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एटीएम मशीन तोड़कर 9.50 लाख लूटे
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Wed, 16 Nov 2016 01:09 AM IST
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पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे मामले की जांच करने
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कानपुर के अर्मापुर स्थित आफीसर्स कालोनी कैंपस में लगे एसबीआई की एटीएम मशीन से शातिरों ने 9.50 लाख रुपये उड़ा दिए। बैंक अधिकारियों की शिकायत पर पुलिस ने मशीन में रुपये भरने वाली एजेंसी के 6 कर्मियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। नोटबंदी की आपाधापी के बीच अति सुरक्षित क्षेत्र में इस घटना से शहर में सनसनी मच गई है।
बैंक अधिकारियों ने बताया कि आठ नवंबर को नोट बंदी के फैसले से कुछ देर पहले ही कैंपस में लगी एसबीआई की एटीएम मशीन में सिक्योरिटी एजेंसी एसएसएमएस प्राइवेट लिमिटेड के कर्मियों ने रुपया भरा था। फैसला आते ही मशीन का सर्वर एकदम डाउन हो गया। जिसकी वजह से उससे लेनेदन नहीं हो सका। मंगलवार की शाम एजेंसी के ही कर्मचारी अभिषेक जायसवाल और कुलदीप धूरिया जब मशीन पर पहुंचे तो पीछे से नोटों के साथ लिफाफा डाले जाने वाला बाक्स खुला देख होश फाख्ता हो गए। इसके बाद बैंक अधिकारियों को सूचना दी गई। फिर पुलिस को भी घटना से अवगत कराया गया। पुलिस का कहना है कि बैंक अधिकारियों के मुताबिक मशीन में कैसेट (वह खांचे जिसमें रखे अलग-अलग नोटों की पहचान कर सेंसर उन्हें ग्राहक तक पहुंचाता है) के पीछे बने बाक्स में रखे करीब साढ़े नौ लाख रुपये नदारद हैं। इनमें पुराने 500 के नोटों से साढ़े सात लाख रुपये और 100 के नोटों के दो लाख रुपये थे। जबकि कैसेट में पंद्रह लाख से ऊपर की रकम अभी भी पड़ी हुई है। बैंक के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि आमतौर पर बाक्स में रुपये रखे ही नहीं जाते हैं, क्योकि इन रुपयों का कोई इंश्योरेंस नहीं होता है। कैसेट के रुपये इंश्योर होते हैं। फिलहाल देर रात तक बैंक और एजेंसी के अधिकारी अर्मापुर थाने में डटे रहे। पुलिस का कहना है कि कर्मियों से पूछताछ के अलावा सीसीटीवी कैमरे के फुटेज भी देखे जा रहे हैं। आठ तारीख से लेकर अब तक मशीन में रुपये होने के बाद भी लेनदेन नहीं हुआ, इसकी भी जांच की जा रही है।
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बैंक अधिकारियों ने बताया कि आठ नवंबर को नोट बंदी के फैसले से कुछ देर पहले ही कैंपस में लगी एसबीआई की एटीएम मशीन में सिक्योरिटी एजेंसी एसएसएमएस प्राइवेट लिमिटेड के कर्मियों ने रुपया भरा था। फैसला आते ही मशीन का सर्वर एकदम डाउन हो गया। जिसकी वजह से उससे लेनेदन नहीं हो सका। मंगलवार की शाम एजेंसी के ही कर्मचारी अभिषेक जायसवाल और कुलदीप धूरिया जब मशीन पर पहुंचे तो पीछे से नोटों के साथ लिफाफा डाले जाने वाला बाक्स खुला देख होश फाख्ता हो गए। इसके बाद बैंक अधिकारियों को सूचना दी गई। फिर पुलिस को भी घटना से अवगत कराया गया। पुलिस का कहना है कि बैंक अधिकारियों के मुताबिक मशीन में कैसेट (वह खांचे जिसमें रखे अलग-अलग नोटों की पहचान कर सेंसर उन्हें ग्राहक तक पहुंचाता है) के पीछे बने बाक्स में रखे करीब साढ़े नौ लाख रुपये नदारद हैं। इनमें पुराने 500 के नोटों से साढ़े सात लाख रुपये और 100 के नोटों के दो लाख रुपये थे। जबकि कैसेट में पंद्रह लाख से ऊपर की रकम अभी भी पड़ी हुई है। बैंक के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि आमतौर पर बाक्स में रुपये रखे ही नहीं जाते हैं, क्योकि इन रुपयों का कोई इंश्योरेंस नहीं होता है। कैसेट के रुपये इंश्योर होते हैं। फिलहाल देर रात तक बैंक और एजेंसी के अधिकारी अर्मापुर थाने में डटे रहे। पुलिस का कहना है कि कर्मियों से पूछताछ के अलावा सीसीटीवी कैमरे के फुटेज भी देखे जा रहे हैं। आठ तारीख से लेकर अब तक मशीन में रुपये होने के बाद भी लेनदेन नहीं हुआ, इसकी भी जांच की जा रही है।
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