{"_id":"60e7620e8ebc3e9e943e38d3","slug":"corona-in-kanpur-all-doors-are-open-for-delta-plus","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"सिस्टम पर सवाल: डेल्टा प्लस के लिए खुले हैं सारे दरवाजे, दूसरे प्रांत वालों के साथ अंदर वालों से भी खतरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सिस्टम पर सवाल: डेल्टा प्लस के लिए खुले हैं सारे दरवाजे, दूसरे प्रांत वालों के साथ अंदर वालों से भी खतरा
Fri, 09 Jul 2021 05:24 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 09 Jul 2021 05:24 AM IST
सार
सबसे बड़ी परेशानी वायरस के जांच की है। रिपोर्ट आने में बहुत देर लगती है। जब तक किसी व्यक्ति में संक्रमण की पुष्टि होगी, वह दर्जनों लोगों को संक्रमित कर चुका होगा।
विज्ञापन
कानपुर में मचा था कोरोना से कोहराम
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कोरोना के नए वैरिएंट डेल्टा प्लस की देवरिया और गोरखपुर के रोगियों में पहचान हो गई है। ऐसे में अब दूसरे प्रांतों के साथ ही प्रदेश के जिलों से आने वाले लोगों से डेल्टा प्लस संक्रमण के फैलने का खतरा पैदा हो गया है। इसके बाद भी यहां पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। संक्रमण के शहर पहुंचने वाले सारे रास्ते खुले हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग का सिस्टम तैयार नहीं है।
सबसे बड़ी परेशानी वायरस के जांच की है। रिपोर्ट आने में बहुत देर लगती है। जब तक किसी व्यक्ति में संक्रमण की पुष्टि होगी, वह दर्जनों लोगों को संक्रमित कर चुका होगा। प्रदेश में डेल्टा प्लस के रोगी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग और जीएसवीएम मेडिकल कालेज के विशेषज्ञों की चिंता बढ़ गई है। गोरखपुर और देवरिया में जो डेल्टा प्लस पॉजिटिव मिले हैं, उनकी सैंपलिंग मई में बताई जा रही है।
गोरखपुर और देवरिया से लोगों का शहर आना-जाना रहता है। यह भी संदेह पैदा हो गया है कि डेल्ट वायरस शहर पहुंच न गया हो। जांच मेडिकल कालेज के कोविड लैब में होती नहीं है, जिससे रोगी पकड़ में न आया हो। हालांकि अभी तक जिन सैंपल की रिपोर्ट दिल्ली से आई है, उनमें डेल्टा मिला है। कुछ सैंपल ऐसे जिनमें नन लिखा है। यह किसी की समझ में नहीं आ रहा है कि इनकी जांच में कोई स्पष्ट नतीजा क्यों नहीं बताया गया।
विज्ञापन
पूर्वांचल की तरफ से बहुत से ट्रेन और बस शहर आती हैं। स्टेशन और बस अड्डों पर भी सक्रियता नहीं दिखाई जा रही है। इसके अलावा शहर के इंट्री प्वाइंट पर भी लोगों की जांच की व्यवस्था थी, लेकिन अभी व्यवस्था धड़ाम है। इसके अलावा कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग पर भी गंभीरता नहीं बरती जा रही है। ऐसे में रोगी बढ़े तो स्थिति संभालना मुश्किल होगा।
विज्ञापन
सबसे बड़ी परेशानी वायरस के जांच की है। रिपोर्ट आने में बहुत देर लगती है। जब तक किसी व्यक्ति में संक्रमण की पुष्टि होगी, वह दर्जनों लोगों को संक्रमित कर चुका होगा। प्रदेश में डेल्टा प्लस के रोगी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग और जीएसवीएम मेडिकल कालेज के विशेषज्ञों की चिंता बढ़ गई है। गोरखपुर और देवरिया में जो डेल्टा प्लस पॉजिटिव मिले हैं, उनकी सैंपलिंग मई में बताई जा रही है।
विज्ञापन
गोरखपुर और देवरिया से लोगों का शहर आना-जाना रहता है। यह भी संदेह पैदा हो गया है कि डेल्ट वायरस शहर पहुंच न गया हो। जांच मेडिकल कालेज के कोविड लैब में होती नहीं है, जिससे रोगी पकड़ में न आया हो। हालांकि अभी तक जिन सैंपल की रिपोर्ट दिल्ली से आई है, उनमें डेल्टा मिला है। कुछ सैंपल ऐसे जिनमें नन लिखा है। यह किसी की समझ में नहीं आ रहा है कि इनकी जांच में कोई स्पष्ट नतीजा क्यों नहीं बताया गया।
विज्ञापन
पूर्वांचल की तरफ से बहुत से ट्रेन और बस शहर आती हैं। स्टेशन और बस अड्डों पर भी सक्रियता नहीं दिखाई जा रही है। इसके अलावा शहर के इंट्री प्वाइंट पर भी लोगों की जांच की व्यवस्था थी, लेकिन अभी व्यवस्था धड़ाम है। इसके अलावा कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग पर भी गंभीरता नहीं बरती जा रही है। ऐसे में रोगी बढ़े तो स्थिति संभालना मुश्किल होगा।
सीएमओ डॉ. नेपाल सिंह से दो टूक
डेल्ट प्लस को लेकर क्यों सतर्कता नहीं है?
- पूरी सतर्कता बरती जा रही है। सैंपलिंग नहीं कम की गई।
रेलवे स्टेशन और बस अड्डों पर टीमें जांच नहीं कर रहीं?
- रेलवे स्टेशन के सिटी साइड रोज टीम रोटेशन में रहती है, सैंपलिंग हो रही है।
शहर के इंट्री प्वाइंट की सैंपलिंग स्वास्थ्य विभाग भूल गया?
