दोस्तों सारी दुनिया केर औरतें आपन पति लोगन का आपन उंगलियन पे नचावत हैं.. हमरे दिमाग मा एक ठो आईडिया आवा है कि अबकी मकर संक्त्रसति वाले दिन पतंग पे आपन पत्नी केर फोटू चिपकाव अउर फिर पूरा दिन ओका आपन उंगलियन पे नचाओ..
मगर ई आईडिया खाली मकर संक्त्रसंति वाले दिनै काम करिहै.. सच मा दोस्तों ई पत्नी रुपी प्राणी से हम इत्ता आजिज आय चुके हैं कि का बतायं.. मोदी जी केर लाइन याद आय रही है कि हम तो फकीर हन.. झोला उठाय के चलि देबे..
अइसेहे हमहूँ कभों कभों सोचित है कि झोला उठाय के निकरी जायं अउर साधू बनि जाएँ.. ई बात हम आपन हालसी रोड वाले दोस्त संतोस केसरवानी का बतावा तो वहु कहे लगे गुरु परेसान तो हमहूँ हन.. चलो कहूँ भाग चला जाय.. आजकाल प्रयागराज मा कुम्भ मेला चलि रहा है..
चलो गुरु वहीँ चला जाय.. संतोस केर ई आईडिया हमका नीक लाग तो हम, संतोस, रायपुरवा वाले संकठा, श्याम नगर वाले पुत्तन अउर दर्शनपुरवा वाले मनोहर.. सब इकठ्ठा हुई के प्लान बनावा गवा कि चलो कुम्भ मेला चला जाय.. तबहीं संकठा आपन जेब से तुड़ामुड़ा अखबार निकाल के दिखाय लगे.. जेमा लिखा रहा महिलाओं से विशेष निवेदन..
कृपया आपन आपन पतियन का केहू प्रकार का कष्ट ना देवें.. उनका प्यार अउर सम्मान देवें.. काहे से कुम्भ मेले मा साधुवन केर संख्या हर साल बढ़त जाय रही हैं.. निवेदक- नगर पालिका, प्रयागराज.. पुत्तन हुड़क के कहिन चाहे कुछौ होय.. अब हम कुम्भ मेला तो जइबै करब.. हम कहा हाँ यार.. जौन होई देखा जाई.. पर प्रयागराज कइसे चला जाई?..