेधावियों के लिए इस बार दिल्ली यूनिवर्सिटी की राह मुश्किल भरी होगी। दिल्ली यूनिवर्सिटी की हाई मेरिट सूची का मुकाबला करने में इस बार यूपी बोर्ड के मेधावी पिछड़ गए हैं। सामान्य वर्ग में दिल्ली यूनिवर्सिटी की मेरिट 95 से ऊपर ही जाती है। इस साल कानपुर में 12वीं के टॉपर के ही 90.40 अंक हैं। ऐसे में छात्रों का डीयू में दाखिले का सपना पूरा होते नहीं दिख रहा है।
बीते वर्ष दिल्ली यूनिवर्सिटी में साइंस ग्रुप की मेरिट 95 फीसदी, कॉमर्स ग्रुप की मेरिट 94 फीसदी और आर्ट्स ग्रुप में अलग-अलग विषयों में मेरिट 95 फीसदी से ऊपर गई थी। वहीं, यूपी बोर्ड में इस बार 12वीं में टॉप टेन की सूची में 87 फीसदी अंक वाले बच्चे शामिल हैं, जिसमें अधिकतर साइंस वर्ग के ही हैं। वहीं, प्रधानाचार्यों ने इसका ठीकरा मूल्यांकन प्रक्रिया पर फोड़ा है। उनका कहना है मूल्यांकन की वजह से शहर के यूपी बोर्ड के बच्चे अच्छे कॉलेज में प्रवेश पाने से चूक जाएंगे।
ओंकारेश्वर सरस्वती विद्या निकेतन स्कूल के प्रिंसिपल राम मिलन सिंह ने कहा कि जब टॉपर के ही 90 फीसदी अंक हैं तो बाकी बच्चों केे नंबरों का अंदाजा लगा सकते हैं। डीयू की मेरिट लिस्ट तो काफी हाई ही जाती है। इस बार मूल्यांकन का स्तर काफी खराब रहा है।
विज्ञापन
पारितोष इंटर कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. रचना अवस्थी कहती हैं कि कई बार मूल्यांकन पर सवाल उठाए गए हैं। वैसे भी यूपी बोर्ड के विद्यार्थी अन्य बोर्ड के मुकाबले कम अंक पाते हैं। बीएनएसडी शिक्षा निकेतन की प्रिंसिपल डॉ. ममता तिवारी ने कहा कि स्क्रूटनी फीस भी बढ़ा दी गई है, मूल्यांकन प्रक्रिया भी खराब है। ऐसे में कैसे बोर्ड पर विश्वास बना रहेगा।
विज्ञापन
बीते वर्ष दिल्ली यूनिवर्सिटी में साइंस ग्रुप की मेरिट 95 फीसदी, कॉमर्स ग्रुप की मेरिट 94 फीसदी और आर्ट्स ग्रुप में अलग-अलग विषयों में मेरिट 95 फीसदी से ऊपर गई थी। वहीं, यूपी बोर्ड में इस बार 12वीं में टॉप टेन की सूची में 87 फीसदी अंक वाले बच्चे शामिल हैं, जिसमें अधिकतर साइंस वर्ग के ही हैं। वहीं, प्रधानाचार्यों ने इसका ठीकरा मूल्यांकन प्रक्रिया पर फोड़ा है। उनका कहना है मूल्यांकन की वजह से शहर के यूपी बोर्ड के बच्चे अच्छे कॉलेज में प्रवेश पाने से चूक जाएंगे।
विज्ञापन
ओंकारेश्वर सरस्वती विद्या निकेतन स्कूल के प्रिंसिपल राम मिलन सिंह ने कहा कि जब टॉपर के ही 90 फीसदी अंक हैं तो बाकी बच्चों केे नंबरों का अंदाजा लगा सकते हैं। डीयू की मेरिट लिस्ट तो काफी हाई ही जाती है। इस बार मूल्यांकन का स्तर काफी खराब रहा है।
विज्ञापन
पारितोष इंटर कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. रचना अवस्थी कहती हैं कि कई बार मूल्यांकन पर सवाल उठाए गए हैं। वैसे भी यूपी बोर्ड के विद्यार्थी अन्य बोर्ड के मुकाबले कम अंक पाते हैं। बीएनएसडी शिक्षा निकेतन की प्रिंसिपल डॉ. ममता तिवारी ने कहा कि स्क्रूटनी फीस भी बढ़ा दी गई है, मूल्यांकन प्रक्रिया भी खराब है। ऐसे में कैसे बोर्ड पर विश्वास बना रहेगा।