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बुखार आते ही खुद को आइसोलेट करें, फिर जांच कराएं, संक्रमण मिला तो फिर बढ़ती जाती हैं मुश्किलें
Sun, 25 Apr 2021 06:34 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sun, 25 Apr 2021 06:34 PM IST
सार
संक्रमित होने के साथ ही मुसीबतों का सिलसिला भी शुरू हो जाता है। ऑक्सीजन और बेड के लिए भागदौड़ होती है और रोग की जटिलताएं बढ़ती जाती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते बचाव कर लेने में ही समझदारी है।
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कोरोना वायरस
- फोटो : PTI
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विस्तार
कानपुर कोरोना के संक्रमण का फैलाव हर घंटे बढ़ रहा है। संक्रमित होने के साथ ही मुसीबतों का सिलसिला भी शुरू हो जाता है। ऑक्सीजन और बेड के लिए भागदौड़ होती है और रोग की जटिलताएं बढ़ती जाती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते बचाव कर लेने में ही समझदारी है।
ऐसे में संक्रमण हुआ भी तो जान का खतरा टल जाता है। चिकित्सीय क्षेत्र में सालों से काम कर रहे विशेषज्ञों से बात की तो उन्होंने महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। बताया कि बुखार आने पर सबसे पहले खुद को आइसोलेट कर लें। इसके बाद जांच कराएं।
वैक्सीन से मिल रहा है प्रोटेक्शन
वैक्सीन से कोरोना के बचाव के लिए बहुत मजबूत प्रोटेक्शन मिल रहा है। संक्रमण वैक्सीन लगने के बाद भी हो सकता है लेकिन यह जानलेवा नहीं हो पाएगा। बचाव के चार तरीकों पर अमल करें। मास्क लगाएं, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। सैनिटाइजेशन और साबुन से नियमित हाथ धोएं। कोरोना का यह वैरिएंट ऑयली है। साबुन से छूट जाएगा।
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डॉ. संतोष कुमार, पूर्व मेडिसिन विभागाध्यक्ष जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज
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ऐसे में संक्रमण हुआ भी तो जान का खतरा टल जाता है। चिकित्सीय क्षेत्र में सालों से काम कर रहे विशेषज्ञों से बात की तो उन्होंने महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। बताया कि बुखार आने पर सबसे पहले खुद को आइसोलेट कर लें। इसके बाद जांच कराएं।
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वैक्सीन से मिल रहा है प्रोटेक्शन
वैक्सीन से कोरोना के बचाव के लिए बहुत मजबूत प्रोटेक्शन मिल रहा है। संक्रमण वैक्सीन लगने के बाद भी हो सकता है लेकिन यह जानलेवा नहीं हो पाएगा। बचाव के चार तरीकों पर अमल करें। मास्क लगाएं, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। सैनिटाइजेशन और साबुन से नियमित हाथ धोएं। कोरोना का यह वैरिएंट ऑयली है। साबुन से छूट जाएगा।
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डॉ. संतोष कुमार, पूर्व मेडिसिन विभागाध्यक्ष जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज
हर बुखार कोरोना नहीं लेकिन लापरवाही भी न करें
बुुखार आने पर सबसे पहले खुद को अलग कर लें। हर बुखार को कोरोना न समझें लेकिन लापरवाही भी न करें। इसके बाद एंटीजन और आरटीपीसीआर जांच कराएं। पॉजिटिव आती है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और मशविरे में अमल शुरू कर दें। कोशिश करें कि संक्रमित ही न हों। अगर हों तो पॉजिटिविटी बनाए रखें। यह सबसे अधिक जरूरी है।
डॉ. जेएस कुशवाहा, स्वदेशी वैक्सीन, कोवाक्सिन ट्रायल के चीफ इन्वेस्टीगेटर यूपी
सांस फूले तो पेट के बल लेट जाएं
वैसे बचाव से अच्छा कोई विकल्प नहीं है कोरोना संक्रमण को दूर रखने के लिए। अगर संक्रमित होते हैं तो घबराएं नहीं। गहरी-गहरी सांसें लेते रहें और पेट के बल लेट जाएं। पल्स आक्सीमीटर से ऑक्सीजन लेवल की जांच करते रहें। अगर 92 के नीचे आने लगे तो समझेें आक्सीजन सपोर्ट की जरूरत है। अस्पताल में भर्ती होने का इंतजाम करें। घबराएं नहीं, इससे भी सांस फूलने का लक्षण उभर आता है।
डॉ. अनिल निगम, सीनियर चेस्ट फिजीशियन, सीएमएस उर्सला
बुुखार आने पर सबसे पहले खुद को अलग कर लें। हर बुखार को कोरोना न समझें लेकिन लापरवाही भी न करें। इसके बाद एंटीजन और आरटीपीसीआर जांच कराएं। पॉजिटिव आती है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और मशविरे में अमल शुरू कर दें। कोशिश करें कि संक्रमित ही न हों। अगर हों तो पॉजिटिविटी बनाए रखें। यह सबसे अधिक जरूरी है।
डॉ. जेएस कुशवाहा, स्वदेशी वैक्सीन, कोवाक्सिन ट्रायल के चीफ इन्वेस्टीगेटर यूपी
सांस फूले तो पेट के बल लेट जाएं
वैसे बचाव से अच्छा कोई विकल्प नहीं है कोरोना संक्रमण को दूर रखने के लिए। अगर संक्रमित होते हैं तो घबराएं नहीं। गहरी-गहरी सांसें लेते रहें और पेट के बल लेट जाएं। पल्स आक्सीमीटर से ऑक्सीजन लेवल की जांच करते रहें। अगर 92 के नीचे आने लगे तो समझेें आक्सीजन सपोर्ट की जरूरत है। अस्पताल में भर्ती होने का इंतजाम करें। घबराएं नहीं, इससे भी सांस फूलने का लक्षण उभर आता है।
डॉ. अनिल निगम, सीनियर चेस्ट फिजीशियन, सीएमएस उर्सला