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कड़ी सुरक्षा में निकली शव यात्रा, कोहराम मचा
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Tue, 09 Dec 2014 03:03 AM IST
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मरियमपुर चौराहे पर रविवार को ट्रक से कुचलकर मरे आजाद उर्फ बउआ की शव यात्रा कड़ी सुरक्षा में निकली। पोस्टमार्टम के बाद आजाद का शव लोडर से फजलगंज चौराहे पर पहुंचा।
वहां शव को जैसे ही लोडर से उतार कर सड़क पर रखा गया तो कोहराम मच गया। मां, बहन और रविवार की महिलाएं शव से लिपट गईं। दहाड़े मारकर रो पड़ी।
परिवार के पुरुषों के भी आंसू थम नहीं रहे थे। चंद मिनट बाद ही अर्थी उठी तो रोती-बिलखती महिलाएं पीछे दौड़ पड़ी। लोगों ने किसी तरह उन्हें रोका और ढांढस बंधाया।
यहां से पुलिस, पीएसी स्वॉट (क्यूआरटी) के जवान, एसपीओ (स्पेशल पुलिस ऑफीसर) पुलिस एवं प्रशासनिक अफसरों शव यात्रा को कड़ी सुरक्षा में नजीराबाद थाने के सामने स्थित कब्रिस्तान तक पहुंचाया।
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वह शव दफनाया गया। इसके बाद पीड़ित परिजनों ने मुआवजे और आर्थिक मदद की मांग को लेकर नजीराबाद थाने में हंगामा किया। प्रशासनिक अफसरों के प्रार्थना पत्र लेकर मदद का भरोसा दिलाने पर मामला शांत हुआ।
सोमवार सुबह से ही पोस्टमार्टम हाउस छावनी में तब्दील हो गया था। पुलिस, पीएसी, स्वॉट टीम, एसपी पश्चिम का रिजर्व फोर्स, आठ थानों का फोर्स, थानेदार, सीओ, एसीएम ने पोस्टमार्टम हाउस में डेरा डाल दिया।
दोपहर करीब एक बजे आजाद का पोस्टमार्टम हुआ। इसके बाद शव को लोडर से फजलगंज स्थित आजाद के घर ले जाया गया। एसओ नजीराबाद वीरेंद्र यादव और एसओ बजरिया नन्हें लाल यादव, सबइंस्पेक्टर अजय पाल लोडर से आगे-पीछे चले रहे थे।
आजाद का शव घर के बाहर रखा गया तो परिवार के लोग और महिलाएं दहाड़े मार कर रो पड़ी। शव से लिपट गईं। किसी तरह अर्थी को उठाया गया तो महिलाएं पीछे दौड़ पड़ी।
इसी बीच और फोर्स वहां पहुंच गया। भीड़ की वजह से फजलगंज चौराहे पर जाम लग गया। चौराहे के चारों तरफ वाहनों की कतार लग गई।
पुलिस ने आनन-फानन शव यात्रा को कब्रिस्तान की तरफ बढ़ाया। इसके करीब आधा घंटे बाद यातायात व्यवस्था सुचारू हो सका।
इधर, पुलिस, पीएसी स्वॉट (क्यूआरटी) के जवान पुलिस एवं प्रशासनिक अफसरों शव यात्रा को कड़ी सुरक्षा में नजीराबाद थाने के सामने स्थित कब्रिस्तान तक पहुंचाया।
इस दौरान पुलिस और प्रशासनिक अफसरों लाव-लश्कर के बाद शव यात्रा के आगे-पीछे और दाएं-बाएं चल रहे थे। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सभी बॉडी प्रोटेक्टर, डंडे और शस्त्रों से लैस थे।
सभी हेलमेट लगाए थे। भारी फोर्स के बीच शव यात्रा निकलती देख कई लोग आपस चर्चा करते रहे कि किसी नेता या फौज का अफसर की मौत हुई है।
इसलिए शव को कड़ी सुरक्षा में ले जाया जा रहा है। नजीराबाद थाने के सामने कब्रिस्तान में शव को दफनाए जाने के बाद पुलिस और प्रशासनिक अफसरों राहत की सांस ली।
