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Kanpur News: दिसंबर में शहर में हो सकता पहला किडनी ट्रांसप्लांट
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कानपुर। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से संबद्ध हैलट के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में गुर्दा प्रत्यारोपण सेवा शुरू करने को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। दिसंबर में अस्पताल में पहला किडनी ट्रांसप्लांट किया जा सकता है। अब तक कुल पांच रोगियों का किडनी ट्रांसप्लांट के लिए पंजीकरण किया जा चुका है। इन सभी पांचों मरीजों के लिए डोनर (दाता) भी मिल गए हैं। मरीजों के परिजनों ने ही स्वेच्छा से गुर्दा दान करने की सहमति दी है।
विभागाध्यक्ष डॉ. युवराज गुलाटी ने बताया कि वर्तमान में ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए सभी पांचों मरीजों और उनके डोनर्स की जरूरी चिकित्सीय जांचें की जा रही हैं। डॉक्टरों की टीम डोनर और रेसिपिएंट (ग्राही) के ऊतकों (टिश्यू) का मिलान, ब्लड ग्रुप, फिटनेस और अन्य आवश्यक पैथोलॉजिकल परीक्षणों को बारीकी से परख रही है। सभी रिपोर्ट सही पाए जाने और कागजी प्रक्रिया पूरी होते ही ऑपरेशनों की तिथि तय कर दी जाएगी।
अस्पताल प्रशासन का अनुमान है कि दिसंबर में हैलट अस्पताल में पहला किडनी ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक संपन्न कर लिया जाएगा। वर्तमान में अस्पताल के स्पेशल नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ की टीम ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है। हैलट में यह सेवा शुरू होने से कानपुर समेत आसपास के 18 जिलों के लोगों को बेहद कम खर्च में अच्छा इलाज मिल सकेगा। निजी अस्पतालों में अभी किडनी ट्रांसप्लांट कराने में काफी पैसे खर्च करने पड़ते हैं। अस्पताल में नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. युवराज गुलाटी और यूरोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल वैद्य के साथ उनकी टीम पहले से ही प्रशिक्षण प्राप्त है जो ट्रांसप्लांट करेगी।
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गुर्दा ओपीडी में रोज आते 200 रोगी
अस्पताल में चलने वाली गुर्दा ओपीडी में हर रोज दो सौ रोगी आते हैं जिसमें 40 से 50 प्रतिशत डायलिसिस के रोगी रहते हैं। ऐसे में ये रोगी भी ट्रांसप्लांट करा सकेंगे।
निजी अस्पतालों में किडनी ट्रांसप्लांट का खर्च 10 से 15 लाख रुपये तक आता है जबकि हैलट में तकरीबन दो से ढाई लाख में इलाज हो सकेगा।
एसजीपीजीआई में वर्तमान में आयुष्मान कार्ड, विधायक निधि, सीएम या पीएम निधि के जरिये सर्जरी, भर्ती आदि में भी मदद मिल जाती है। इसी तर्ज पर यहां भी रूपरेखा तैयार की जा रही है।
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विभागाध्यक्ष डॉ. युवराज गुलाटी ने बताया कि वर्तमान में ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए सभी पांचों मरीजों और उनके डोनर्स की जरूरी चिकित्सीय जांचें की जा रही हैं। डॉक्टरों की टीम डोनर और रेसिपिएंट (ग्राही) के ऊतकों (टिश्यू) का मिलान, ब्लड ग्रुप, फिटनेस और अन्य आवश्यक पैथोलॉजिकल परीक्षणों को बारीकी से परख रही है। सभी रिपोर्ट सही पाए जाने और कागजी प्रक्रिया पूरी होते ही ऑपरेशनों की तिथि तय कर दी जाएगी।
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अस्पताल प्रशासन का अनुमान है कि दिसंबर में हैलट अस्पताल में पहला किडनी ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक संपन्न कर लिया जाएगा। वर्तमान में अस्पताल के स्पेशल नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ की टीम ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है। हैलट में यह सेवा शुरू होने से कानपुर समेत आसपास के 18 जिलों के लोगों को बेहद कम खर्च में अच्छा इलाज मिल सकेगा। निजी अस्पतालों में अभी किडनी ट्रांसप्लांट कराने में काफी पैसे खर्च करने पड़ते हैं। अस्पताल में नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. युवराज गुलाटी और यूरोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल वैद्य के साथ उनकी टीम पहले से ही प्रशिक्षण प्राप्त है जो ट्रांसप्लांट करेगी।
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गुर्दा ओपीडी में रोज आते 200 रोगी
अस्पताल में चलने वाली गुर्दा ओपीडी में हर रोज दो सौ रोगी आते हैं जिसमें 40 से 50 प्रतिशत डायलिसिस के रोगी रहते हैं। ऐसे में ये रोगी भी ट्रांसप्लांट करा सकेंगे।
निजी अस्पतालों में किडनी ट्रांसप्लांट का खर्च 10 से 15 लाख रुपये तक आता है जबकि हैलट में तकरीबन दो से ढाई लाख में इलाज हो सकेगा।
एसजीपीजीआई में वर्तमान में आयुष्मान कार्ड, विधायक निधि, सीएम या पीएम निधि के जरिये सर्जरी, भर्ती आदि में भी मदद मिल जाती है। इसी तर्ज पर यहां भी रूपरेखा तैयार की जा रही है।