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Kanpur News: 14.61 करोड़ की छात्रवृत्ति घोटाले में शामिल 65 विद्यालयों से ब्योरा तलब
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इटावा। वर्ष 2008-09 में जिले के 65 विद्यालयों में फर्जी छात्र संख्या दर्ज कर 14.61 करोड़ की छात्रवृत्ति घोटाले का मामला संज्ञान में आया था। इसकी जांच आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की कानपुर यूनिट की ओर से की जा रही है। वर्ष 2019 में इससे जुड़े 154 लोगों पर मुकदमा भी दर्ज करवाया जा चुका है। अब फिर से इससे संबंधित विद्यालयों के तत्कालीन प्रबंधकों व प्रधानाचार्यों का ब्योरा मांगा गया है। डीआईओएस की ओर से जारी पत्र में इन विद्यालयों को जानकारी देने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है।
शैक्षिक सत्र 2008-09 के दौरान कक्षा एक से 10 तक के अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक वर्ग, सामान्य वर्ग के छात्र-छात्राओं की अलग-अलग स्कूलों में फर्जी संख्या दर्शा कर छात्रवृत्ति घोटाला किए जाने की बात सामने आई थी। इस मामले में छह मई 2010 को शासन ने ईओडब्ल्यू को जांच सौंपी थी। प्रारंभिक जांच के दौरान बड़े पैमाने पर इसमें घोटाले की पुष्टि हुई और स्कूलों और विभागीय अधिकारियों ने मिलकर करोड़ों रुपये का बंदरबांट करने का मामला सामने आया था।
नौ वर्ष चली जांच के बाद फरवरी 2019 में इन 65 स्कूलों के 154 लोगों के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज की गई थी। इसमें कॉलेजों के प्रधानाचार्यों के अलावा मैनेजर और कई अन्य लोग भी शामिल थे। इसमें 14.61 करोड़ रुपये के छात्रवृत्ति घोटाला होने की बात सामने आई थी। इसमें तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी, बीएसए, बीईओ, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी सहित कई आला अधिकारी शामिल थे।
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अब इसी संबंध में 23 जून 2025 को जांच टीम की ओर से डीआईओएस को पत्र भेजकर इन 65 विद्यालयों के प्रधानाचार्यों व प्रबंधकों का डाटा मांगा गया था। इसके बाद डीआईओएस की ओर से इन 65 विद्यालयों के प्रधानाचार्यों व प्रबंधकों को पत्र जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि शैक्षिक सत्र वर्ष 2008-09 में नियुक्त रहे प्रबंधक व प्रधानाचार्य का नाम, पिता का नाम वर्तमान पता, नियुक्ति अवधि व मोबाइल नंबर उपलब्ध कराया जाए।
डीआईओएस अतुल कुमार सिंह ने बताया कि छात्रवृत्ति से जुड़ी जांच चल रही है। इसमें 65 विद्यालयों के नाम है, इन विद्यालयों से तत्कालीन समय के प्रधानाचार्यों व प्रबंधकों का ब्योरा मांगा गया है। उनसे एक सप्ताह में जवाब मांगा गया है, इसके बाद ही जांच टीम को जानकारी प्रेषित कर दी जाएगी।
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शैक्षिक सत्र 2008-09 के दौरान कक्षा एक से 10 तक के अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक वर्ग, सामान्य वर्ग के छात्र-छात्राओं की अलग-अलग स्कूलों में फर्जी संख्या दर्शा कर छात्रवृत्ति घोटाला किए जाने की बात सामने आई थी। इस मामले में छह मई 2010 को शासन ने ईओडब्ल्यू को जांच सौंपी थी। प्रारंभिक जांच के दौरान बड़े पैमाने पर इसमें घोटाले की पुष्टि हुई और स्कूलों और विभागीय अधिकारियों ने मिलकर करोड़ों रुपये का बंदरबांट करने का मामला सामने आया था।
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नौ वर्ष चली जांच के बाद फरवरी 2019 में इन 65 स्कूलों के 154 लोगों के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज की गई थी। इसमें कॉलेजों के प्रधानाचार्यों के अलावा मैनेजर और कई अन्य लोग भी शामिल थे। इसमें 14.61 करोड़ रुपये के छात्रवृत्ति घोटाला होने की बात सामने आई थी। इसमें तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी, बीएसए, बीईओ, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी सहित कई आला अधिकारी शामिल थे।
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अब इसी संबंध में 23 जून 2025 को जांच टीम की ओर से डीआईओएस को पत्र भेजकर इन 65 विद्यालयों के प्रधानाचार्यों व प्रबंधकों का डाटा मांगा गया था। इसके बाद डीआईओएस की ओर से इन 65 विद्यालयों के प्रधानाचार्यों व प्रबंधकों को पत्र जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि शैक्षिक सत्र वर्ष 2008-09 में नियुक्त रहे प्रबंधक व प्रधानाचार्य का नाम, पिता का नाम वर्तमान पता, नियुक्ति अवधि व मोबाइल नंबर उपलब्ध कराया जाए।
डीआईओएस अतुल कुमार सिंह ने बताया कि छात्रवृत्ति से जुड़ी जांच चल रही है। इसमें 65 विद्यालयों के नाम है, इन विद्यालयों से तत्कालीन समय के प्रधानाचार्यों व प्रबंधकों का ब्योरा मांगा गया है। उनसे एक सप्ताह में जवाब मांगा गया है, इसके बाद ही जांच टीम को जानकारी प्रेषित कर दी जाएगी।