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यूपी: आधार के जरिए 400 लोगों से 15 लाख की ठगी, आरोपी ने ग्राहकों के फिंगर प्रिंट का क्लोन बना लगाया चूना
Sun, 29 Aug 2021 11:01 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 29 Aug 2021 11:01 PM IST
सार
कंपनी के अधिकारी नवीन खेराजनी ने बताया कि आधार एनेबल्ड पेमेंट सिस्टम और मनी ट्रांसफर की सुविधा कंपनी के जरिये दी जाती है। ये सुविधा पूरे भारत में है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
कानपुर में आधार एनेबल्ड पेमेंट सिस्टम (एईपीसी) के जरिए ट्रांजेक्शन करने वाली कंपनी का एजेंट बन साइबर ठग ने 400 लोगों के खातों से 15 लाख रुपये पार कर दिए। आरोपी ने ग्राहकों के फिंगर प्रिंट का क्लोन बना ठगी की। रायपुरवा स्थित कंपनी के हेड ऑफिस के अफसर ने रायपुरवा थाने में तहरीर दे एफआईआर कराई है।
रेडिमिल बिजनेस मॉल प्रालि कंपनी का रायपुरवा में हेड ऑफिस है। कंपनी के अधिकारी नवीन खेराजनी ने बताया कि आधार एनेबल्ड पेमेंट सिस्टम और मनी ट्रांसफर की सुविधा कंपनी के जरिये दी जाती है। ये सुविधा पूरे भारत में है।
कंपनी का ऐप डाउनलोड कर सत्यापन प्रक्रिया पूरी कर अलग-अलग शहरों के लोग कंपनी के एजेंट बनाए गए हैं। जो ग्राहकों को सुविधा उपलब्ध कराते हैं। उनके मुताबिक तीन फेक आईडी के जरिये एक शख्स कंपनी का एजेंट बन गया। जो ग्राहक उसके पास गए और आधार एटीएम का इस्तेमाल किया उसके उसने फिंगर प्रिंट के क्लोन बना लिए।
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फिर 18 मई 2021 से लेकर 15 जून 2021 के बीच तकरीबन 400 लागों के खातों से तकरीबन 15 लाख रुपये पार कर दिए। ठगी का शिकार हुए लोग देश के अलग-अलग राज्यों के हैं। जब कंपनी के पास शिकायतें पहुंची तब इसकी जानकारी हुई। ठग ने राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र और दो चैरिटेबल ट्रस्ट के नाम से कंपनी में आईडी खोली थी।
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रेडिमिल बिजनेस मॉल प्रालि कंपनी का रायपुरवा में हेड ऑफिस है। कंपनी के अधिकारी नवीन खेराजनी ने बताया कि आधार एनेबल्ड पेमेंट सिस्टम और मनी ट्रांसफर की सुविधा कंपनी के जरिये दी जाती है। ये सुविधा पूरे भारत में है।
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कंपनी का ऐप डाउनलोड कर सत्यापन प्रक्रिया पूरी कर अलग-अलग शहरों के लोग कंपनी के एजेंट बनाए गए हैं। जो ग्राहकों को सुविधा उपलब्ध कराते हैं। उनके मुताबिक तीन फेक आईडी के जरिये एक शख्स कंपनी का एजेंट बन गया। जो ग्राहक उसके पास गए और आधार एटीएम का इस्तेमाल किया उसके उसने फिंगर प्रिंट के क्लोन बना लिए।
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फिर 18 मई 2021 से लेकर 15 जून 2021 के बीच तकरीबन 400 लागों के खातों से तकरीबन 15 लाख रुपये पार कर दिए। ठगी का शिकार हुए लोग देश के अलग-अलग राज्यों के हैं। जब कंपनी के पास शिकायतें पहुंची तब इसकी जानकारी हुई। ठग ने राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र और दो चैरिटेबल ट्रस्ट के नाम से कंपनी में आईडी खोली थी।
आंध्र प्रदेश का है ठग, कंपनी की भी रही लापरवाही
कंपनी ने जब बैंक आदि का डिटेल निकलवाई तो पता चला कि शातिर ठग आंध्र प्रदेश का रहने वाला है। वहीं के खातों में काफी रकम ट्रांसफर की गई है। पुलिस को भी पूरी डिटेल दे दी गई है। वहीं एक बड़ी लापरवाही कंपनी की भी रही। एजेंट बनाने की प्रक्रिया में लापरवाही बरती गई। अगर एजेंट का सत्यापन किया गया होता तो पता चल जाता है कि वह फर्जी है। हालांकि अब पुलिस ठग के खिलाफ कार्रवाई करेगी।
ये होता है एईपीसी
ग्राहक अपने आधार नंबर के जरिये एक दिन में अधिकतम 10 हजार रुपये निकाल सकते हैं। कंपनी मशीन से अंगूठे का निशान लेकर पैसे निकालने की सुविधा देती है। आधार नंबर व अन्य जानकारी के जरिये ये कंपनियां ग्राहक के खाते से तय रकम अपने में ट्रांसफर कर लेती हैं और ग्राहक को रकम कैश दे देती हैं। सर्विस के लिए कुछ प्रतिशत रकम कंपनी लेती है।
कंपनी ने जब बैंक आदि का डिटेल निकलवाई तो पता चला कि शातिर ठग आंध्र प्रदेश का रहने वाला है। वहीं के खातों में काफी रकम ट्रांसफर की गई है। पुलिस को भी पूरी डिटेल दे दी गई है। वहीं एक बड़ी लापरवाही कंपनी की भी रही। एजेंट बनाने की प्रक्रिया में लापरवाही बरती गई। अगर एजेंट का सत्यापन किया गया होता तो पता चल जाता है कि वह फर्जी है। हालांकि अब पुलिस ठग के खिलाफ कार्रवाई करेगी।
ये होता है एईपीसी
ग्राहक अपने आधार नंबर के जरिये एक दिन में अधिकतम 10 हजार रुपये निकाल सकते हैं। कंपनी मशीन से अंगूठे का निशान लेकर पैसे निकालने की सुविधा देती है। आधार नंबर व अन्य जानकारी के जरिये ये कंपनियां ग्राहक के खाते से तय रकम अपने में ट्रांसफर कर लेती हैं और ग्राहक को रकम कैश दे देती हैं। सर्विस के लिए कुछ प्रतिशत रकम कंपनी लेती है।