- हमने कोई टीम हटाई ही नहीं है, जो पहले से लगीं थीं, वे लगी हुई हैं।
कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग में क्या डेल्टा प्लस के बाद तेजी आएगी?
- ट्रेसिंग हो रही है। निगरानी समितियां काम कर रही हैं।
आक्सीजन जनरेटर प्लांट नहीं लग पाए
कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन न मिल पाने के कारण बहुत से रोगी मरे थे। इस स्थिति से बचने के लिए ऑक्सीजन जनरेटर प्लांट लगाए जाने थे। लेकिन अभी तक उर्सला में एक ही प्लांट चालू हुआ और दूसरे का काम हो रहा है। हैलट में चार प्लांट लगने थे, एक बन पाया और तीन फंसे हुए हैं। सीएचसी पर अभी तक ऑक्सीजन जनरेटर प्लांट नहीं लगे। कांशीराम अस्पताल में भी अभी जनरेटर प्लांट नहीं लग पाया है। इस स्थिति में फिर वही दूसरी लहर जैसा हाल होगा।
डेल्ट प्लस को लेकर क्यों सतर्कता नहीं है?
- पूरी सतर्कता बरती जा रही है। सैंपलिंग नहीं कम की गई।
रेलवे स्टेशन और बस अड्डों पर टीमें जांच नहीं कर रहीं?
- रेलवे स्टेशन के सिटी साइड रोज टीम रोटेशन में रहती है, सैंपलिंग हो रही है।
शहर के इंट्री प्वाइंट की सैंपलिंग स्वास्थ्य विभाग भूल गया?
- हमने कोई टीम हटाई ही नहीं है, जो पहले से लगीं थीं, वे लगी हुई हैं।
कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग में क्या डेल्टा प्लस के बाद तेजी आएगी?
- ट्रेसिंग हो रही है। निगरानी समितियां काम कर रही हैं।
आक्सीजन जनरेटर प्लांट नहीं लग पाए
कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन न मिल पाने के कारण बहुत से रोगी मरे थे। इस स्थिति से बचने के लिए ऑक्सीजन जनरेटर प्लांट लगाए जाने थे। लेकिन अभी तक उर्सला में एक ही प्लांट चालू हुआ और दूसरे का काम हो रहा है। हैलट में चार प्लांट लगने थे, एक बन पाया और तीन फंसे हुए हैं। सीएचसी पर अभी तक ऑक्सीजन जनरेटर प्लांट नहीं लगे। कांशीराम अस्पताल में भी अभी जनरेटर प्लांट नहीं लग पाया है। इस स्थिति में फिर वही दूसरी लहर जैसा हाल होगा।
हैलट में अभी तक सभी बेड पर वेंटिलेटर नहीं
कोरोना की तीसरी लहर में शंका जाहिर की जा रही है कि सबसे अधिक बच्चे प्रभावित होंगे। ऐसी स्थिति में अभी तक सौ बेड का आईसीयू हैलट में पूरी तरह तैयार नहीं है। सिर्फ 21 वेंटिलेटर लगे हैं। संसाधन अभी तक नहीं आ पाए है। सिर्फ प्रस्ताव ही चल रहा है।
वार्डों में आक्सीजन पाइप लाइन नहीं बिछ पाई
हैलट के वार्ड एक से चार तक पाइप लाइन बिछाई जानी थी। इससे कोविड अस्पतालों के बेड भर जाने पर रोगियों को रखा जा सकता। लेकिन अभी पाइप लाइन पर विचार ही चल रहा है।
नर्सिंगहोमों में बच्चों के आईसीयू नहीं बने
कोरोना की तीसरी लहर के मद्देनजर निजी नर्सिंगहोमों में पीडियाट्रिक आईसीयू तैयार होने थे लेकिन अभी तैयार नहीं हो पाए हैं। इसके अलावा कांशीराम अस्पताल में बच्चों को भर्ती किए जाने की व्यवस्था अधूरी है। नॉन कोविड बालरोगियों के लिए उर्सला का पीडियाट्रिक आईसीयू तैयार नहीं हो पाया है। यहां एनेस्थेटिस्ट की भर्ती नहीं हुई।
कोरोना की तीसरी लहर में शंका जाहिर की जा रही है कि सबसे अधिक बच्चे प्रभावित होंगे। ऐसी स्थिति में अभी तक सौ बेड का आईसीयू हैलट में पूरी तरह तैयार नहीं है। सिर्फ 21 वेंटिलेटर लगे हैं। संसाधन अभी तक नहीं आ पाए है। सिर्फ प्रस्ताव ही चल रहा है।
वार्डों में आक्सीजन पाइप लाइन नहीं बिछ पाई
हैलट के वार्ड एक से चार तक पाइप लाइन बिछाई जानी थी। इससे कोविड अस्पतालों के बेड भर जाने पर रोगियों को रखा जा सकता। लेकिन अभी पाइप लाइन पर विचार ही चल रहा है।
नर्सिंगहोमों में बच्चों के आईसीयू नहीं बने
कोरोना की तीसरी लहर के मद्देनजर निजी नर्सिंगहोमों में पीडियाट्रिक आईसीयू तैयार होने थे लेकिन अभी तैयार नहीं हो पाए हैं। इसके अलावा कांशीराम अस्पताल में बच्चों को भर्ती किए जाने की व्यवस्था अधूरी है। नॉन कोविड बालरोगियों के लिए उर्सला का पीडियाट्रिक आईसीयू तैयार नहीं हो पाया है। यहां एनेस्थेटिस्ट की भर्ती नहीं हुई।