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पहले से रची जाती रही ‘कानपुर बवाल’ की साजिश, कलाकारों को पीटने पर नहीं हुआ ‘भरत मिलाप’
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Tue, 03 Oct 2017 09:00 AM IST
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पुलिस और इंटेलिजेन्स पूरी तरह से फेल साबित
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यूपी के कानपुर में त्योहारों पर शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने की डीएम, एसएसपी की रणनीति बेअसर रही। शहर में दो स्थानों पर सांप्रदायिक संघर्ष हो गया। खुफिया भी पूरी तरह फेल साबित हुई। नए रूट से ताजिया जुलूस क्यों निकालने की कोशिश की गई, ऐसी आशंका हर साल होती है तो इससे निपटने के लिए इंतजाम क्यों नहीं किए गए।
मकानों की छतों से भारी पथराव किया गया इसलिए तय है कि छतों पर पत्थर इकट्ठा करके रखे गए थे। जूही परमपुरवा में तो सड़कें ईंट-पत्थरों से पटी पड़ी थीं, इतने ईंट-पत्थर एकाएक कहां से आ गए। माना जा रहा है कि साजिश पहले से रच जाती रही लेकिन खुफिया को इसकी भनक तक नहीं लगी। कानपुर रावतपुर रामलला इंटर कॉलेज परिसर में रामलीला कलाकारों पर भी पुलिस ने लाठियां भांजीं। यह सभी कलाकार एक कमरे में आराम कर रहे थे। देर शाम आयोजकों ने कलाकारों की पिटाई के विरोध में भरत मिलाप का मंचन रद्द कर दिया।
रविवार दोपहर पथराव के बाद लाठीचार्ज का आदेश मिलते ही पुलिसकर्मियों ने लाठियां भांजना शुरू कर दिया। बाहर हो रहे हो-हल्ला को नजरअंदाज कर रामलीला कलाकार कॉलेज परिसर में बने एक कमरे में आराम कर रहे थे। अचानक पुलिस इस कमरे में दाखिल हुई तो कोई भी कुछ नहीं समझ पाया। कमरे में लेटे यह कलाकार कुछ समझ पाते उससे पहले ही पुलिस ने उन्हें लाठियों से पीटना चालू कर दिया। अभिनय करने वाले टेनी मस्ताना और मंडलाधीश राजू को कई लाठियां लगीं। राम, लक्ष्मण, सीता और हनुमान का अभिनय करने वाले कलाकारों को भी लाठियां लगीं। इसके बाद यह कलाकार मौका देखकर इधर-उधर भागे। कलाकारों का कहना है कि वह पुलिस को बताते रहे कि वह तो रामलीला में अभिनय करते हैं, उनका इस बवाल से कोई लेना-देना नहीं है। इसके बावजूद पुलिस ने उनकी एक नहीं सुनी। उधर, श्री रामलला दशहरा कमेटी रावतपुर गांव के संयोजक चंद्र कुमार गंगवानी ने बताया कि रविवार को होने वाले भरत मिलाप का मंचन रद्द कर दिया गया।
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मकानों की छतों से भारी पथराव किया गया इसलिए तय है कि छतों पर पत्थर इकट्ठा करके रखे गए थे। जूही परमपुरवा में तो सड़कें ईंट-पत्थरों से पटी पड़ी थीं, इतने ईंट-पत्थर एकाएक कहां से आ गए। माना जा रहा है कि साजिश पहले से रच जाती रही लेकिन खुफिया को इसकी भनक तक नहीं लगी। कानपुर रावतपुर रामलला इंटर कॉलेज परिसर में रामलीला कलाकारों पर भी पुलिस ने लाठियां भांजीं। यह सभी कलाकार एक कमरे में आराम कर रहे थे। देर शाम आयोजकों ने कलाकारों की पिटाई के विरोध में भरत मिलाप का मंचन रद्द कर दिया।
