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Coronavirus Update: कोरोना लगा रहा दौड़, सैंपलिंग की कछुआ चाल, मार्च से अब तक हुई 25 हजार सैंपलिंग
Sat, 13 Jun 2020 07:24 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sat, 13 Jun 2020 07:24 PM IST
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कोरोना वायरस
- फोटो : अमर उजाला
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उत्तर प्रदेश के कानपुर में जून महीने में कोरोना ने लोगाें को तेजी से शिकार बनाया है। इसके बावजूद कोरोना का कम्युनिटी स्प्रेड (सामुदायिक संक्रमण) का स्तर पता लगाने के लिए कराई जा रही सैंपलिंग की रफ्तार कछुआ चाल से आगे बढ़ रही है। अप्रैल और मई की तरह ही जून में भी धीमी रफ्तार से सैंपलिंग चल रही।
इस महीने केवल 9 जून को अधिकतम 555 सैंपल लिए गए। इसके पहले और बाद में पांच सौ का आंकड़ा पार नहीं हुआ। यह हाल तब है जब जून के 13 दिनों में ही कोरोना के 313 मरीज मिले हैं। पहली जून को संक्रमितों की संख्या 372 थी जो 13 जून को बढ़कर 685 हो गई। लॉकडाउन में ढील और परदेस से प्रवासियों की भीड़ आने से कोरोना काफी बलवान हुआ है।
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इस महीने केवल 9 जून को अधिकतम 555 सैंपल लिए गए। इसके पहले और बाद में पांच सौ का आंकड़ा पार नहीं हुआ। यह हाल तब है जब जून के 13 दिनों में ही कोरोना के 313 मरीज मिले हैं। पहली जून को संक्रमितों की संख्या 372 थी जो 13 जून को बढ़कर 685 हो गई। लॉकडाउन में ढील और परदेस से प्रवासियों की भीड़ आने से कोरोना काफी बलवान हुआ है।
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ऊपर से सोशल डिस्टेंसिंग के प्रति लोगों की लापरवाही कोढ़ में खाज साबित हो रही है। इसी का नतीजा है कि एक जून को कोरोना से मृतकों की संख्या 11 थी और 13 जून को 26 हो गई। हालांकि शासन ने अधिक से अधिक सैंपलिंग कराने के निर्देश दिए हैं। लेकिन इस पर ढंग से अमल नहीं हो रहा है।
मार्च से लेकर अब तक सरकारी क्षेत्र में करीब 22 हजार और निजी क्षेत्रों में तीन हजार सैंपल भेजे गए हैं। इस तरह लगभग 25 हजार सैंपलिंग हुई है। जून में 12 तारीख तक 4 हजार 606 सैंपल लिए गए। अगर सैंपलिंग की रफ्तार तेज हो जाए तो नए क्षेत्रों में भी कोरोना के मरीज मिलेंगे।
इससे संक्रमण पर लगाम लगाने में आसानी होगी। सैंपलिंग न होने से मरीजों की पहचान नहीं हो पाती है। जिससे संक्रमण की मार बढ़ती जाती है। सीएमओ डॉ. अशोक शुक्ला का कहना है कि सैंपलिंग बढ़ाई जा रही है। रैंडम सैंपलिंग भी हो रही है। इसके लिए ट्रूनेट मशीनें आई हैं और कोविड लैब में भी नई मशीन लगी है।
मार्च से लेकर अब तक सरकारी क्षेत्र में करीब 22 हजार और निजी क्षेत्रों में तीन हजार सैंपल भेजे गए हैं। इस तरह लगभग 25 हजार सैंपलिंग हुई है। जून में 12 तारीख तक 4 हजार 606 सैंपल लिए गए। अगर सैंपलिंग की रफ्तार तेज हो जाए तो नए क्षेत्रों में भी कोरोना के मरीज मिलेंगे।
इससे संक्रमण पर लगाम लगाने में आसानी होगी। सैंपलिंग न होने से मरीजों की पहचान नहीं हो पाती है। जिससे संक्रमण की मार बढ़ती जाती है। सीएमओ डॉ. अशोक शुक्ला का कहना है कि सैंपलिंग बढ़ाई जा रही है। रैंडम सैंपलिंग भी हो रही है। इसके लिए ट्रूनेट मशीनें आई हैं और कोविड लैब में भी नई मशीन लगी है।