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ऑक्सीजन हटाई, ठेले पर भेजा, महिला की मौत
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Tue, 06 Jan 2015 04:18 AM IST
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हैलट के साथ उर्सला के डॉक्टरों की अमानवीय हरकत भी सामने आई है। गंभीर हालत में लकवा पीड़ित महिला को डॉक्टरों ने हैलट रेफर किया लेकिन एंबुलेंस नहीं बुलाई।
और तो और उर्सला से बाहर निकालते ही महिला की ऑक्सीजन भी निकाल दी गई और एक ठेले पर उसे लादकर बाहर कर दिया गया। नेत्रहीन पति उसे लेकर हैलट पहुंचा तो डॉक्टरों ने महिला को मृत घोषित कर दिया।
उर्सला के डायरेक्टर मेजर डॉ. आर सक्सेना ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। यदि ऐसा है तो बहुत गलत हुआ है। जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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कोपरगंज हमराज काम्प्लेक्स के पास की रहने वाली शकुंतला (55) पत्नी धूप सिंह की शनिवार को अचानक तबियत खराब हो गई। नेत्रहीन पति बेटे संतोष और बेटी ईशा के साथ शकुंतला को लेकर उर्सला पहुंचा।
यहां डॉक्टरों ने उसे पैरालिसिस का अटैक बताया। काफी मिन्नतों के बाद शकुुंतला को भर्ती किया गया। रविवार को डॉक्टरों ने उसे दूसरे अस्पताल ले जाने को कह दिया। परिजन आर्थिक स्थिति का हवाला देते रहे।
सोमवार सुबह उर्सला के डॉक्टरों ने महिला को डिस्चार्ज कर हैलट के लिए रेफर कर दिया। उस समय शकुंतला के ऑक्सीजन लगी थी। वार्ड ब्वाय ने शकुंतला को बाहर निकाला और परिजनों से हैलट ले जाने को कहा।
परिजनों ने वाहन की व्यवस्था के लिए कहा तो बताया गया कि प्राइवेट एंबुलेंस बुला लो। रुपये न होने पर परिजनों ने ठेला लिया और शकुंतला को उसमें लाद दिया। ठेले पर शकुंतला लिटाई गई तो वार्ड ब्वाय ने ऑक्सीजन पाइप निकाल लिया।
ठेले से शकुंतला को लेकर परिजन हैलट पहुंचे लेकिन तब तक उसने दम तोड़ दिया था। नेत्रहीन पति धूप सिंह और बेटे-बेटी को कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था। वह बार-बार यही कह रहे थे कि यदि ऑक्सीजन नहीं हटती तो जान बच जाती।
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और तो और उर्सला से बाहर निकालते ही महिला की ऑक्सीजन भी निकाल दी गई और एक ठेले पर उसे लादकर बाहर कर दिया गया। नेत्रहीन पति उसे लेकर हैलट पहुंचा तो डॉक्टरों ने महिला को मृत घोषित कर दिया।
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उर्सला के डायरेक्टर मेजर डॉ. आर सक्सेना ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। यदि ऐसा है तो बहुत गलत हुआ है। जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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कोपरगंज हमराज काम्प्लेक्स के पास की रहने वाली शकुंतला (55) पत्नी धूप सिंह की शनिवार को अचानक तबियत खराब हो गई। नेत्रहीन पति बेटे संतोष और बेटी ईशा के साथ शकुंतला को लेकर उर्सला पहुंचा।
यहां डॉक्टरों ने उसे पैरालिसिस का अटैक बताया। काफी मिन्नतों के बाद शकुुंतला को भर्ती किया गया। रविवार को डॉक्टरों ने उसे दूसरे अस्पताल ले जाने को कह दिया। परिजन आर्थिक स्थिति का हवाला देते रहे।
सोमवार सुबह उर्सला के डॉक्टरों ने महिला को डिस्चार्ज कर हैलट के लिए रेफर कर दिया। उस समय शकुंतला के ऑक्सीजन लगी थी। वार्ड ब्वाय ने शकुंतला को बाहर निकाला और परिजनों से हैलट ले जाने को कहा।
परिजनों ने वाहन की व्यवस्था के लिए कहा तो बताया गया कि प्राइवेट एंबुलेंस बुला लो। रुपये न होने पर परिजनों ने ठेला लिया और शकुंतला को उसमें लाद दिया। ठेले पर शकुंतला लिटाई गई तो वार्ड ब्वाय ने ऑक्सीजन पाइप निकाल लिया।
ठेले से शकुंतला को लेकर परिजन हैलट पहुंचे लेकिन तब तक उसने दम तोड़ दिया था। नेत्रहीन पति धूप सिंह और बेटे-बेटी को कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था। वह बार-बार यही कह रहे थे कि यदि ऑक्सीजन नहीं हटती तो जान बच जाती।