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रविवार दोपहर पथराव के बाद लाठीचार्ज का आदेश मिलते ही पुलिसकर्मियों ने लाठियां भांजना शुरू कर दिया। बाहर हो रहे हो-हल्ला को नजरअंदाज कर रामलीला कलाकार कॉलेज परिसर में बने एक कमरे में आराम कर रहे थे। अचानक पुलिस इस कमरे में दाखिल हुई तो कोई भी कुछ नहीं समझ पाया। कमरे में लेटे यह कलाकार कुछ समझ पाते उससे पहले ही पुलिस ने उन्हें लाठियों से पीटना चालू कर दिया। अभिनय करने वाले टेनी मस्ताना और मंडलाधीश राजू को कई लाठियां लगीं। राम, लक्ष्मण, सीता और हनुमान का अभिनय करने वाले कलाकारों को भी लाठियां लगीं। इसके बाद यह कलाकार मौका देखकर इधर-उधर भागे। कलाकारों का कहना है कि वह पुलिस को बताते रहे कि वह तो रामलीला में अभिनय करते हैं, उनका इस बवाल से कोई लेना-देना नहीं है। इसके बावजूद पुलिस ने उनकी एक नहीं सुनी। उधर, श्री रामलला दशहरा कमेटी रावतपुर गांव के संयोजक चंद्र कुमार गंगवानी ने बताया कि रविवार को होने वाले भरत मिलाप का मंचन रद्द कर दिया गया।
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सुरक्षा को लेकर डीएम, एसएसपी की रणनीति बेअसर
ऐसी आशंका हर साल होती है तो इससे निपटने के लिए इंतजाम क्यों नहीं किए गए।
परमपुरवा, रावतपुर अति संवेदनशील इलाके हैं, कई बार सांप्रदायिक संघर्ष हो चुका है फिर पर्याप्त तैयारी क्यों नहीं थी। रावतपुर में शनिवार से शुरू हुआ विवाद रविवार रात तक भी नहीं सुलझाया जा सका। परमपुरवा में भी तीन घंटे से ज्यादा समय तक बवाल होता रहा। पुलिस और प्रशासनिक अफसरों ने दशहरा और मुहर्रम जुलूस को हल्के में लिया। पुरानी घटनाओं को नजरअंदाज कर दिया। जिन स्थानों पर बवाल हुआ, वहां पहले भी मुहर्रम और दशहरे के दौरान बवाल होते रहे हैं।
अफसर नए, भौगोलिक स्थिति से भी वाकिफ नहीं
ऐसी आशंका हर साल होती है तो इससे निपटने के लिए इंतजाम क्यों नहीं किए गए।
2013 में भी रावतपुर में बवाल हुआ था। तब रावतपुर गणेश नगर में रामनवमी जुलूस रोकने पर दो संप्रदाय के लोगों में संघर्ष हो गया था। जमकर पथराव, फायरिंग बमबाजी हुई थी। तीन दिन तक तनाव रहा था। तत्कालीन डीएम रोशन जैकब और एसएसपी अजय मिश्रा ने बमुश्किल मामला संभाला था। तब नगर आयुक्त अविनाश सिंह एडीएम सिटी थे। कई और पुलिस और प्रशासनिक अफसर भी थे, जिनकी आम लोगों में पैठ थी। दोनों संप्रदाय के लोग भी उनकी बात को समझते और मानते थे। अब लगभग सभी आला अफसर, एसपी, सीओ और थानेदार और एसीएम नए हैं। कई अफसरों को अपने इलाके की भौगोलिक स्थिति तक का पता नहीं है। आम लोगों में पैठ नहीं है। अपने क्षेत्र में समय तक नहीं देते हैं। मुखबिर तंत्र तो है ही नहीं। संभ्रात लोगों से भी ज्यादातर पुलिस और प्रशासनिक अफसरों का मेलजोल नहीं है। एलआईयू, इंटेलीजेंस और अन्य खुफिया इकाई के अफसरों व कर्मचारियों का अपना कोई मुखबिर तंत्र नहीं है। वे सिर्फ मीडिया कर्मियों की ही सूचनाओं पर निर्भर रहते हैं।
खुफिया कहां है
ऐसी आशंका हर साल होती है तो इससे निपटने के लिए इंतजाम क्यों नहीं किए गए।
खुफिया को पता ही नहीं चला कि शरारती तत्व एक सप्ताह से माहौल बिगाड़ने की साजिश कर रहे। इसका प्रमाण छतों से हुआ पथराव है कि शरारती तत्वों ने पत्थर इकट्ठा कर रखे थे। ये भी माना जा रहा है कि कुछ शरारती तत्व वेश बदलकर शोभायात्रा और जुलूसों में भी शामिल हो गए। पुलिस और प्रशासनिक अफसर इसे भांप भी नहीं पाए। डीएम और एसएसपी ने मुहर्रम और दशहरा की सुरक्षा का जो ब्लू प्रिंट तैयार किया, वह फेल हो गया।
संवेदनशील इलाके भी चिह्नित नहीं कर पाए
ऐसी आशंका हर साल होती है तो इससे निपटने के लिए इंतजाम क्यों नहीं किए गए।
