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सामूहिक दुष्कर्म मामला: आईजी से लगाई गुहार भी गई थी बेकार, पीड़िता संग होता रहा अत्याचार, बड़ा खुलासा

Thu, 16 Dec 2021 01:21 PM IST
शिखा पांडेय क्राइम डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Thu, 16 Dec 2021 01:21 PM IST
सार

किशोरी से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में पुलिस ने अब तक एक भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं की। आरोपी लगातार जान से मारने की धमकी दे रहे हैं, ताकि वह मुकदमा वापस ले लें।

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gang misdeed victim and newborn death case in kanpur, Big disclosure in the case
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर में दुष्कर्म पीड़िता किशोरी व उसके परिवार पर मुकदमा वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा था। आरोपी धमकी दे रहे थे। इसकी गुहार पीड़िता के पिता ने आईजी रेंज प्रशांत कुमार से लगाई थी। आईजी के निर्देश के बावजूद आउटर पुलिस लेखपाल पर मेहरबान रही।
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आरोपी लेखपाल धमकाता रहा। एक आरोपी को गिरफ्तार कर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया था। जब पीड़िता की मौत हुई तो आठ घंटे में ही लेखपाल को पुलिस पकड़ लाई। जैसे उसे आरोपी का ठिकाना मालूम हो। पीड़िता के पिता 29 नवंबर को आईजी दफ्तर पहुंचे थे।
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वहां पर प्रार्थना पत्र दिया था। जिसमें लिखा था कि उन्होंने करन, लेखपाल रंजीत व अन्य दो अज्ञात पर बेटी से सामूहिक दुष्कर्म करने का केस दर्ज कराया था। पुलिस ने अब तक एक भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं की। आरोपी लगातार जान से मारने की धमकी दे रहे हैं, ताकि वह मुकदमा वापस ले लें।
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आईजी ने तत्काल अफसरों को निर्देशित किया और आश्वासन दिया था कि जल्द से जल्द मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी। आईजी के निर्देश पर उनके पीआरओ ने ककवन एसओ कौशलेंद्र प्रताप सिंह को फोन कर कार्रवाई के निर्देश दिए थे।

बाद में आईजी दफ्तर से इस संबंध में एक पत्र भी थाने भेजा गया था। एसओ ने खानापूरी करते हुए करन को गिरफ्तार कर जेल भेजा लेकिन लेखपाल पर उनकी मेहरबानी जारी रही। पीड़िता ने दूसरे जिले की पुलिस से जांच कराने की मांग की थी।

 

नौकरी कर रहा था लेखपाल, पुलिस रिकॉर्ड में फरार था
लेखपाल रंजीत वरबार हर रोज काम पर जाता था। यहां तक कि केस दर्ज होने के बाद वह गांव भी गया। तहसील में बेधड़क घूमता था। मगर पुलिस के रिकॉर्ड में वह फरार चल रहा था। इससे भी स्पष्ट होता है कि पुलिस उसको गिरफ्तार नहीं करना चाहती थी। यही वजह है कि मंगलवार को जब पीड़िता की मौत हो गई तब दबाव पड़ा और फिर चंद घंटों में उसको पकड़ लाए।

जांच के आदेश, कार्रवाई शून्य
पूरे केस में बिल्हौर सीओ राजेश कुमार, पूर्व ककवन एसओ केके कश्यप और वर्तमान एसओ कौशलेंद्र प्रताप सिंह सवालों के घेरे में हैं। पॉक्सो जैसे मामलों में जिसमें दो महीने के भीतर विवेचना पूरी करनी होती है उसमें केवल एक गिरफ्तारी की गई। वो भी तब जब पीड़ित ने आईजी से गुहार लगाई। अफसरों ने भी लापरवाही मानी लेकिन अब तक किसी भी पुलिसकर्मी पर कोई कार्रवाई नहीं की। केवल एएसपी आउटर आदित्य कुमार शुक्ला मामले की जांच सौंपी गई है। 

 

एसओ बोले, कोई निर्देश नहीं थे
ककवन एसओ कौशलेंद्र प्रताप का कहना है मामले में उच्चाधिकारी से कोई निर्देश नहीं दिए गए। वहीं, हकीकत है कि 29 नवंबर को आईजी दफ्तर से उनको फोन कर कार्रवाई के लिए निर्देशित किया गया था। उसके बाद वहां से 2 दिसंबर को पत्र भेजा गया था। जिसमें आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी के निर्देश दिए गए थे। एसओ झूठ बोल रहे हैं। 

मामले की जानकारी पर मैंने कार्रवाई के लिए निर्देशित किया था। जिसमें एक गिरफ्तारी की गई थी। जिस भी स्तर से लापरवाही बरती गई होगी उस जिम्मेदार पुलिसकर्मी पर जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। अज्ञात आरोपियों का पता करने का प्रयास जारी है।- प्रशांत कुमार, आईजी रेंज कानपुर

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