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सीएम ने थमाई ई रिक्शा की चाबी, विभाग बता रहा अपात्र

Fri, 16 Dec 2016 08:50 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, कानपुर Updated Fri, 16 Dec 2016 08:50 PM IST
सार

- लाभार्थी की मृत्यु के बाद पत्नी लगा रही ई-रिक्शा पाने को चक्कर

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cm handed keys of e rickshaws department telling ineligible
डेमो

विस्तार

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से ई-रिक्शा की चाबी और आवंटन पत्र प्राप्त करने के डेढ़ साल बाद भी मृतक लाभार्थी की पत्नी ई-रिक्शा पाने को गुहार लगाती फिर रही है। लेकिन विभाग द्वारा उसे अपात्र बताकर लौटाया जा रहा है। सवाल ये उठता है कि सीएम के हाथों ई-रिक्शा की चाबी लेने के बाद परिवार अपात्रता की श्रेणी में कैसे आ गया। 
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यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जून 2015 में लखनऊ के जनेश्वर पार्क में बैटरी चालित ई-रिक्शा योजना की शुरुआत की थी। जिसके तहत इटावा जिले से 10 लाभार्थियों को सीएम ने ई-रिक्शा की चाबियां और आवंटन पत्र प्रदान किए थे। इनमें 5 इटावा और 5 जसवंतनगर नगरपालिका क्षेत्र के थे। नगरपालिका क्षेत्र इटावा के अली अहमद पुत्र हबीब अहमद निवासी सरायशेख भी इसमें शामिल थे। नौ लाभार्थियों को तो हाल के दिनों में ई-रिक्शा प्रदान कर दिए गए लेकिन लाभार्थी स्व. अली अहमद का परिवार इससे वंचित रहा।

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ई-रिक्शा हासिल करने के लिए भाग दौड़ में जुटी लाभार्थी स्व. अली अहमद की पत्नी मुन्नी ने कलक्ट्रेट परिसर में बताया कि मुख्यमंत्री से चाबी मिलने के करीब डेढ़ साल बाद जिले स्तर पर ई-रिक्शा उपलब्ध हुए हैं। उनके पति अली अहमद को ई-रिक्शा मिल पाता, उससे पहले ही उनकी मृत्यु हो गई। अब वह डूडा विभाग के चक्कर काट रही है। लेकिन उनसे कहा जा रहा कि वह अपात्र हैं। इसलिए उनका नाम लाभार्थियों की सूची से काट दिया गया है।

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डूडा के पास बचे हैं नौ ई-रिक्शा 
जिले को कुल 75 ई-रिक्शा प्राप्त हुए थे। जिसमें से बीते दिनों नुमाइश पंडाल में हुए कार्यक्रम के दौरान 66 लाभार्थियों को ई-रिक्शा प्रदान कर दिए गए। अभी नौ ई-रिक्शा डूडा के पास उपलब्ध हैं।


जिम्मेदारों का ये है कहना 
पीओ डूडा मिथलेश अवस्थी ने बताया कि विभाग ने जांच में लाभार्थी अली अहमद को पात्र पाया था। इसलिए उनका नाम 10 लाभार्थियों की सूची में शामिल किया गया। इसके बाद जब ई-रिक्शा प्राप्त हुए तो कानपुर मंडलायुक्त के निर्देश पर लाभार्थियों की पात्रता की जांच एसडीएम व तहसीलदार स्तर से कराई गई। जिसमें लेखपाल ने रिपोर्ट दी। इस रिपोर्ट में लाभार्थी की मृत्यु होेने पर उसे अपात्रता की श्रेणी में रखा गया है। इसी वजह से अली अहमद का नाम पात्र लोगों की सूची में नहीं है। हालांकि वह इसका कोई जवाब नहीं दे पाई कि आखिर जब मुख्यमंत्री किसी लाभार्थी को खुद लाभ देते हैं, तो उसे उस योजना से किस तरह वंचित रखा जा सकता है।
 

 

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