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अक्षर हवा में उड़ते नजर आएं तो हो जाएं ‘सावधान!’
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Tue, 08 Nov 2016 12:20 AM IST
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शब्द-अक्षर हवा में उड़ जाएं तो दिलाएं ट्रेनिंग
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आपका बच्चा अंग्रेजी के अक्षर बी को डी पढ़ता है, अंक 6 को 9 बताता है या बहुत धीरे-धीरे पढ़ता है तो वह डिसलेक्सिया से पीड़ित हो सकता है। ऐसे बच्चों को शब्दों को पहचानने में दिक्कत होती है, स्पेलिंग नहीं समझ पाते और पढ़ने, समझने और याद करने में परेशानी होती है। फिल्म ‘तारे जमीं पर’ की तरह अक्षर उड़ते नजर आते हैं। ऐसे बच्चों के लिए कनाडा में बसे कानपुर के काकादेव निवासी डॉ. विनय सिंह ने एक कंप्यूटर प्रोग्राम शुरू किया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस प्रोग्राम में बच्चे के ब्रेन को मजबूत करने की ट्रेनिंग दी जाती है। दिसंबर में यह प्रोग्राम कानपुर में भी शुरू हो जाएगा।
क्या है डिसलेक्सिया
यह कोई बीमारी नहीं है और न ही मानसिक अयोग्यता है। ऐसे लोगों को शब्द और अक्षर पहचानने में दिक्कत होती है। यह दिक्कत तीन से 15 साल आयु वर्ग के तीन फीसदी बच्चों में मिलती है। स्कूल में ऐसे बच्चे कमजोर होते हैं। उन्हें लिखने में दिक्कत होती है।
यह होगा
सॉफ्टवेयर सेल्स फील्ड इंडिया ब्रेन ट्रेनिंग एंड रिसर्च सेंटर के डॉ. विनय सिंह कहते हैं कि गुड़गांव, दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा में प्रोग्राम शुरू हो चुका है। अमूमन आठ से 15 साल की उम्र के बच्चों को लेकर ही अभिभावक आते हैं। पहले 10 दिन का एक-एक घंटे का प्रोग्राम होता है। विशेष उपकरणों के साथ कम्प्यूटर पर जानकारी दी जाती है। फिर ढाई महीने हफ्ते में तीन-तीन दिन की ट्रेनिंग चलती है। बच्चों की पढ़ने और लिखने की क्षमता को विशेष तकनीक से बढ़ाया जाता है। यह स्थाई होता है।
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क्या है डिसलेक्सिया
यह कोई बीमारी नहीं है और न ही मानसिक अयोग्यता है। ऐसे लोगों को शब्द और अक्षर पहचानने में दिक्कत होती है। यह दिक्कत तीन से 15 साल आयु वर्ग के तीन फीसदी बच्चों में मिलती है। स्कूल में ऐसे बच्चे कमजोर होते हैं। उन्हें लिखने में दिक्कत होती है।
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यह होगा
सॉफ्टवेयर सेल्स फील्ड इंडिया ब्रेन ट्रेनिंग एंड रिसर्च सेंटर के डॉ. विनय सिंह कहते हैं कि गुड़गांव, दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा में प्रोग्राम शुरू हो चुका है। अमूमन आठ से 15 साल की उम्र के बच्चों को लेकर ही अभिभावक आते हैं। पहले 10 दिन का एक-एक घंटे का प्रोग्राम होता है। विशेष उपकरणों के साथ कम्प्यूटर पर जानकारी दी जाती है। फिर ढाई महीने हफ्ते में तीन-तीन दिन की ट्रेनिंग चलती है। बच्चों की पढ़ने और लिखने की क्षमता को विशेष तकनीक से बढ़ाया जाता है। यह स्थाई होता है।
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