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सीएसजेएमयू : छह सेमेस्टर में 75 फीसदी अंक तो बिना परास्नातक कर सकेंगे पीएचडी
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छत्रपति शाहूजी महाराज विवि
- फोटो : आर्काइव
कानपुर। छत्रपति शाहूजी महाराज विवि में अब लगातार छह सेमेस्टर में 75 फीसदी से ऊपर अंक पाने वाले छात्रों को बिना परास्नातक किए शोध करने का मौका मिलेगा। छात्र स्नातक ऑनर्स की डिग्री के साथ पीएचडी कर सकेंगे।
इस सत्र से लागू होने वाले चार वर्षीय पाठ्यक्रम के छात्रों को इसका लाभ मिलेगा। हालांकि विवि इस साल बीए पास कर चुके छात्रों को भी इसका लाभ देना चाहता है। इस पर फैसला 12 अगस्त को होने वाली बैठक में लिया जाएगा।
विवि और उनसे संबद्ध महाविद्यालयों में अभी तक तीन वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम लागू है। इसी सत्र से इसमें परिवर्तन करते हुए बीए के चार वर्षीय पाठ्यक्रम की शुरुआत होने जा रही है। इसके तहत छात्र अब चार वर्ष बीए करने के साथ एक साल का परास्नातक कोर्स कर सकते हैं।
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इसके अलावा मेधावी छात्रों को शोध के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से स्नातक ऑनर्स विद रिसर्च कोर्स की भी शुरुआत हुई है। इसमें छात्रों को चार वर्ष के बीए पाठ्यक्रम के पहले छह सेमेस्टर में 75-75 फीसदी अंकों से पास करना होगा। इसके बाद वह चाहेंगे तो बिना परास्नातक किए ही पीएचडी कर सकेंगे। ऐसे में छात्रों का पूरा एक साल बचेगा। हालांकि पीएचडी के लिए उन्हें विवि कि तय प्रक्रिया को पार करना होगा।
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इस सत्र से लागू होने वाले चार वर्षीय पाठ्यक्रम के छात्रों को इसका लाभ मिलेगा। हालांकि विवि इस साल बीए पास कर चुके छात्रों को भी इसका लाभ देना चाहता है। इस पर फैसला 12 अगस्त को होने वाली बैठक में लिया जाएगा।
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विवि और उनसे संबद्ध महाविद्यालयों में अभी तक तीन वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम लागू है। इसी सत्र से इसमें परिवर्तन करते हुए बीए के चार वर्षीय पाठ्यक्रम की शुरुआत होने जा रही है। इसके तहत छात्र अब चार वर्ष बीए करने के साथ एक साल का परास्नातक कोर्स कर सकते हैं।
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इसके अलावा मेधावी छात्रों को शोध के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से स्नातक ऑनर्स विद रिसर्च कोर्स की भी शुरुआत हुई है। इसमें छात्रों को चार वर्ष के बीए पाठ्यक्रम के पहले छह सेमेस्टर में 75-75 फीसदी अंकों से पास करना होगा। इसके बाद वह चाहेंगे तो बिना परास्नातक किए ही पीएचडी कर सकेंगे। ऐसे में छात्रों का पूरा एक साल बचेगा। हालांकि पीएचडी के लिए उन्हें विवि कि तय प्रक्रिया को पार करना होगा।