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तालाब के कायाकल्प के लिए भगीरथ बने कृष्णानंद
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हमीरपुर के पचखुरा गांव में कलारिन दाई तालाब की खुदाई करते बाबा कृष्णानंद।
- फोटो : HAMIRPUR
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हमीरपुर। अफसरों के न सुनने पर आठ साल से अकेले ही तालाब खोदाई कर कायाकल्प का भगीरथी प्रयास कर रहे बाबा कृष्णानंद का सपना साकार हो गया है। आखिर इस तालाब का चयन अमृत सरोवर योजना में कर लिया गया है। अब तालाब का कायाकल्प होगा।
पचखुरा बुजुर्ग में दो एकड़ का तालाब सवा सौ साल पुराना है। इसे गांव की महिला कलारिन दाई ने जमीन खरीदकर खोदवाया था। अनूठी चंदेलकालीन कलाकृतियों से सुसज्जित भव्य रामजानकी मंदिर का भी निर्माण कराया था। यह तालाब रखरखाव के अभाव में अपना अस्तित्व खो रहा था। गांव निवासी इंटर तक शिक्षा ग्रहण कर चुके किशनपाल सिंह वर्ष 1980 में संन्यास लेने के बाद बाबा कृष्णानंद हो गए थे। वर्ष 2014 में भ्रमण करते हुए वह गांव में आकर मंदिर में टिके तो उन्हें लगा कि मंदिर व तालाब की हालत दयनीय है। उन्होंने ग्रामीणों से तालाब के जीर्णोद्धार की बात की तो लोगों ने अनसुना कर दिया। इस पर उन्होंने अकेले ही तालाब का जीर्णोद्धार करने की ठानी। उन्होंने आठ साल में अकेले ही तालाब से तीन हजार ट्राली मिट्टी खोदकर जलभराव लायक स्वरूप दे दिया। वन विभाग द्वारा रोपे 75 सीसम, पाकर, बरगद व आंवला के पौधों को सींचकर तैयार कर दिया है।
बाबा कृष्णानंद ने बताया कि मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए वह सभी उच्चाधिकारियों के पास गए। सपा सरकार में लघु सिंचाई विभाग ने तालाब का इस्टीमेट बनाने की बात कही, लेकिन अभियंताओं ने तालाब का एरिया एक हेक्टेयर से कम होना कहकर मना कर दिया। वह अकेले तालाब का कायाकल्प करने में जुट गए। इस प्रयास पर 21 जून 2014 को राजस्व परिषद की सदस्य राजकुमारी कुशवाहा ने उन्हें 20 हजार रुपये का पुरस्कार दिया था। एक टीवी चैनल की मीनाक्षी अरोड़ा ने भी 10 हजार रुपये का चेक भेजा था। दिसंबर 2020 में दिल्ली से आई यूनिसेफ की टीम ने तालाब का निरीक्षण किया था और कृष्णानंद की प्रशंसा की थी।
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पचखुरा बुजुर्ग गांव स्थित कलारिन दाई तालाब का अमृत सरोबर योजना में चयन कर लिया गया है। इस पर जल्द ही काम शुरू कराया जाएगा। -साधना दीक्षित, परियोजना निदेशक ग्राम्य विकास
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पचखुरा बुजुर्ग में दो एकड़ का तालाब सवा सौ साल पुराना है। इसे गांव की महिला कलारिन दाई ने जमीन खरीदकर खोदवाया था। अनूठी चंदेलकालीन कलाकृतियों से सुसज्जित भव्य रामजानकी मंदिर का भी निर्माण कराया था। यह तालाब रखरखाव के अभाव में अपना अस्तित्व खो रहा था। गांव निवासी इंटर तक शिक्षा ग्रहण कर चुके किशनपाल सिंह वर्ष 1980 में संन्यास लेने के बाद बाबा कृष्णानंद हो गए थे। वर्ष 2014 में भ्रमण करते हुए वह गांव में आकर मंदिर में टिके तो उन्हें लगा कि मंदिर व तालाब की हालत दयनीय है। उन्होंने ग्रामीणों से तालाब के जीर्णोद्धार की बात की तो लोगों ने अनसुना कर दिया। इस पर उन्होंने अकेले ही तालाब का जीर्णोद्धार करने की ठानी। उन्होंने आठ साल में अकेले ही तालाब से तीन हजार ट्राली मिट्टी खोदकर जलभराव लायक स्वरूप दे दिया। वन विभाग द्वारा रोपे 75 सीसम, पाकर, बरगद व आंवला के पौधों को सींचकर तैयार कर दिया है।
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बाबा कृष्णानंद ने बताया कि मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए वह सभी उच्चाधिकारियों के पास गए। सपा सरकार में लघु सिंचाई विभाग ने तालाब का इस्टीमेट बनाने की बात कही, लेकिन अभियंताओं ने तालाब का एरिया एक हेक्टेयर से कम होना कहकर मना कर दिया। वह अकेले तालाब का कायाकल्प करने में जुट गए। इस प्रयास पर 21 जून 2014 को राजस्व परिषद की सदस्य राजकुमारी कुशवाहा ने उन्हें 20 हजार रुपये का पुरस्कार दिया था। एक टीवी चैनल की मीनाक्षी अरोड़ा ने भी 10 हजार रुपये का चेक भेजा था। दिसंबर 2020 में दिल्ली से आई यूनिसेफ की टीम ने तालाब का निरीक्षण किया था और कृष्णानंद की प्रशंसा की थी।
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पचखुरा बुजुर्ग गांव स्थित कलारिन दाई तालाब का अमृत सरोबर योजना में चयन कर लिया गया है। इस पर जल्द ही काम शुरू कराया जाएगा। -साधना दीक्षित, परियोजना निदेशक ग्राम्य विकास