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Kanpur News: सीएम ग्रिड की सड़कों और अडाणी ग्रुप की कई इमारतों में खपाई गई डुप्लीकेट सीमेंट

Fri, 16 Oct 2026 01:58 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 16 Oct 2026 01:58 AM IST
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Counterfeit cement was used in the construction of CM Grid roads and several Adani Group buildings.
कानपुर। इस्पातनगर में बुधवार को पकड़ी गई डुप्लीकेट सीमेंट सीएम ग्रिड की सड़कों से लेकर अडाणी ग्रुप की कई इमारतों के निर्माण तक में खपाई गई है। लखनऊ में बन रहे अडाणी ग्रुप के एयरपोर्ट तक में इसी फर्म से बनी सीमेंट की सप्लाई की गई। इस बात की जानकारी खुद अडाणी ग्रुप की टीम ने पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल को दी गई। दरअसल, फैक्टरी संचालक जिन दो गुप्ता बंधुओं को नामजद किया गया है उनके पास ही एसीसी व अम्बुजा सीमेंट डिस्ट्रीब्यूटरशिप भी थी। ऐसे में रोज ब्रांडेड सीमेंट की 1000 डुप्लीकेट बोरियां तैयार कर बाजार में खपाई जाती थीं।
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सीपी का कहना है कि अडाणी ग्रुप अपने स्तर से जांच कर रहा है। पुलिस भी पता कर रही है कि सीएम ग्रिड की सड़कों और एयरपोर्ट के अलावा कहां-कहां डुप्लीकेट सीमेंट की सप्लाई की गई है। इसके पीछे गुप्ता बंधु के अलावा और कौन-कौन शामिल है। सबका पता कर कड़ी कार्रवाई की तैयारी है। सीपी के मुताबिक पूछताछ में यह भी सामने आया है कि सीएम ग्रिड की टूटी सड़कों से सीमेंट बटोरकर उसे इस्पातनगर तक पहुंचाया जाता था। क्रशर की मदद से दोबारा उसे सीमेंट में तब्दील किया जाता था।
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बता दें कि बुधवार को पुलिस ने इस्पातनगर में छापा मारकर डुप्लीकेट सीमेंट बनाने वाली फर्म का भंडाफोड़ किया था। यहां एसीसी और अम्बुजा सीमेंट के नाम पर डुप्लीकेट सीमेंट की 1000 से अधिक बोरियां मिली थीं। दो ट्रकों में लोड और बड़े पैमाने पर खुला माल भी बरामद हुआ। फर्म रामादेवी निवासी सगे भाई नीरज और धीरज गुप्ता की बताई जा रही है जो ब्रांडेड सीमेंट के डिस्ट्रीब्यूटर भी हैं। यहीं पर मेरठ के सुनील मित्तल व निशांत मित्तल का भी डुप्लीकेट माल तैयार होता था। पुलिस ने फर्म के मुंशी राहुल को गिरफ्तार किया था।
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राहुल ने पुलिस की पूछताछ में बताया कि डुप्लीकेट सीमेंट तैयार करने के लिए इस्पातनगर में बाकायदा प्लांट लगा है। यहीं पर एक्सपायरी और जमी हुई सीमेंट को पीसकर उसमें मिलावट की जाती थी। केमिकल डालकर उसे ताजी सीमेंट बनाकर बोरियों में पैक किया जाता था। गुप्ता बंधुओं की दो फर्में रामादेवी में हैं। इनके नाम अर्नव डिस्ट्रीब्यूटर और मां भगवती हैं। पुलिस कमिश्नर का कहना है कि फिलहाल दोनों भाई फरार हैं और उनकी तलाश जारी है।



