{"_id":"5d223fdf8ebc3e6cc60b2965","slug":"crime-kanpur-news-knp500179266","type":"story","status":"publish","title_hn":"इटावा जेल में सुरंगः मजबूत होमवर्क के दम पर फरार हुए कैदी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इटावा जेल में सुरंगः मजबूत होमवर्क के दम पर फरार हुए कैदी
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इटावा। अंग्रेजों के जमाने की स्थापित इटावा जिला जेल के खाते में यूं तो कई अहम कहानियों का इतिहास दर्ज है लेकिन शनिवार देर रात जो हुआ, वो भी भविष्य में ऐतिहासिक दस्तावेज की तरह याद किया जाएगा। जेल की ऊंची दीवारों को फिल्मी अंदाज में पार करके आजीवन कारावास के दो सजायाफ्ताओं को बाहर करना यह साफ करता है कि दोनों अपराधियों की तैयारियां मजबूत थीं और जेल की सुरक्षा लचर।
शुरुआती जांच में सामने आया है कि जेल से फरार होने के लिए रामानंद यादव और चंद्रप्रकाश उर्फ चंदू ने गमछों और चादरों को रस्सी की तरह इस्तेमाल किया। जाहिर है कि इन्हें माकूल संख्या में जुटाने में खासा वक्त लगा होगा या खामोशी से अन्य बंदियों अथवा जेल स्टाफ की मदद ली गई होगी। इसके अलावा सीसीटीवी नेटवर्क ध्वस्त करने और बैरक में सेंध लगाने के लिए भी युक्ति के साथ-साथ छिटपुट साधन जुटाए गए होंगे।
दीवार के नजदीकी कैदियों को सरिया और पेड़ की टहनियों की मदद मिल जाना भी जेल प्रशासन की पैनी निगाह के दोष का इशारा दे रही है।
सवाल यह भी उठ रहा है कि सीसीटीवी नेटवर्क को निगरानी का माध्यम बनाते समय स्क्रीन मॉनिटरिंग करने वाले को यह क्यों नहीं पता चला कि नेटवर्क ध्वस्त कर दिया गया है। इसके जवाब में दो तरह के अनुमान सामने आ रहे हैं। या तो मॉनिटरिंग की ही नहीं जाती या फिर नेटवर्क टूटने की घटना को काफी हल्केपन से लिया गया। कैदियों के दीवार से पार हो जाने की जानकारी भी जेल प्रशासन को उस बैरक के अन्य बंदियों से मिली। इसके बाद खतरे का सायरन बजाया गया और जेल कर्मचारी से लेकर अफसर तक जुटे।
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यहां एक सवाल यह भी है कि बैरक की मजबूती और सीसीटीवी नेटवर्क में सेंधमारी कर दीवार फांदने तक की प्रक्रिया में जेल स्टाफ के साथ-साथ जेल में मौजूद अन्य कैदियों व बंदियों को भी पूरे वाकये की भनक नहीं लगी। अथवा नजारा देखकर भी बंदी, कैदी शांत रहे। इस खामोशी के पीछे प्रलोभन था या डर।
पूरे घटनाक्रम पर उठते सवालों पर स्पष्ट बयानी की स्थिति में अभी कोई नहीं है। रविवार सुबह मुआयने के बाद डीआईजी जेल वेदप्रकाश त्रिपाठी ने पत्रकारों से बातचीत में चूक व लापरवाही की बात मानी। कहा कि इन्हीं की पड़ताल वह कर रहे हैं, ताकि लापरवाहों पर कार्रवाई की जाए। डीआईजी जेल ने कहा कि शासन की स्पष्ट मंशा है कि दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
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शुरुआती जांच में सामने आया है कि जेल से फरार होने के लिए रामानंद यादव और चंद्रप्रकाश उर्फ चंदू ने गमछों और चादरों को रस्सी की तरह इस्तेमाल किया। जाहिर है कि इन्हें माकूल संख्या में जुटाने में खासा वक्त लगा होगा या खामोशी से अन्य बंदियों अथवा जेल स्टाफ की मदद ली गई होगी। इसके अलावा सीसीटीवी नेटवर्क ध्वस्त करने और बैरक में सेंध लगाने के लिए भी युक्ति के साथ-साथ छिटपुट साधन जुटाए गए होंगे।
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दीवार के नजदीकी कैदियों को सरिया और पेड़ की टहनियों की मदद मिल जाना भी जेल प्रशासन की पैनी निगाह के दोष का इशारा दे रही है।
सवाल यह भी उठ रहा है कि सीसीटीवी नेटवर्क को निगरानी का माध्यम बनाते समय स्क्रीन मॉनिटरिंग करने वाले को यह क्यों नहीं पता चला कि नेटवर्क ध्वस्त कर दिया गया है। इसके जवाब में दो तरह के अनुमान सामने आ रहे हैं। या तो मॉनिटरिंग की ही नहीं जाती या फिर नेटवर्क टूटने की घटना को काफी हल्केपन से लिया गया। कैदियों के दीवार से पार हो जाने की जानकारी भी जेल प्रशासन को उस बैरक के अन्य बंदियों से मिली। इसके बाद खतरे का सायरन बजाया गया और जेल कर्मचारी से लेकर अफसर तक जुटे।
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यहां एक सवाल यह भी है कि बैरक की मजबूती और सीसीटीवी नेटवर्क में सेंधमारी कर दीवार फांदने तक की प्रक्रिया में जेल स्टाफ के साथ-साथ जेल में मौजूद अन्य कैदियों व बंदियों को भी पूरे वाकये की भनक नहीं लगी। अथवा नजारा देखकर भी बंदी, कैदी शांत रहे। इस खामोशी के पीछे प्रलोभन था या डर।
पूरे घटनाक्रम पर उठते सवालों पर स्पष्ट बयानी की स्थिति में अभी कोई नहीं है। रविवार सुबह मुआयने के बाद डीआईजी जेल वेदप्रकाश त्रिपाठी ने पत्रकारों से बातचीत में चूक व लापरवाही की बात मानी। कहा कि इन्हीं की पड़ताल वह कर रहे हैं, ताकि लापरवाहों पर कार्रवाई की जाए। डीआईजी जेल ने कहा कि शासन की स्पष्ट मंशा है कि दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
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