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बीवी का मर्डर करने के बाद पूर्व सीएमओ ने रची थी ‘गहरी साजिश’, 35 साल बाद मिली सजा

Sat, 01 Apr 2017 12:15 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Sat, 01 Apr 2017 12:15 AM IST
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thirty five years after convict doctor get punishment
डेमो पिक
कानपुर शहर के बहुचर्चित ऊषा हत्याकांड में दोषी करार आरोपी पति पूर्व सीएमओ डॉ. गौतम अग्रवाल को शुक्रवार को आजीवन कारावास और 1.10 लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई। डॉक्टर ने दहेज और अवैध संबंध में रोड़ा बनने पर पत्नी का कत्ल कर दिया था। डॉक्टर ने पुलिस से बचने के लिए पत्नी के सुसाइड करने का दावा किया था, लेकिन जांच में उनकी पोल खोल गई थी। यह मामला मीडिया की भी सुर्खियों में रहा था। इसमें करीब पैतीस साल से सुनवाई चल रही थी। जिसमें कोर्ट ने परिस्थिति जन्य साक्ष्य और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर को दोषी पाते हुए सजा सुनाई है। जिसे मृतका के इंजीनियर भाई ने न्याय की जीत बताया है, जबकि बचाव पक्ष फैसले से खुश नहीं है। अब वो हाईकोर्ट में अपील करने की तैयारी कर रहे है।
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सर्वोदय नगर में रहने वाले डॉ. गौतम अग्रवाल की मूलरूप से घामपुर निवासी सुरेंद्र गुप्ता की पत्नी ऊषा से शादी हुई थी। शादी के कुछ साल बाद अक्टूबर 1982 को ऊषा की संदिग्ध परिस्थिति में मौत हो गई थी। उनकी खून से सनी लाश पड़ोस के प्लाट में पड़ी मिली थी। डॉ. गौतम ने घटना केसमय घर में मौजूद न होने का दावा करते हुए ऊषा के सुसाइड करने की शक जताया था। तत्कालीन थाना पुलिस ने भी उसे सुसाइड मान लिया था, लेकिन ऊषा के परिजनों ने हत्या का शक जताते हुए शिकायत की तो मामले को सीबीसीआईडी ट्रांसफर कर दिया गया। सीबीसीआईडी ने सच्चाई जानने केलिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सीनियर डॉक्टर की राय मांगी तो पोल खुल गई। इसके बाद उन्होंने कत्ल में प्रयुक्त समेत अन्य सबूत जुटाकर डॉक्टर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इस मुकदमे की सुनवाई एडीजे प्रथम कोर्ट में चल रही थी। जिसमें शासन की ओर से एडवोकेट राजेश शुक्ला को विशेष अभियोजन अधिकारी थे। उनके मुताबिक यह मुकदमा करीब 32 साल तक दबा रहा। कोर्ट से जारी नोटिस न मिलने से मृतका के भाई सुरेंद्र समेत परिजनों को यह तक पता नहीं था कि मुकदमे में क्या चल रहा है? जब शासन ने उनको मुकदमे की पैरवी में लगाया तो उन्होंने मृतका के इंजीनियर भाई सुरेंद्र का पता कर संपर्क कर उनको गवाही के लिए दिल्ली से यहां कोर्ट में बुलाया। इसके बाद मुकदमे की सुनवाई शुरु हुई। बचाव पक्ष ने डॉक्टर को बचाने के लिए हर मुमकिम कोशिश की। उन्होंने झूठे गवाहों को कोर्ट में पेश किया, लेकिन उनकी दलील कोर्ट में टिक नहीं सकी और कोर्ट ने डॉक्टर को दोषी पाते हुए सजा सुनाई दी।
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छोटे भाई की पत्नी से अवैध संबंध थे
डॉक्टर गौतम के छोटे भाई की पत्नी से अवैध संबंध थे। इसबारे में ऊषा को पता चला गया था। वो अवैध संबंध का विरोध कर रही थी। इसलिए डॉक्टर ने उसको मार दिया था। इसका खुलासा कोर्ट में सुनवाई के दौरान मृतक के भाई सुरेंद्र और नौकरानी सरिता के बयान से हुआ था। दोनों की गवाही में सामने आया था कि डॉक्टर गौतम के छोटे भाई की पत्नी पहले उसकी क्लीनिक में रिसेप्सिनिस्ट थी। शादी के बाद उसके डॉ. गौतम से संबंध हो गए थे। जब ऊषा ने इसका विरोध किया तो डॉ. गौतम ने उसे ही डांटते हुए छोटे भाई की पत्नी के पैर छुवाए थे। 
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