जिसे दी डिस्ट्रीब्यूटरशिप उसी ने लगाया साख पर बट्टा
अडाणी ग्रुप के अधिकारियों ने सीपी को बताया था कि गुप्ता बंधु को प्रति माह पांच टन सीमेंट का कोटा दिया गया था। इसके अलावा कानपुर में दो डिस्ट्रीब्यूटर और भी हैं जिनके पास 15 और 25 टन सीमेंट का कोटा है। इन दोनों डिस्ट्रीब्यूटरों ने भी एसीसी और अम्बुजा की डुप्लीकेट सीमेंट बाजार में बिकने की आशंका जताई थी। यही वजह रही कि इन कंपनियों की सीमेंट की बिक्री प्रभावित हो रही थी। अधिकारियों का कहना है कि पहले तो ग्रुप को यकीन ही नहीं हुआ कि जिसको डिस्ट्रीब्यूटर बनाया वही ग्रुप के ही उत्पाद का डुप्लीकेट माल बनाकर ग्रुप को ही सप्लाई कर रहा है। जब टीम इस्पातनगर पहुंची तो वहां नकली माल देखकर आंखें फटी रह गईं।


थाने पर नहीं था भरोसा, भेजी थी अपनी टीम
अडाणी ग्रुप की तरह कहीं न कहीं पुलिस कमिश्नर को भी पनकी थाना पुलिस पर भरोसा नहीं था। यही वजह थी कि मामले का सही पता लगाने के लिए सीपी ने पनकी थाना पुलिस नहीं बल्कि अपने पीआरओ कुंवर सिंह को एक टीम और ग्रुप के अधिकारियों के साथ मौके पर भेजा। वास्तविक स्थिति पता कराई। जब बरामद माल के डुप्लीकेट होने की पुष्टि हो गई तब थाना पुलिस को सूचना कराई गई।

पुरानी बोरियों में नई छपाई कराई जाती थी
मुंशी राहुल ने बताया कि फर्म में दुकानों से एक्सपायरी सीमेंट तो लाई ही जाती थी, साथ ही पुरानी बोरियां भी बाजार से सस्ते दाम पर खरीदी जाती थीं। बोरियों में छपाई के लिए भी मशीन लगा रखी थी। इसके बाद बोरियां एकदम नई जैसी लगने लगती थीं। उसमें एसीसी और अंबुजा सीमेंट के नाम पर डुप्लीकेट माल भर दिया जाता था। बोरियां देखकर कोई असली व नकली का फर्क नहीं कर सकता था।


ऐसे तैयार की जाती थी नकली सीमेंट
- नमी के संपर्क में आकर खराब हो चुकी या एक्सपायर हो चुकी सीमेंट को सस्ते दाम पर खरीदकर, उसे दोबारा पीसकर या छानकर बोरियों में भर दिया जाता था।
- इसमें असली सीमेंट की मात्रा बहुत कम (जैसे 20-30%) रखी जाती थी। बाकी हिस्सा स्थानीय रेत या डस्ट से भर दिया जाता था।


ऐसे करें डुप्लीकेट सीमेंट की पहचान
- असली सीमेंट को उंगलियों के बीच रगड़ने पर वह एकदम चिकनी और मलाई जैसी महसूस होती है। नकली सीमेंट में दानेदारपन या रेत/डस्ट जैसा खुरदरापन महसूस होता है।
- बोरी में हाथ डालने पर यदि ठंडक महसूस हो तो सीमेंट असली है। यदि वह गर्म या सामान्य तापमान पर लगे तो रासायनिक क्रिया शुरू होने या मिलावट की आशंका है।
- पानी से भरी बाल्टी या गिलास में थोड़ा सा सीमेंट डालें। अच्छी गुणवत्ता वाली असली सीमेंट नीचे बैठने से पहले कुछ सेकेंड तक पानी पर तैरती है। नकली या मिलावटी सीमेंट तुरंत तली में बैठ जाती है।
- असली सीमेंट में कोई सख्त गांठ नहीं होती और उसका रंग हल्का भूरा-हरा होता है। नकली सीमेंट में कड़क गांठें हो सकती हैं और इसका रंग ज्यादा सफेद या कालापन लिए हुए हो सकता है।

- बोरी पर छपी निर्माण तिथि देखें। तीन महीने से ज्यादा पुरानी सीमेंट अपनी मजबूती खोने लगती है। हमेशा अधिकृत डीलर से पक्के बिल के साथ ही सीमेंट खरीदें।
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