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उप जिलाधिकारी को जेल
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sat, 18 Mar 2017 10:06 AM IST
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एटा के उप जिलाधिकारी को अदालत ने जेल भेज दिया गया है। वह डकैती कोर्ट में चल रहे परिवाद मामले में गैर जमानती वारंट जारी हो जाने के चार वर्षों बाद कोर्ट में हाजिर हुए थे। उनकी जमानत अर्जी पर शनिवार (18 मार्च) को सुनवाई होगी।
बांदा बबेरू तहसील के अहार गांव निवासी भगवानदास पटेल ने 21 मई 2008 को यहां विशेष न्यायाधीश (दस्यु प्रभावित क्षेत्र) की अदालत में परिवाद दाखिल किया था कि 9 मई 2008 को उसी के गांव का देवराज पाल पुत्र भगवानदीन और उसके साथ बबेरू के तत्कालीन तहसीलदार नत्थू प्रसाद पांडेय तथा नायब तहसीलदार योगेंद्र कुमार साहू और लेखपाल राजेंद्र द्विवेदी आदि उसके सूने घर में आ गए और मकान की दीवार गिराकर दुकान में रखा सामान उठा ले गए। यह भी आरोप लगाया कि इन सभी ने उसे और उसकी पत्नी को लात-घूसों से मारापीटा भी। बबेरू कोतवाली में इसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई।
अदालत ने तीनों आरोपियों के खिलाफ धारा 392 व 427 आईपीसी के तहत सुनवाई करते हुए 24 नवंबर 2008 को उन्हें तलब करने का आदेश दिया। इस बीच आरोपी तहसीलदार पांडेय की पदोन्नति और तबादला हो गया। वह एटा में एसडीएम हैं। पांडेय ने 14 अक्तूबर 2009 को अपनी जमानत करा ली। अगली तारीखों में उनके अधिवक्ता उनकी हाजिरी माफी की अर्जी देते रहे। लेकिन 6 अप्रैल 2013 को हाजिरी माफी अर्जी न पेश किए जाने पर अदालत ने एसडीएम पांडेय के विरुद्ध गैरजमानती वारंट जारी कर दिया। इसके बाद भी पांडेय अदालत में हाजिर नहीं हुए। शुक्रवार (17 मार्च) को एटा से आए एसडीएम पांडेय विशेष न्यायाधीश (डकैती) में पेश हुए और अपने अधिवक्ता के जरिए वारंट वापस लिए जाने (रीकॉल) और अंतरिम जमानत की अर्जी दाखिल की। लेकिन विशेष न्यायाधीश हरीनाथ पांडेय ने उनकी दोनों अर्जी खारिज करते हुए जेल भेज दिया।
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बांदा बबेरू तहसील के अहार गांव निवासी भगवानदास पटेल ने 21 मई 2008 को यहां विशेष न्यायाधीश (दस्यु प्रभावित क्षेत्र) की अदालत में परिवाद दाखिल किया था कि 9 मई 2008 को उसी के गांव का देवराज पाल पुत्र भगवानदीन और उसके साथ बबेरू के तत्कालीन तहसीलदार नत्थू प्रसाद पांडेय तथा नायब तहसीलदार योगेंद्र कुमार साहू और लेखपाल राजेंद्र द्विवेदी आदि उसके सूने घर में आ गए और मकान की दीवार गिराकर दुकान में रखा सामान उठा ले गए। यह भी आरोप लगाया कि इन सभी ने उसे और उसकी पत्नी को लात-घूसों से मारापीटा भी। बबेरू कोतवाली में इसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई।
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अदालत ने तीनों आरोपियों के खिलाफ धारा 392 व 427 आईपीसी के तहत सुनवाई करते हुए 24 नवंबर 2008 को उन्हें तलब करने का आदेश दिया। इस बीच आरोपी तहसीलदार पांडेय की पदोन्नति और तबादला हो गया। वह एटा में एसडीएम हैं। पांडेय ने 14 अक्तूबर 2009 को अपनी जमानत करा ली। अगली तारीखों में उनके अधिवक्ता उनकी हाजिरी माफी की अर्जी देते रहे। लेकिन 6 अप्रैल 2013 को हाजिरी माफी अर्जी न पेश किए जाने पर अदालत ने एसडीएम पांडेय के विरुद्ध गैरजमानती वारंट जारी कर दिया। इसके बाद भी पांडेय अदालत में हाजिर नहीं हुए। शुक्रवार (17 मार्च) को एटा से आए एसडीएम पांडेय विशेष न्यायाधीश (डकैती) में पेश हुए और अपने अधिवक्ता के जरिए वारंट वापस लिए जाने (रीकॉल) और अंतरिम जमानत की अर्जी दाखिल की। लेकिन विशेष न्यायाधीश हरीनाथ पांडेय ने उनकी दोनों अर्जी खारिज करते हुए जेल भेज दिया।
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