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कानपुर: नए थाने के भूमि पूजन से पहले सीपी का निरीक्षण, बोले- 100 साल पुराने रिकॉर्ड होंगे डिजिटल, दिए निर्देश

Wed, 28 Oct 2026 12:40 PM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Himanshu Awasthi Updated Wed, 28 Oct 2026 12:40 PM IST
सार

Kanpur News: नरवल थाने में नए भवन के भूमि पूजन से पहले पुलिस आयुक्त रघुवीर लाल ने थाने का बारीकी से निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान 100 साल से अधिक पुराने उर्दू-अरबी के ऐतिहासिक रिकॉर्ड (1904 से 1946) मिले, जिन्हें सीपी ने खुद गूगल ट्रांसलेट की मदद से पढ़कर अधिकारियों को सुनाया। थाने को एक ऐतिहासिक धरोहर करार देते हुए पुलिस आयुक्त ने इन दुर्लभ ब्रिटिशकालीन रजिस्टरों को गूगल ट्रांसलेट के जरिये डिजिटल रूप में सहेजने के सख्त निर्देश दिए।

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Kanpur CP conducts inspection ahead of ground breaking ceremony for  new Narwal police station
थाने का निरीक्षण करते पुलिस आयुक्त रघुवीर लाल - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर के सरसौल कस्बे में बुधवार को नरवल थाना परिसर के नए भवन के भूमि पूजन के पहले कानपुर पुलिस आयुक्त रघुवीर लाल ने थाने का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि नरवल थाना एक ऐतिहासिक धरोहर है जिसका इतिहास सौ वर्ष से भी अधिक पुराना है। निरीक्षण के दौरान पुलिस आयुक्त ने उत्सुकतावश थाने में रखे पुराने रिकॉर्ड और रजिस्टरों की एक-एक कर जांच की।

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रजिस्टरों में 1904 से 1946 तक की घटनाएं उर्दू और अरबी में दर्ज मिलीं, जिन्हें उन्होंने गूगल ट्रांसलेट की मदद से पढ़ा और मौजूद लोगों को सुनाया। उन्होंने कहा कि ये इतिहास के पन्ने हैं जो दोबारा देखने को नहीं मिलेंगे। पुलिस आयुक्त ने बताया कि 1906 में दर्ज एक घटना में ऊंट के साथ पकड़े गए व्यक्ति के पास से रुपयों से भरी बोरी बरामद हुई थी।

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1938 में ब्रिटिश कालीन इमारत में शिफ्ट हुआ था थाना
वहीं, 1932 में करबिगवां गांव के एक व्यक्ति द्वारा 100 रुपये जुर्माना जमा करने का उल्लेख मिला। इसके अलावा थरेपाह, शीशूपुर, नरवल गांव से जुड़े कई पुराने रिकॉर्ड भी रजिस्टर में दर्ज हैं।  उन्होंने बताया कि 1939 के रिकॉर्ड के अनुसार थाने के अंतर्गत करीब 47 गांव आते है और यह थाना 1938 में इस ब्रिटिश कालीन इमारत में शिफ्ट हुआ था।

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बारिश का सारा पानी पाताल लोक तक चला जाता है
उन्होंने थाना कर्मियों को निर्देश दिए कि सभी पुराने रिकॉर्ड को ट्रांसलेट कर डिजिटल रूप में सहेजा जाए ताकि इतिहास को संरक्षित किया जा सके। निरीक्षण के दौरान थाने परिसर के अंदर स्थित सैकड़ों वर्ष पुराने कुएं को भी देखा गया। स्थानीय लोगों ने बताया कि इस कुएं की विशेषता है कि बारिश का सारा पानी पाताल लोक तक चला जाता है। साथ ही, ब्रिटिश काल के दरवाजों का भी अवलोकन किया गया। इस दौरान एडीसीपी पूर्वी शिवा सिंह समेत अन्य पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।

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