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Kanpur News: दीपू पांडेय दो बार, सुनील बजाज एक बार सूची में रहे ऊपर, बाजी मार ले गए अनिल
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कानपुर। भाजपा जिलाध्यक्षों के चयन की प्रक्रिया पहली बार कई स्तरों से होकर गुजरी। जिसमें प्रमुख दावेदारों के नाम मेरिट के हिसाब से बार-बार ऊपर नीचे होते रहे। इसमें उत्तर जिले में सबसे ज्यादा उठापटक रही। यहां पर चयनकर्ताओं की सूची में निवर्तमान अध्यक्ष दीपू पांडेय दो बार ऊपर आए, पूर्व अध्यक्ष सुनील बजाज एक बार और आखिर में अनिल दीक्षित बाजी मार गए। जबकि दक्षिण में शुरू से ही एक ही नाम शिवराम पर आम सहमति बनी रही।इसके अलावा ग्रामीण इकाई में पहले ही तय हो गया था कि वहां किसी नए को जिम्मेदारी दी जाएगी। इसी तरह देहात में ब्राह्मण और पिछड़ी और अनुसूचित जातियों में मामला काफी समय तक फंसा रहा। इस उठा पटक में इन क्षेत्रों के सांसदों और विधायकों की रजामंंदी व नापसंद भी शामिल रही। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद सबसे पहली जानकारी यह आई कि ज्यादातर सीटों पर अध्यक्षों को रिपीट कर दिया जाएगा। उसमें उत्तर, दक्षिण और देहात इकाई शामिल रही है। सिर्फ ग्रामीण को इससे अलग रखा गया, लेकिन तीन आवेदकों में निवर्तमान अध्यक्ष का नाम भी लगातार शामिल रहा।
इस बीच मुख्य चुनाव अधिकारी की ओर से नया विषय जोड़ा गया। जिसमें वर्तमान अध्यक्ष के साथ पूर्व अध्यक्ष का नाम भी पैनल में रखने का फैसला लिया गया। कुछ दिनों तक इसी पैनल के आधार पर बैठकें जारी रहीं। जब तय किया कि अब सूची प्रदेश से जारी होगी तब प्रदेश प्रभारी की ओर से यह कहा गया कि इस बार जातिगत आधार पर समीकरण को पूरा करते हुए जिलाध्यक्षों की सूची तैयार की जाएगी, इसके बाद घोषणा होगी। यह फैसला आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए लिया गया। यही से नया पेच आ गया और जो नाम लगभग तय हो चुके थे उसमें बदलाव करना पड़ा। जिसमें दलित और पिछड़ी जातियों को आगे लाया गया। इतना जरूर है कि इसमें वैश्य बिरादरी पीछे छूट। वैश्य भाजपा का एक बड़ा वोट बैंक माना जाता है।
अभी जिलाध्यक्ष बनने के लिए जितने दावेदार लाइन में थे, अब वे सभी जिला इकाइयों में उपाध्यक्ष और महामंत्री बनने की दौड़ में लग गए हैं। दरअसल अभी नए प्रदेश अध्यक्ष का भी चयन होना है। ऐसे में जिला कार्यकारिणी का गठन पहले होगा या फिर प्रदेश अध्यक्ष के चयन में बाद यह अभी तय नहीं है। माना जा रहा है कि अगले छह महीने के अंतराल में जिलों की नई कमेटी गठित हो जाएगी। इसके लिए अभी पर्यवेक्षक चुने जाने की प्रक्रिया होगी। जिससे आगामी चुनाव को लेकर शुरू होने वाले अभियान की तैयारी बूथ और मंडल स्तर तक की जा सके।
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इस बीच मुख्य चुनाव अधिकारी की ओर से नया विषय जोड़ा गया। जिसमें वर्तमान अध्यक्ष के साथ पूर्व अध्यक्ष का नाम भी पैनल में रखने का फैसला लिया गया। कुछ दिनों तक इसी पैनल के आधार पर बैठकें जारी रहीं। जब तय किया कि अब सूची प्रदेश से जारी होगी तब प्रदेश प्रभारी की ओर से यह कहा गया कि इस बार जातिगत आधार पर समीकरण को पूरा करते हुए जिलाध्यक्षों की सूची तैयार की जाएगी, इसके बाद घोषणा होगी। यह फैसला आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए लिया गया। यही से नया पेच आ गया और जो नाम लगभग तय हो चुके थे उसमें बदलाव करना पड़ा। जिसमें दलित और पिछड़ी जातियों को आगे लाया गया। इतना जरूर है कि इसमें वैश्य बिरादरी पीछे छूट। वैश्य भाजपा का एक बड़ा वोट बैंक माना जाता है।
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अभी जिलाध्यक्ष बनने के लिए जितने दावेदार लाइन में थे, अब वे सभी जिला इकाइयों में उपाध्यक्ष और महामंत्री बनने की दौड़ में लग गए हैं। दरअसल अभी नए प्रदेश अध्यक्ष का भी चयन होना है। ऐसे में जिला कार्यकारिणी का गठन पहले होगा या फिर प्रदेश अध्यक्ष के चयन में बाद यह अभी तय नहीं है। माना जा रहा है कि अगले छह महीने के अंतराल में जिलों की नई कमेटी गठित हो जाएगी। इसके लिए अभी पर्यवेक्षक चुने जाने की प्रक्रिया होगी। जिससे आगामी चुनाव को लेकर शुरू होने वाले अभियान की तैयारी बूथ और मंडल स्तर तक की जा सके।
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