शहर में मछरिया, परमपुरवा, मसवानपुर, रावतपुर, परेड, फेथफुलगंज बेहद संवेदनशील इलाके हैं। इन इलाकों में पूर्व में कई बार बवाल हो चुके हैं, लेकिन अफसर इस बार इन इलाकों में फोर्स का वितरण करने में चूक गए। जूही परमपुरवा बवाल फोर्स की कमी से हुआ है। फोर्स के सामने उपद्रवियों ने आगजनी और पथराव किया, लेकिन वे कुछ नहीं कर पाए। यही हाल रावतपुर में था। वहां पर भी फोर्स की कमी था। सूत्रों के मुताबिक अफसरों का सारा ध्यान परेड पर था। उनका रावतपुर और परमपुरवा में ध्यान ही नहीं गया। इस वजह से बवाल हुआ।
किसी का मोबाइल तोड़ा, तो किसी का छीना
ऐसी आशंका हर साल होती है तो इससे निपटने के लिए इंतजाम क्यों नहीं किए गए।
बवाल के दौरान मोबाइल से वीडियो बना रहे लोगों पर भी पुलिस का गुस्सा फूटा। पुलिसकर्मियों ने भाजपा से जुड़े रामजी का मोबाइल छीनकर तोड़ डाला। पुलिस कर्मी धर्मेंद्र के घर में घुसकर उनकी पत्नी का मोबाइल फोन छीन कर ले गए। रामजी और घर्मेंद्र की पत्नी ने पुलिस के लाठीचार्ज और उपद्रवियों और पुलिस की कार्रवाई का वीडियो बना लिया था। पुलिस ने राम लला मंदिर परिसर में खड़ी गाड़ियों को पलटा दिया। लाठी मारकर कई बाइकों को क्षतिग्रस्त कर दिया। लाठीचार्ज के दौरान रामलीला कमेटी के महामंत्री रोहित सिंह के 18 हजार रुपये भी गायब हो गए। रामलीला कमेटी के सचिव सुधीर सिंह चंदेल को पीटा। आरोप है कि पुलिस कर्मियों ने उनके 16 हजार रुपये भी छीन लिए, जो वह रामलीला के कलाकारों का भुगतान करने के लिए लेकर आए थे।
मर जाऊंगा तभी अस्पताल भेजोगे क्या
ऐसी आशंका हर साल होती है तो इससे निपटने के लिए इंतजाम क्यों नहीं किए गए।
पथराव में रावतपुर गांव निवासी दुकानदार शिव प्रसाद का सिर फट गया। मौके पर पहुंची पुलिस पूछताछ के बहाने उसे रावतपुर पुलिस चौकी ले आई। एसएसपी, डीएम पहुंचे। पकड़े गए शिव प्रसाद और अन्य लोगों से पूछताछ की। चौकी में दोनों संप्रदाय के लोगों के सभ्रांत लोगों से बातचीत की। डीएम और एसएसपी ने दोनों संप्रदाय के लोगों को भरोसा दिया कि भरत मिलाप की शोभा यात्रा और मुहर्रम का जुलूस दोनों निकलेंगे। एसपी पश्चिम फोर्स के साथ रावतपुर में ही कैंप करेंगे। अभी डीएम और एसएसपी दोनों पक्ष के लोगों से बातचीत कर रहे थे, उसी दरौन शिव प्रसाद चौकी के कमरे के बाहर निकले और हंगामा शुरू कर दिया। शिव प्रसाद ने कहा कि उनका सिर फटा है। पुलिस ने इलाज नहीं कराया है। चार घंटे से पुलिस चौकी से बिठाए हुए हैं। क्या हमारी पुलिस चौकी में मौत हो जाएगी, तभी अस्पताल भेजा जाएगा। इस पर पुलिसकर्मियों ने उसे डपट कर फिर कमरे में बिठा दिया।
एसपी ने रात में बैठक की थी
ऐसी आशंका हर साल होती है तो इससे निपटने के लिए इंतजाम क्यों नहीं किए गए।
शनिवार को बवाल शांत होने के बाद एसपी पश्चिम डॉ. गौरव ग्रोवर और सीओ कल्याणपुर रजनीश वर्मा ने मंदिर परिसर में रामलीला कमेटी के लोगों, भाजपा व अन्य हिन्दूवादी संगठनों के नेताओं के साथ बैठक की। अफसरों का कहना है कि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। भरत मिलाप शोभा यात्रा और मुहर्रम जुलूस दोनों की वीडियोग्राफी कराई जाएगी। अराजकतत्वों से सख्ती से निपटा जाएगा। बैठक में भाजपा पूर्व क्षेत्रीय पदाधिकारी चंद्र कुमार गंगवानी उर्फ लालू, रामलीला कमेटी के अध्यक्ष संतोष शुक्ला, महामंत्री रोहित सिंह चंदेल, बजरंग दल नेता आशीष त्रिपाठी, जितेंद्र गांधी, पार्षद राम औतार प्रजापति समेत तमाम लोग मौजूद रहे।