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धोखाधड़ी कर हड़पे 80 लाख, 75 लोगों पर रिपोर्ट
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डेरापुर (कानपुर देहात)। बड़ौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक शाखा सिठमरा से कूट रचित दस्तावेजों के जरिए लोन लेने और फिर रुपये जमा नहीं कराने वाले खातेदारों व उसके सहयोगियों समेत 75 लोगों पर शाखा प्रबंधक ने कूटरचित अभिलेख से धोखाधड़ी करने और अमानत में खयानत की रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस मामले में छानबीन कर रही है। शुक्रवार को कोर्ट के आदेश पर डेरापुर थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। पूरा घोटाला लगभग 80 लाख रुपये से अधिक का होने की बात कही जा रही है। हालांकि बैंक के शाखा प्रबंधक ने कुछ भी बताने से इंकार किया है।
बड़ौदा उत्तरप्रदेश ग्रामीण बैंक शाखा सिठमरा के प्रबंधक सर्वेश कुमार ने कोर्ट के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज कराई है कि डेरापुर निवासी गिरीश मिश्रा, भानदत्त का पुरवा निवासी बलवान सिंह, सिठमरा निवासी कल्लू सिंह, कुलदीप कुशवाहा, विकास बाबू, गेंदामऊ निवासी जिबराइल, जगदीश, महराजपुर निवासी शिवकुमार, कटेही निवासी संदीप कुमार व अकारु निवासी बदलू समेत 75 लोगों ने भूमि से संबंधित कूट रचित दस्तावेज उपलब्ध कराकर धोखाधड़ी से लोन ले लिया था। यह लोग अब लोन लिए रुपये जमा नहीं कर रहे हैं। विभागीय जांच में उनके लगाए सभी कागजात भी फर्जी पाए गए।
जानकारों के अनुसार, लोन लेने में सुनियोजित तरीके से फर्जी दस्तावेज लगाए गए। थाना प्रभारी समीर कुमार सिंह ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर शाखा प्रबंधक की तहरीर के अनुसार सभी आरोपियों पर रिपोर्ट दर्ज की गई है। विवेचना में साक्ष्यों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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इधर, बैंक से कूट रचित अभिलेखों के जरिए किसान क्रेडिट कार्ड बनाकर लोन हासिल करने वालों की मदद बैंक कर्मियों व बैंक के लीगल एडवाइजर की भूमिका पर ही सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारों की मानें तो मामला लगभग छह वर्ष पुराना है। पहले बैंक अफसर रिकवरी का प्रयास करते रहे। बाद में बकायेदारों के मुकरने पर एफआईआर के लिए बैंक अफसरों ने कोर्ट की शरण ली। पुलिस के अनुसार, एफआईआर में मददगारों के नाम भी शामिल हैं।
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बड़ौदा उत्तरप्रदेश ग्रामीण बैंक शाखा सिठमरा के प्रबंधक सर्वेश कुमार ने कोर्ट के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज कराई है कि डेरापुर निवासी गिरीश मिश्रा, भानदत्त का पुरवा निवासी बलवान सिंह, सिठमरा निवासी कल्लू सिंह, कुलदीप कुशवाहा, विकास बाबू, गेंदामऊ निवासी जिबराइल, जगदीश, महराजपुर निवासी शिवकुमार, कटेही निवासी संदीप कुमार व अकारु निवासी बदलू समेत 75 लोगों ने भूमि से संबंधित कूट रचित दस्तावेज उपलब्ध कराकर धोखाधड़ी से लोन ले लिया था। यह लोग अब लोन लिए रुपये जमा नहीं कर रहे हैं। विभागीय जांच में उनके लगाए सभी कागजात भी फर्जी पाए गए।
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जानकारों के अनुसार, लोन लेने में सुनियोजित तरीके से फर्जी दस्तावेज लगाए गए। थाना प्रभारी समीर कुमार सिंह ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर शाखा प्रबंधक की तहरीर के अनुसार सभी आरोपियों पर रिपोर्ट दर्ज की गई है। विवेचना में साक्ष्यों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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इधर, बैंक से कूट रचित अभिलेखों के जरिए किसान क्रेडिट कार्ड बनाकर लोन हासिल करने वालों की मदद बैंक कर्मियों व बैंक के लीगल एडवाइजर की भूमिका पर ही सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारों की मानें तो मामला लगभग छह वर्ष पुराना है। पहले बैंक अफसर रिकवरी का प्रयास करते रहे। बाद में बकायेदारों के मुकरने पर एफआईआर के लिए बैंक अफसरों ने कोर्ट की शरण ली। पुलिस के अनुसार, एफआईआर में मददगारों के नाम भी शामिल हैं।