भाजपा कार्यकर्ता बना ये शख्स एक साल से कर रहा था पाकिस्तान के लिए भारत की जासूसी
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पाकिस्तान के लिए जासूसी और आईएसआई एजेन्टों तक पैसा पहुंचाने के आरोप में एटीएस द्वारा गिरफ्तार बांदा का बलराम सिंह भाजपा में भी रहा है। सतना (एमपी) में दबोचे गए बांदा जनपद के गांव देउरा (जौहरपुर) निवासी बलराम सिंह के बारे में एमपी की एटीएस अभी छानबीन में जुटी हुई है।
बलराम सिंह के बारे में बताया गया है कि यह भाजपा में भी रहा। मार्च 2014 में भाजपा में शामिल हुआ। इसकी पुष्टि उसने 15 मार्च 2014 को अपने फेसबुक पर खुद की थी। वहां बजरंग दल के कार्यक्रमों में भी शिरकत करता था। बताते हैं कि जासूसी का भंडाफोड़ होने की भनक लगते ही बलराम का भाई विक्रम कई साथियों के साथ आया और सतना स्थित बलराम के किराए के मकान में रखा उसका सामान एक वाहन में भराकर उठा ले गया।
बलराम इतना बवाली कैसे हो गया?
ईएसआई के एजेंटों तक पैसा पहुंचाने और पाकिस्तान की जासूसी करने के आरोप में मध्य प्रदेश एंटी टेरेरिस्ट स्क्वॉयड (एटीएस) द्वारा सतना (एमपी) में दबोचे गए बांदा जनपद के पैतृक गांव देउरा (जौहरपुर) निवासी बलराम सिंह के बारे में एमपी की एटीएस अभी छानबीन में जुटी हुई है। मंगलवार (14 फरवरी) तक वह रिमांड पर एमपी पुलिस के कब्जे में है। जल्द ही एटीएस टीम बलराम के पैतृक गांव देउरा आ सकती है। उधर, उसके पैतृक गांव में रह रहे बाबा व अन्य परिजन तथा ग्रामीण अभी भी हैरत में हैं कि यहां गांव में बेहद सीधा सादा रहा बलराम इतना बवाली कैसे हो गया? हाल ही में बांदा जनपद की सरहद से जुड़े सतना में वहां की एटीएस ने बलराम सिंह को गिरफ्तार किया। एटीएस ने 10 अन्य लोग भी एमपी के विभिन्न जनपदों में दबोचे हैं। इन सभी पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए काम और जासूसी करने के आरोप हैं। इस गिरोह का सरगना बलराम को ही बताया जा रहा है।
250 पाकिस्तानी कॉल उसने रिसीव किए
एमपी के एटीएस अधिकारियों का कहना है कि बलराम के पास पाकिस्तान से मोबाइल फोन पर कॉल आते थे। पिछले एक वर्ष में करीब ढाई सौ पाकिस्तानी कॉल उसने रिसीव किए। बलराम वर्ष 2010 में दुबई गया था और वहां ड्राइवर के रूप में नौकरी करता रहा। एटीएस की पड़ताल के मुताबिक वर्ष 2013 में वह आईएसआई के संपर्क में आया। उसी के बाद उसने आईएसआई में अपनी पैठ बढ़ा ली और हवाला आदि के जरिए पाकिस्तान से अपने खातों में पैसा मंगाकर कश्मीर में आईएसआई एजेंटों को पहुंचाने में महारत हासिल कर ली। यह भी बताया जा रहा है कि बलराम सबसे अहम कोरियर की भूमिका में था। पाकिस्तानी हैंडलर्स से आई रकम को वो हवाला के जरिए आईएसआई के जासूसों तक पहुंचाता था। उसके माता-पिता व मकान सतना जनपद के सोहास गांव में है।