तभी तमाम लोग नजीराबाद थाने पहुंच गए। पीड़ित परिवार और मुआवजा और आर्थिक मदद दिए जाने की मांग को लेकर हंगामा किया।
एससीएम ने प्रार्थना पत्र लेकर मदद का भरोसा दिया। तब लोग अपने घरों को लौट गए।
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वहां शव को जैसे ही लोडर से उतार कर सड़क पर रखा गया तो कोहराम मच गया। मां, बहन और रविवार की महिलाएं शव से लिपट गईं। दहाड़े मारकर रो पड़ी।
परिवार के पुरुषों के भी आंसू थम नहीं रहे थे। चंद मिनट बाद ही अर्थी उठी तो रोती-बिलखती महिलाएं पीछे दौड़ पड़ी। लोगों ने किसी तरह उन्हें रोका और ढांढस बंधाया।
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यहां से पुलिस, पीएसी स्वॉट (क्यूआरटी) के जवान, एसपीओ (स्पेशल पुलिस ऑफीसर) पुलिस एवं प्रशासनिक अफसरों शव यात्रा को कड़ी सुरक्षा में नजीराबाद थाने के सामने स्थित कब्रिस्तान तक पहुंचाया।
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वह शव दफनाया गया। इसके बाद पीड़ित परिजनों ने मुआवजे और आर्थिक मदद की मांग को लेकर नजीराबाद थाने में हंगामा किया। प्रशासनिक अफसरों के प्रार्थना पत्र लेकर मदद का भरोसा दिलाने पर मामला शांत हुआ।
सोमवार सुबह से ही पोस्टमार्टम हाउस छावनी में तब्दील हो गया था। पुलिस, पीएसी, स्वॉट टीम, एसपी पश्चिम का रिजर्व फोर्स, आठ थानों का फोर्स, थानेदार, सीओ, एसीएम ने पोस्टमार्टम हाउस में डेरा डाल दिया।
दोपहर करीब एक बजे आजाद का पोस्टमार्टम हुआ। इसके बाद शव को लोडर से फजलगंज स्थित आजाद के घर ले जाया गया। एसओ नजीराबाद वीरेंद्र यादव और एसओ बजरिया नन्हें लाल यादव, सबइंस्पेक्टर अजय पाल लोडर से आगे-पीछे चले रहे थे।
आजाद का शव घर के बाहर रखा गया तो परिवार के लोग और महिलाएं दहाड़े मार कर रो पड़ी। शव से लिपट गईं। किसी तरह अर्थी को उठाया गया तो महिलाएं पीछे दौड़ पड़ी।
इसी बीच और फोर्स वहां पहुंच गया। भीड़ की वजह से फजलगंज चौराहे पर जाम लग गया। चौराहे के चारों तरफ वाहनों की कतार लग गई।
पुलिस ने आनन-फानन शव यात्रा को कब्रिस्तान की तरफ बढ़ाया। इसके करीब आधा घंटे बाद यातायात व्यवस्था सुचारू हो सका।
इधर, पुलिस, पीएसी स्वॉट (क्यूआरटी) के जवान पुलिस एवं प्रशासनिक अफसरों शव यात्रा को कड़ी सुरक्षा में नजीराबाद थाने के सामने स्थित कब्रिस्तान तक पहुंचाया।
इस दौरान पुलिस और प्रशासनिक अफसरों लाव-लश्कर के बाद शव यात्रा के आगे-पीछे और दाएं-बाएं चल रहे थे। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सभी बॉडी प्रोटेक्टर, डंडे और शस्त्रों से लैस थे।
सभी हेलमेट लगाए थे। भारी फोर्स के बीच शव यात्रा निकलती देख कई लोग आपस चर्चा करते रहे कि किसी नेता या फौज का अफसर की मौत हुई है।
इसलिए शव को कड़ी सुरक्षा में ले जाया जा रहा है। नजीराबाद थाने के सामने कब्रिस्तान में शव को दफनाए जाने के बाद पुलिस और प्रशासनिक अफसरों राहत की सांस ली।
तभी तमाम लोग नजीराबाद थाने पहुंच गए। पीड़ित परिवार और मुआवजा और आर्थिक मदद दिए जाने की मांग को लेकर हंगामा किया।
एससीएम ने प्रार्थना पत्र लेकर मदद का भरोसा दिया। तब लोग अपने घरों को लौट गए।