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आजादी के 69 साल बाद भी इस दलित बस्ती को नहीं मिल रही मूलभूत सुविधाएं
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, कानपुर
Updated Thu, 13 Oct 2016 10:52 PM IST
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सिजवाही गांव की दलित बस्ती का जर्जर सूखा कुआं।
- फोटो : अमर उजाला
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हमीरपुर के मौदहा सिजवाही गांव की दलित बस्ती में सुविधाओं का टोटा है। यहां वाल्मीकि समाज के करीब 40 परिवार रहते हैं मगर पानी, बिजली, आवास तथा सड़क जैसी सुविधाएं नदारत हैं। दूसरे मोहल्लों के हैंडपंपों से इन्हें आरजू मिन्नत के बाद ही पानी मुहैया होता है। बस्ती में वर्ष 1952 में विकास खंड कार्यालय स्तर से सिर्फ सरकारी धन पर कुएं का निर्माण हुआ था। कुआं जर्जर होकर अपना अस्तित्व खो चुका है।
कल्ली (70) कहने लगी कि चुनाव के समय नेता आते हैं। वोट मांगते हैं और सभी दिक्कतों के निपटारे की बात करते हैं। बस्ती में एक कुंआ अलग से बनवाया गया, जिसमें कई साल से पानी ही नहीं है। अब तो बहू-बेटियां पानी लाने जब दूसरे बस्ती में जाती हैं तो वहां की बिरादरी के लोग जब पानी भर लेते हैं तभी उन्हें पानी मिल पाता है। पानी के लिए झगड़ा भी होता है।
बस्ती के श्यामलाल बाल्मीकि (65) से जानकारी लेने पर कहने लगा कि भइया हमार व्यथा तुमका का सुधरिया। बड़कवा नेता गांव आवत हैं। सब ठीक करै का कह जात हैं। बाद में भूल जात हैं। हम जस का तस बने हैं। प्रधानों वोट के खातिर सबकुछ काहत हैं। पर यहां हैंडपंप तक नहीं लाग। बिजली के दर्शन तक निहाए। हम का जानत विकास किसे काहत है। उनकी बस्ती का विद्युतीकरण नहीं हुआ। नाली खडंजा तक नहीं डाला गया है।
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वहीं खंड विकास अधिकारी गजेंद्र प्रताप सिंह कहना हैं, अभी आए हैं, सिजवाही की वाल्मीकि बस्ती की जानकारी नहीं है। अपने स्तर से विकास संबंधी मामले को देखेंगे।
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कल्ली (70) कहने लगी कि चुनाव के समय नेता आते हैं। वोट मांगते हैं और सभी दिक्कतों के निपटारे की बात करते हैं। बस्ती में एक कुंआ अलग से बनवाया गया, जिसमें कई साल से पानी ही नहीं है। अब तो बहू-बेटियां पानी लाने जब दूसरे बस्ती में जाती हैं तो वहां की बिरादरी के लोग जब पानी भर लेते हैं तभी उन्हें पानी मिल पाता है। पानी के लिए झगड़ा भी होता है।
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बस्ती के श्यामलाल बाल्मीकि (65) से जानकारी लेने पर कहने लगा कि भइया हमार व्यथा तुमका का सुधरिया। बड़कवा नेता गांव आवत हैं। सब ठीक करै का कह जात हैं। बाद में भूल जात हैं। हम जस का तस बने हैं। प्रधानों वोट के खातिर सबकुछ काहत हैं। पर यहां हैंडपंप तक नहीं लाग। बिजली के दर्शन तक निहाए। हम का जानत विकास किसे काहत है। उनकी बस्ती का विद्युतीकरण नहीं हुआ। नाली खडंजा तक नहीं डाला गया है।
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वहीं खंड विकास अधिकारी गजेंद्र प्रताप सिंह कहना हैं, अभी आए हैं, सिजवाही की वाल्मीकि बस्ती की जानकारी नहीं है। अपने स्तर से विकास संबंधी मामले को देखेंगे।