{"_id":"6aab038b18bf80822f07cbb4","slug":"dashalakshan-parv-begins-with-abhishek-and-shanti-dhara-kanpur-news-c-12-1-knp1049-1653038-2026-09-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kanpur News: अभिषेक शांतिधारा के साथ दसलक्षण पर्व शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kanpur News: अभिषेक शांतिधारा के साथ दसलक्षण पर्व शुरू
विज्ञापन
कानपुर। दिगंबर जैन मंदिरों में बुधवार से दस लक्षण महापर्व शुरू हो गया। 16 दिगंबर जैन मंदिरों में अभिषेक शांतिधारा, सामूहिक आरती और पूजा हुई। धर्म का पहला लक्षण क्षमा बताया गया। क्षमा को आत्मा की स्वाभाविक परिणति कहा गया। व्यक्ति के अपनी आत्मा के स्वभाव में स्थिर हो जाना ही क्षमा की स्थिति है।
दिगंबर जैन मंदिर में सुबह से अभिषेक क्रिया शुरू हो गई। आनंदपुरी जैन मंदिर में आगरा से आए जैन मुनि राकेश ने जैन महान ग्रंथ तत्त्वार्थ सूत्र का वाचन अर्थ सहित समझाया। राकेश ने कहा कि प्रतिकूल समाज मिलने पर विकृत परिणति का न होना, खेद खिन्नता न होना ही क्षमा कहलाती है। उन्होंने कहा कि क्षमा धर्म का मानव जीवन में वही स्थान है जो इस जीव के लिए आत्मा का है। क्षमा आत्मा का स्वभाव है। यह धर्म में प्रवेश करने का प्रथम द्वार है। इसके अलावा काकादेव, जनरलगंज, लालबंगला, बिरहाना रोड, कराचीखाना, आजादनगर, रतनलालनगर आदि क्षेत्रों के दिगंबर जैन मंदिरों में पर्व की शुरुआत हुई।
क्रोध का प्रतिरोधक तत्व क्षमा है
श्री धर्मनाथ जैन कांच का मंदिर, जैन भवन में पर्वाधिराज पर्युषण पर्व के आठवें दिवस मुनि डॉ. संयमरत्न विजय और मुनि भुवनरत्न विजय ने खड़े रहकर बारसा सूत्र का वाचन किया। उन्होंने ने कहा कि क्षमा करने से ही मानव क्षमा का पात्र बनता है। क्रोध का प्रतिरोधक तत्व क्षमा है। क्षमा रूपी शस्त्र जिसके हाथ में है, उसका दुर्जन कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता है। जीवों से मैत्री भाव बना रहे, यही प्रतिक्रमण का सार है।
विज्ञापन
विज्ञापन
दिगंबर जैन मंदिर में सुबह से अभिषेक क्रिया शुरू हो गई। आनंदपुरी जैन मंदिर में आगरा से आए जैन मुनि राकेश ने जैन महान ग्रंथ तत्त्वार्थ सूत्र का वाचन अर्थ सहित समझाया। राकेश ने कहा कि प्रतिकूल समाज मिलने पर विकृत परिणति का न होना, खेद खिन्नता न होना ही क्षमा कहलाती है। उन्होंने कहा कि क्षमा धर्म का मानव जीवन में वही स्थान है जो इस जीव के लिए आत्मा का है। क्षमा आत्मा का स्वभाव है। यह धर्म में प्रवेश करने का प्रथम द्वार है। इसके अलावा काकादेव, जनरलगंज, लालबंगला, बिरहाना रोड, कराचीखाना, आजादनगर, रतनलालनगर आदि क्षेत्रों के दिगंबर जैन मंदिरों में पर्व की शुरुआत हुई।
विज्ञापन
क्रोध का प्रतिरोधक तत्व क्षमा है
श्री धर्मनाथ जैन कांच का मंदिर, जैन भवन में पर्वाधिराज पर्युषण पर्व के आठवें दिवस मुनि डॉ. संयमरत्न विजय और मुनि भुवनरत्न विजय ने खड़े रहकर बारसा सूत्र का वाचन किया। उन्होंने ने कहा कि क्षमा करने से ही मानव क्षमा का पात्र बनता है। क्रोध का प्रतिरोधक तत्व क्षमा है। क्षमा रूपी शस्त्र जिसके हाथ में है, उसका दुर्जन कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता है। जीवों से मैत्री भाव बना रहे, यही प्रतिक्रमण का सार है।
विज्ञापन